16 जुलाई को तेजस्वी यादव पर आएगा फैसला, क्या RJD में होगी बड़ी टूट?
क्या तेजस्वी यादव के खिलाफ फैसला आने पर RJD संभाल पाएगा लालू परिवार? 'जनपथ' शो में एंकर ललित राय और दिनेश आनंद ने किया बिहार की राजनीति का एक्स-रे।
Janpath: बिहार की राजनीति में भले ही इस समय कोई चुनावी सुगबुगाहट न हो, लेकिन आगामी 16 जुलाई की तारीख सियासी गलियारों में चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र बन चुकी है। 'द फ़ेडरल देश' के लोकप्रिय शो 'जनपथ' में इस मुद्दे पर बेहद गंभीर और विस्तृत चर्चा हुई। शो के होस्ट और एंकर ललित राय ने बिहार के राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तीखे सवाल उठाए, जिन पर पटना से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार दिनेश आनंद ने बेहद बारीकी से विश्लेषण किया।
16 जुलाई क्यों है बेहद निर्णायक?
चर्चा की शुरुआत करते हुए एंकर ललित राय ने रेखांकित किया कि 16 जुलाई को आईआरसीटीसी (जमीन के बदले नौकरी) घोटाला मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट का अहम फैसला आना है। इस मामले में लालू प्रसाद यादव के साथ-साथ उनके बेटे और बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी मुख्य आरोपियों में से एक हैं। ललित राय ने सवाल उठाया कि यदि यह फैसला तेजस्वी यादव के खिलाफ जाता है और उन्हें हिरासत या सजा होती है, तो इसके बिहार की राजनीति पर क्या दूरगामी प्रभाव (Implications) होंगे?
क्या आरजेडी का हश्र भी टीएमसी जैसा होगा?
एंकर ललित राय के सवालों का जवाब देते हुए वरिष्ठ पत्रकार दिनेश आनंद ने पश्चिम बंगाल की राजनीति का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई कद्दावर नेता और विधायक पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए थे, कमोबेश वैसी ही स्थिति राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में भी बन सकती है।
दिनेश आनंद ने अपने दशकों के पत्रकारीय अनुभव को साझा करते हुए कहा, "लालू प्रसाद यादव में जो करिश्माई छवि और आम जनता व कार्यकर्ताओं से जुड़ने की अद्भुत क्षमता थी, उसकी तेजस्वी यादव में कमी दिखती है। आरजेडी के भीतर भी इस बात को लेकर अंदरूनी असंतोष है कि तेजस्वी यादव केवल चुनाव के समय सक्रिय होते हैं और हार-जीत के बाद कार्यकर्ताओं या नेताओं से आसानी से मुलाकात नहीं करते।"
लालू परिवार के सामने कमान का संकट
शो 'जनपथ' में इस बात पर भी विस्तार से चर्चा हुई कि यदि तेजस्वी यादव को सजा होती है, तो पार्टी का अगला उत्तराधिकारी कौन होगा? वरिष्ठ पत्रकार दिनेश आनंद ने आरजेडी के 29 साल के इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि लालू यादव का एक ट्रैक रिकॉर्ड रहा है कि वे संकट के समय परिवार से बाहर के किसी भी वफादार नेता पर भरोसा नहीं करते। चारा घोटाले के समय उन्होंने रंजन प्रसाद यादव या रामकृपाल यादव जैसे दिग्गजों के बजाय राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाया था।
आज की तारीख में मीसा भारती पर भी कई आरोप हैं, तेज प्रताप यादव पहले से ही अपनी अलग राह पकड़े हुए हैं, और रोहिणी आचार्य सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। ऐसे में विदिन फैमिली (परिवार के भीतर) भी किसी एक चेहरे पर सहमति बनाना लालू यादव के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।
बीजेपी और नीतीश कुमार के लिए 'एडवांटेज'
चर्चा का समापन करते हुए दोनों पत्रकारों ने माना कि 16 जुलाई की तारीख का इंतजार सिर्फ आरजेडी ही नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी कर रही है। यदि फैसला आरजेडी के खिलाफ जाता है, तो यह एनडीए गठबंधन के लिए एक बड़ा 'पॉलिटिकल एडवांटेज' साबित होगा। दिनेश आनंद के अनुसार, बिहार की जनता नीतीश कुमार के शासनकाल में लॉ एंड ऑर्डर और विकास कार्यों को लेकर उन पर भरोसा करती है। ऐसे में विपक्षी खेमे की कमजोरी एनडीए को और मजबूत करेगी।
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