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पेपर लीक व बेरोजगारी पर संग्राम: 'युवा जस्टिस मोर्चा' की लखनऊ हुंकार

'द फ़ेडरल देश' के शो 'जनपथ' में देखिए युवा जस्टिस मोर्चा का विज़न। उत्तर प्रदेश में पेपर लीक, लटकी भर्तियों और चौरीचौरा-काकोरी साइकिल यात्रा का पूरा सच।


Janpath: उत्तर प्रदेश में लगातार हो रहे पेपर लीक, लटकी हुई सरकारी भर्तियों और शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण के खिलाफ छात्र-युवाओं ने एक बड़े आंदोलन की घोषणा की है। 'युवा जस्टिस मोर्चा' के बैनर तले छात्र और युवा कार्यकर्ता चौरीचौरा (गोरखपुर) से काकोरी (लखनऊ) तक एक ऐतिहासिक साइकिल यात्रा निकालने जा रहे हैं। इस यात्रा का समापन गांधी जयंती पर राजधानी लखनऊ में एक बड़े छात्र सम्मेलन और हुंकार रैली के रूप में होगा।


डिजिटल प्लेटफॉर्म 'द फेडरल देश' के खास कार्यक्रम 'जनपद' में इस पूरे आंदोलन के विज़न और रणनीतियों पर एंकर मनीष कुमार ने विस्तृत चर्चा की गई। इस परिचर्चा में युवा जस्टिस मोर्चा की ओर से दो प्रमुख छात्र प्रतिनिधि बतौर अतिथि शामिल हुए:

डॉ. सुधांशु वाजपेयी: लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक व परास्नातक और दिल्ली विश्वविद्यालय से पीएचडी (2024 में अवार्डेड), जो वर्तमान में उत्तर प्रदेश की अटकी हुई भर्तियों और पेपर लीक के कारण बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं।

महेंद्र यादव: लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक, परास्नातक और एलएलबी करने के बाद राजनीति विज्ञान विषय में शोधार्थी (रिसर्च स्कॉलर)। वह लगातार चार बार नेट (NET) और जेआरएफ (JRF) क्वालिफाइड हैं, लेकिन 2022 से असिस्टेंट प्रोफेसर (विज्ञापन संख्या 51) की भर्ती प्रक्रिया पूरी न होने के कारण रोजगार की बाट जोह रहे हैं।

रोजगार और शिक्षा व्यवस्था पर उठे मुख्य सवाल
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने बताया कि यह आंदोलन किसी एक परीक्षा या विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश के हर उस युवा की आवाज है जो सालों से परीक्षा की तैयारी में लगा है।

आंदोलनकारियों ने मांग रखी है कि उत्तर प्रदेश के सभी विभागों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, राजस्व और यूपीएसएसएससी (UPSSSC) में खाली पड़े लाखों पदों पर पारदर्शी तरीके से तत्काल भर्तियां की जाएं। इसके साथ ही हर साल एक निश्चित 'भर्ती कैलेंडर' लागू किया जाए ताकि विज्ञापन से लेकर परीक्षा, परिणाम और नियुक्ति की समय-सीमा तय हो सके।

छात्र नेताओं ने यूपी टीजीटी/पीजीटी, असिस्टेंट प्रोफेसर, आरओ/एआरओ, यूपी पुलिस, लेखपाल, यूपीएसआई और एनटीए/नीट जैसी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक पर नाराजगी जताते हुए सख्त कानून और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली बनाने की बात कही। इसके अलावा सरकारी विभागों में बढ़ रही आउटसोर्सिंग व संविदा प्रथा को समाप्त कर स्थायी नौकरियां देने तथा विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में बंद पड़े छात्र संघ चुनावों को पुनः बहाल करने का मुद्दा उठाया।

शिक्षा के व्यवसायीकरण पर बोलते हुए अतिथियों ने मांग की कि निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर लगाम लगाने के लिए सख्त 'फीस रेगुलेशन एक्ट' लागू किया जाए। उन्होंने उत्तर प्रदेश में बंद या मर्ज किए गए 26,000 प्राथमिक विद्यालयों को दोबारा शुरू करने की मांग की, ताकि गांव-देहात के गरीब बच्चों को शिक्षा मिले और हजारों पदों पर शिक्षकों व कर्मचारियों की नियुक्तियां हो सकें।

चौरीचौरा से काकोरी ही क्यों?
साइकिल यात्रा के रूट का चयन ऐतिहासिक संदर्भ को ध्यान में रखकर किया गया है। अतिथियों ने स्पष्ट किया कि चौरीचौरा और काकोरी भारत के स्वतंत्रता संग्राम और शहीद-ए-आजम भगत सिंह व उनके साथियों के संघर्ष के प्रतीक रहे हैं।

इसके साथ ही, साइकिल को यात्रा का साधन चुनने की वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि महंगाई के दौर में साइकिल आम और गरीब बेरोजगार युवा की पहचान है। बिना किसी बड़े आर्थिक बजट या वाहनों के ईंधन खर्च के, गांव-गांव और यूनिवर्सिटी परिसरों तक पहुंचने का यह सबसे व्यावहारिक तरीका है।

निष्पक्ष मंच और आगे की रणनीति
अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर लखनऊ विश्वविद्यालय, बीएचयू वाराणसी, इलाहाबाद विश्वविद्यालय और गोरखपुर विश्वविद्यालय जैसे प्रमुख परिसरों में जनसंपर्क अभियान शुरू कर दिया गया है।

अतिथियों ने साफ किया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल से प्रायोजित नहीं है। इसमें दलगत और सांगठनिक पहचान से परे हटकर रोजगार और शिक्षा के सवाल पर निष्पक्ष रूप से हर युवा का स्वागत किया गया है। चौरीचौरा से शुरू होकर यह यात्रा पूर्वांचल और अवध के विभिन्न जिलों से गुजरते हुए लखनऊ पहुंचेगी, जहां महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर विशाल छात्र-युवा महापंचायत के साथ आंदोलन के अगले चरण का ऐलान किया जाएगा।


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