संसद सत्र का पहला दिन हंगामेदार, नीट धांधली पर उग्र छात्र प्रदर्शन, बैकफुट पर आई सरकार!
नीट (NEET) पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और हजारों छात्रों ने दिल्ली में 'चलो संसद' मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों के बैरिकेड्स तोड़कर रायसीना हिल्स तक पहुंचने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।
दिल्ली की सड़कों पर आज युवाओं और छात्रों का जबरदस्त गुस्सा देखने को मिला। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के बैनर तले हजारों छात्रों ने 'चलो संसद' मार्च का आह्वान किया था। प्रदर्शनकारी सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए संसद भवन के बेहद करीब रायसीना मार्ग तक जा पहुंचे।
हालात इतने बेकाबू हो गए कि पुलिस को भीड़ हटाने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले दागने पड़े। सुबह जंतर-मंतर पर 5,000 से ज्यादा छात्र जमा थे। इस पुलिस कार्रवाई की गूंज संसद के अंदर भी सुनाई दी, जहां मल्लिकार्जुन खरगे और डिंपल यादव समेत पूरे विपक्ष ने सरकार पर जोरदार हमला बोला।
इधर CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने अपना अनशन खत्म कर दिया है, जबकि पार्टी के दो प्रवक्ताओं ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से उनके आवास पर 10 मिनट तक मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।
आज इसी मुद्दे पर चर्चा के लिए द फेडरल के खास शो जनपथ में हमारे साथ लखनऊ से दो वरिष्ठ पत्रकार मनमोहन अग्रवाल और नितिन श्रीवास्तव जुड़े हैं।
मनमोहन अग्रवाल (वरिष्ठ पत्रकार):
"देखिए, यह आंदोलन पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर चल रहा था। जब सोनम वांगचुक जैसे विचारकों का इसे समर्थन मिला और नीट परीक्षा दोबारा लीक होने से लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटका, तो गुस्सा बढ़ना स्वाभाविक था।
सरकार ने 20 दिनों तक आंदोलनकारियों से कोई बात नहीं की, जिससे छात्रों का आक्रोश और बढ़ गया। आज जब संसद का मानसून सत्र शुरू हुआ, तो युवाओं की भीड़ ने बैरिकेड्स तोड़ दिए। रायसीना हिल्स जैसी संवेदनशील जगह तक पहुंचना प्रशासन की बड़ी चूक को दर्शाता है।
अगर सरकार बैकचैनल बातचीत पहले ही शुरू कर देती, तो आज संसद के बाहर और अंदर ऐसा हंगामा न होता। हालांकि, बातचीत शुरू होने के बावजूद छात्र अभी भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े हैं।"
नितिन श्रीवास्तव (वरिष्ठ पत्रकार):
"बिल्कुल, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि चौथे हफ्ते में जाकर सरकार जगी है। इतने दिनों से मुख्यधारा की मीडिया इस प्रदर्शन को नजरअंदाज कर रही थी, लेकिन सोशल मीडिया और विदेशी मीडिया के आने के बाद दबाव बढ़ा।
जहाँ तक विपक्षी गोलबंदी का सवाल है, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पूरी तरह छात्रों के साथ खड़ी दिखीं। डिंपल यादव और अन्य सांसदों ने जंतर-मंतर तक मार्च निकाला।
एक और बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या नीट आंदोलन के चलते अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मुद्दा दब जाएगा? मुझे ऐसा नहीं लगता। राम मंदिर दान में धांधली सीधा आस्था से जुड़ा मामला है। भले ही नीट पर सरकार नेगोशिएशन की टेबल पर आ गई हो, लेकिन विपक्ष यूपी चुनाव तक राम मंदिर चंदा चोरी के मुद्दे को बिल्कुल ठंडा नहीं पड़ने देगा।"
मानसून सत्र के पहले ही दिन पेपर लीक और राम मंदिर जैसे दो ज्वलंत मुद्दों ने केंद्र सरकार को बैकफुट पर ला दिया है। अब देखना होगा कि सरकार छात्रों की मांगें मानती है या यह आंदोलन और बड़ा रूप लेता है।

