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क्या बैकफुट पर हैं CEC ज्ञानेश कुमार? चिराग, कुशवाहा और TDP ने उठाई स्पष्टीकरण की मांग

'द फेडरल देश' के शो 'जनपथ' में पत्रकार मनीष और राजनीतिक विश्लेषक दीपक कोचगवे ने SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) विवाद पर चर्चा की। एनडीए के प्रमुख सहयोगियों चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा और टीडीपी ने चुनाव आयोग से जनता के संशय दूर करने और पारदर्शिता बरतने की मांग की है।


देश भर में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया अब केवल विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच का विवाद नहीं रह गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग (ECI) पर अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अपने ही सहयोगियों का भारी दबाव बनने लगा है। चिराग पासवान (LJP-रामविलास), उपेंद्र कुशवाहा (RLM) और टीडीपी (TDP) जैसे एनडीए के घटक दलों ने सार्वजनिक रूप से बयान देकर चुनाव आयोग से जनता के बीच पैदा हुए भ्रम और आशंकाओं को तुरंत दूर करने की मांग की है।

'द फेडरल देश' के खास शो 'जनपथ' में मनीष कुमार ने जाने-माने राजनीतिक विश्लेषक दीपक कोचगवे (Deepak Kochgaway) के साथ इस पूरे सियासी घटनाक्रम और एनडीए के भीतर मचे घमासान पर विस्तार से बातचीत की।

एनडीए सहयोगियों ने क्यों खोला मोर्चा?

शो 'जनपथ' में मनीष के सवालों का जवाब देते हुए दीपक कोचगवे ने विश्लेषण किया कि एनडीए के सहयोगी दलों का यह रुख अचानक नहीं आया है। बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव और देश के अन्य हिस्सों में चल रही राजनीतिक हलचलों के बीच चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा दोनों अच्छी तरह जानते हैं कि अगर मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटने या विसंगतियों का आरोप सच साबित होता है, तो इसका सीधा खामियाजा ज़मीन पर सत्ताधारी गठबंधन को भुगतना पड़ेगा।

ॉदीपक कोचगवे ने कहा, "चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा दोनों ही ज़मीनी राजनीति करने वाले नेता हैं। वे यह संदेश नहीं देना चाहते कि वे चुनाव आयोग की हर बात का आंख मूंदकर समर्थन कर रहे हैं। यही कारण है कि चिराग पासवान ने साफ शब्दों में कहा कि वे सरकार में होने के बावजूद किसी संवैधानिक संस्था का अनुचित बचाव नहीं करेंगे और आयोग को जनता का संदेह दूर करना ही चाहिए।"

EC के अंदरूनी मतभेद और ज्ञानेश कुमार की चुनौती

चर्चा के दौरान यह बात भी सामने आई कि चुनाव आयोग के भीतर से ही प्रक्रियात्मक खामियों और प्रक्रियाओं को लेकर 14 अलग-अलग आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। विपक्ष पहले ही 13 करोड़ वोटरों के प्रभावित होने और एसआईआर प्रक्रिया के माध्यम से वोट काटने का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर अड़ा है। ऐसे में एनडीए के अपने सहयोगियों (चिराग, कुशवाहा और टीडीपी) द्वारा पारदर्शिता और स्पष्टीकरण की मांग ने ज्ञानेश कुमार को दोहरे दबाव में ला खड़ा किया है।

राजनीतिक विश्लेषक दीपक कोचगवे के अनुसार, यह विवाद अब केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से संवेदनशील मोड़ ले चुका है। यदि चुनाव आयोग जल्द ही अपने रुख और डेटा को लेकर पूरी तरह पारदर्शिता नहीं दिखाता है, तो एनडीए के भीतर का यह असंतोष और गहरा सकता है।

क्या है आगे का रास्ता?

'जनपथ' में हुई इस चर्चा का निष्कर्ष यह निकला कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग को अब केवल पत्राचार या प्रेस विज्ञप्तियों तक सीमित रहने के बजाय, सभी राजनीतिक दलों—चाहे वे सत्ता पक्ष के हों या विपक्ष के—को भरोसे में लेना होगा। जब एनडीए के अपने घटक दल ही ECI की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने लगें, तो यह स्थिति चुनाव आयोग के लिए अपनी विश्वसनीयता को बचाने की सबसे बड़ी परीक्षा बन जाती है।


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