डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'द फ़ेडरल देश' के विशेष कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार व एंकर मनीष कुमार के साथ ग्राउंड ज़ीरो से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक रावत ने इस दर्दनाक घटना की परतें खोलीं और राजधानी के भीतर फल-फूल रहे अवैध निर्माण, नगर निगम (MCD) के अधिकारियों की मिलीभगत और जानलेवा प्रशासनिक लापरवाही पर तीखे सवाल खड़े किए।
हादसे का पूरा घटनाक्रम: दोपहर 1:34 बजे की पीसीआर कॉल और चीख-पुकार
सूचना और तत्काल हालात: दिल्ली पुलिस के साउथ कैंपस थाने को रविवार दोपहर करीब 1:34 बजे नानकपुरा गुरुद्वारे और सत्य निकेतन क्षेत्र के पास एक बहुमंजिला इमारत गिरने की आपातकालीन पीसीआर कॉल मिली।
धूल का गुबार और संडे का दिन: चश्मदीदों के अनुसार, इमारत गिरते ही पूरा इलाका कंक्रीट के मलबे और धूल के घने गुबार में तब्दील हो गया। रविवार का दिन होने के कारण विश्वविद्यालय के कॉलेज बंद थे, लिहाजा बड़ी संख्या में छात्र अपने-अपने कमरों में आराम कर रहे थे या पढ़ाई कर रहे थे।
मलबे के नीचे से फोन कॉल: प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इमारत के गिरते ही अंदर मौजूद छात्रों को बाहर निकलने का कोई मौका नहीं मिला। मलबे में फंसे कई छात्र अंदर से अपने मोबाइल फोन से दोस्तों और आपातकालीन नंबरों पर कॉल कर रोते हुए मदद की गुहार लगा रहे थे।
खतरनाक घोषित होने के बावजूद किसकी शह पर खुला 75 बेड का हॉस्टल?
'द फ़ेडरल देश' की पड़ताल में प्रशासनिक तंत्र की आपराधिक लापरवाही के चौंकाने वाले सबूत सामने आए हैं:
1 साल पहले 'खतरनाक' का नोटिस: अभिषेक रावत ने खुलासा किया कि इस 40 से 50 साल पुरानी इमारत को करीब एक वर्ष पूर्व नगर निगम (MCD) द्वारा आधिकारिक रूप से 'खतरनाक इमारत' (Dangerous Building) घोषित किया गया था।
2-3 महीने पहले दोबारा संचालन: बिना किसी बुनियादी ढांचे के बदलाव या मजबूतीकरण के, महज दो से तीन महीने पहले इस इमारत में 'हॉस्टल डेज' नाम से 75 बेड का बॉयज पीजी हॉस्टल दोबारा शुरू कर दिया गया।
बिना पिलर की 6 मंजिला इमारत: नियमों के अनुसार दिल्ली में आवासीय क्षेत्रों में 4 मंजिल से ऊपर निर्माण की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद 25-30 गज में सिर्फ ईंटों की पुरानी दीवारों के सहारे 6 मंजिला ढांचा खड़ा था, जिसके भूतल (ग्राउंड फ्लोर) पर एक केमिस्ट की दुकान और ऊपर की पांच मंजिलों में छात्रों के लिए हॉस्टल चल रहा था।
बेसमेंट में अवैध खुदाई और बारिश का पानी बना काल
आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज और स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा दी गई जानकारियों की पुष्टि करते हुए पड़ताल में सामने आया:
नींव के साथ खिलवाड़: हॉस्टल के बेसमेंट में कई दिनों से अनधिकृत निर्माण और खुदाई का काम गुपचुप तरीके से कराया जा रहा था।
बारिश से कमजोर हुई दीवारें: दिल्ली में पिछले दो से तीन दिनों से रुक-रुक कर हो रही तेज बारिश का पानी बेसमेंट के गड्ढों में भर गया था। जलभराव और खुदाई के चलते पुरानी ईंटों की कमजोर नींव ने वजन झेलना बंद कर दिया और पूरी इमारत एक झटके में ध्वस्त हो गई।
आसपास की इमारतों को खतरा: यह ढांचा पुराने लाल डोरा/शहरीकृत गांव की तर्ज पर आसपास की इमारतों के सहारे टिका था। इसके ढहने से पास की इमारत का मुख्य निकास द्वार भी मलबे से पूरी तरह बंद हो गया।
राजनीतिक हलचल: गृह मंत्री ने टाला कार्यक्रम, सीएम मौके पर, पीएमओ ने जताया शोक
हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी गूंज राष्ट्रीय स्तर पर सुनाई दी:
गृह मंत्री का गोवा दौरा स्थगित: केंद्रीय गृह मंत्री का गोवा में पार्टी कार्यालय के उद्घाटन का पूर्व-निर्धारित कार्यक्रम था, लेकिन राजधानी में हुए इस बड़े हादसे और राहत कार्यों की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने कार्यक्रम को तुरंत स्थगित कर दिया।
मुख्यमंत्री का दौरा: दिल्ली के मुख्यमंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधि तत्काल मौके पर पहुंचे और राहत कार्यों की समीक्षा की।
प्रधानमंत्री का शोक संदेश: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया गया और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हुए हर संभव मदद का भरोसा दिया गया।
MCD में ट्रांसफर-पोस्टिंग का खेल और लीपापोती का इतिहास
वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक रावत ने इस बात पर कड़ा प्रहार किया कि दिल्ली में हर बड़े हादसे के बाद सिर्फ खानापूर्ति की जाती है:
सवा करोड़ की रिश्वतखोरी के आरोप: आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज के हवाले से चर्चा में यह गंभीर मुद्दा उठा कि एमसीडी के बिल्डिंग विभाग में मलाईदार ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए सवा-सवा करोड़ रुपये तक की बोली लगती है। यदि कोई अधिकारी रिश्वत देकर कुर्सी पाएगा, तो वह जनसुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय केवल अपनी वसूली करेगा।
छोटे कर्मचारियों पर गाज: अमूमन ऐसे मामलों में 10-15 दिनों की जांच कमेटी बिठाई जाती है और अंत में किसी कनिष्ठ अभियंता (JE) या बेलदार स्तर के कर्मचारी को निलंबित कर बड़े अफसरों और माफिया को बचा लिया जाता है।
पुराने हादसों से कोई सीख नहीं: चर्चा में लक्ष्मीनगर इमारत हादसा (60 से अधिक मौतें), मुंडका अग्निकांड, अनाज मंडी (सदर बाजार) फैक्ट्री अग्निकांड और हालिया पटेल नगर कोचिंग बेसमेंट हादसे का उदाहरण देते हुए रेखांकित किया गया कि दिल्ली में प्रशासनिक अनदेखी लगातार युवाओं और मासूमों की बलि ले रही है।
अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की चमक के पीछे स्याह हकीकत: आगामी ब्रिक्स (BRICS) जैसे अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के लिए राजधानी को सजाने और बंद करने के बड़े-बड़े दावों के बीच, देश के दिल में छात्रों के सिर पर सुरक्षित छत तक न होना व्यवस्था की विफलता को उजागर करता है।
इमारत के मालिक गुरुग्राम में रहने वाले दो भाई हैं, जिनके खिलाफ दिल्ली पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या सहित संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उनकी धरपकड़ के लिए टीमें रवाना कर दी हैं।