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अखिलेश का नया दांव: अमर सिंह स्टाइल में कॉर्पोरेट एंट्री? योगी ने घेरा

क्या 2027 चुनाव फंड के लिए अखिलेश ने बदला PDA फॉर्मूला? योगी के 'पराया धन अपना' वार और सपा की राज्यसभा उम्मीदवारी पर 'जनपथ' में वरिष्ठ पत्रकारों का विश्लेषण।


Janpath: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बिसात पूरी तरह बिछ चुकी है। समाजवादी पार्टी द्वारा राज्यसभा सीट पर उद्योगपति की उम्मीदवारी तय किए जाने के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गाजियाबाद के मंच से अखिलेश यादव के चर्चित नारे 'पीडीए' पर तीखा हमला बोलते हुए इसे 'पराया धन अपना' और 'परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी' करार दिया है। योगी आदित्यनाथ ने सवाल उठाया कि जब राज्यसभा भेजने की बारी आई, तो पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) का फॉर्मूला कहां गायब हो गया?


'द फ़ेडरल देश' के खास राजनीतिक कार्यक्रम 'जनपथ' में एंकर अभिषेक रावत ने वरिष्ठ पत्रकारों के साथ इस बात का विश्लेषण किया कि क्या 10 साल से सत्ता से बाहर सपा के लिए यह कदम चुनावी फंड जुटाने की मजबूरी है, और क्या इसका असर सपा के कोर वोट बैंक पर पड़ेगा।

1. 10 साल का सूखा और फंड की मजबूरी: नवीन निगम का विश्लेषण
वरिष्ठ पत्रकार नवीन निगम ने चर्चा में कहा कि राज्यसभा के लिए उद्योगपति को टिकट देना सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी की वित्तीय आवश्यकताओं से जुड़ा हुआ है:

सत्ता से दूरी और खाली खजाना: सपा पिछले 10 सालों से राज्य और केंद्र दोनों जगह सत्ता से बाहर है। यूपी जैसे विशाल राज्य में 403 सीटों पर विधानसभा चुनाव लड़ना भारी वित्तीय संसाधन मांगता है। सहयोगी दल कांग्रेस की आर्थिक स्थिति भी बहुत मजबूत नहीं है।

सेठों का भरोसा और हवा का रुख: निगम के अनुसार, यदि माहौल पूरी तरह किसी पार्टी के पक्ष में हो, तो उद्योगपति खुद निवेश करते हैं। लेकिन आज भी प्रदेश में योगी सरकार की मजबूत पकड़ की चर्चा है। ऐसे में चुनाव लड़ने के लिए भारी-भरकम फंड की गारंटी के एवज में ही यह उम्मीदवारी संभव हुई होगी।

दो सीटों का गणित: सपा के खाते में आई दो सीटों में से एक पर प्रो. रामगोपाल यादव को भेजा गया, जो पार्टी के 'सर्वेसर्वा' हैं, जबकि दूसरी सीट से वित्तीय प्रबंधन साधा गया।

2. परिवारवाद के आरोप और पुरानी सपा की वापसी?
योगी आदित्यनाथ द्वारा पीडीए को 'परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी' कहे जाने पर चर्चा करते हुए नवीन निगम ने स्पष्ट किया:

'फैमिली फर्स्ट' की खुली राजनीति: सपा में नेताजी मुलायम सिंह यादव के दौर से ही परिवार को प्राथमिकता देने की बात कभी छिपाई नहीं गई। सैफई, इटावा और कुनबा हमेशा पार्टी के केंद्र में रहे हैं।

अमर सिंह युग की याद: एंकर अभिषेक रावत ने रेखांकित किया कि जिस तरह सपा के पुराने दौर में अमर सिंह फिल्मी हस्तियों और कॉर्पोरेट दिग्गजों को राज्यसभा भेजते थे, आज फिर उसी ढर्रे पर लौटने के आरोप लग रहे हैं।

3. क्या मुस्लिम-यादव और PDA वोटर छिटकेगा?
सीएम योगी के इस बयान पर कि सपा ने किसी पिछड़े, दलित या मुस्लिम को मौका क्यों नहीं दिया, दोनों विश्लेषकों ने ज़मीनी हकीकत रखी:

बीजेपी को हराना एकमात्र प्राथमिकता: नवीन निगम ने दावा किया कि यूपी का मुस्लिम मतदाता इन तकनीकी या कॉर्पोरेट फैसलों से कतई विचलित नहीं होता। उसका एकमात्र और अंतिम लक्ष्य भाजपा को हराने में सक्षम विकल्प को चुनना है, और वर्तमान में वह विकल्प सपा ही है।

अल्पसंख्यक वर्ग की समझ: वोटर जानता है कि पार्टी को चलाने और संगठन खड़ा करने के लिए आर्थिक संसाधनों की दरकार होती है।

4. कॉर्पोरेट संबंध और राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा: सैयद गुलाम हुसैन
वरिष्ठ पत्रकार सैयद गुलाम हुसैन ने कहा कि राजनीतिक दलों का उद्योगपतियों से गठजोड़ कोई नई बात नहीं है:

सभी दलों की कार्यशैली: चाहे भाजपा हो, कांग्रेस हो या सपा—सभी दल एमएलसी और राज्यसभा के रास्ते बड़े पूंजीपतियों को जोड़ते हैं। उद्योगपति न केवल चुनाव में आर्थिक मदद और संसाधन देते हैं, बल्कि सत्ता के गलियारों की रणनीतिक जानकारियां भी उपलब्ध कराते हैं।

माता प्रसाद पांडेय का उदाहरण: गुलाम हुसैन ने कहा कि राजनीति में रणनीति सर्वोपरि होती है। जैसे मुस्लिम और यादव वोट बैंक के बावजूद सपा ने विधानसभा में संतुलन साधने के लिए माता प्रसाद पांडेय को नेता प्रतिपक्ष बनाया, उसी तरह राज्यसभा में कॉर्पोरेट तालमेल और पार्टी के दूरगामी हितों को देखकर फैसला लिया गया है। सपा अब राज्य के साथ-साथ केंद्र की सियासत में भी अपनी मजबूत दावेदारी देख रही है।


2027 के महासमर से पहले राज्यसभा की यह उम्मीदवारी भाजपा को अखिलेश यादव के पीडीए फॉर्मूले पर चोट करने का खुला मौका दे रही है। हालांकि सपा इसे वित्तीय और रणनीतिक आवश्यकता मानकर आगे बढ़ रही है, लेकिन आगामी महीनों में भाजपा कानून-व्यवस्था, परिवारवाद और कॉर्पोरेट साठगांठ के पुराने मुद्दों को हवा देकर सपा को बैकफुट पर धकेलने की पूरी कोशिश करेगी।


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