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छात्रों के उबलते गुस्से के बीच मायावती और विपक्ष पर उठे सवाल!

सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं के बीच क्या विपक्षी दल और नेता केवल राजनीतिक नफे-नुकसान की तलाश में हैं? 'जनपथ' में हुई खास चर्चा।


Janpath: देशभर में परीक्षाओं के पेपर लीक होने और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली के खिलाफ छात्रों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश और बिहार तक युवा और छात्र न्याय की मांग को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे हैं। इस गंभीर राष्ट्रीय मुद्दे और इसके राजनीतिक नफे-नुकसान पर 'द फ़ेडरल देश' के खास कार्यक्रम 'जनपथ' में एंकर मनीष कुमार ने एक विस्तृत परिचर्चा की।


इस चर्चा में समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता धर्मेन्द्र कुमार सिंह और वरिष्ठ पत्रकार मनमोहन अग्रवाल बतौर मेहमान शामिल हुए, जिन्होंने इस पूरे घटनाक्रम और विपक्षी दलों की भूमिका पर खुलकर अपनी बात रखी।

सड़कों पर युवा, पर राजनीति के गलियारों में खामोशी क्यों?
चर्चा की शुरुआत करते हुए एंकर मनीष कुमार ने उत्तर प्रदेश और देश की मौजूदा सियासी हलचल पर बड़ा सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि जब छात्र और नौजवान अपनी पढ़ाई, करियर और भविष्य को बचाने के लिए सड़कों पर लाठियाँ खा रहे हैं, तब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती जैसी बड़ी नेता इस संवेदनशील मुद्दे पर खुलकर सामने क्यों नहीं आ रही हैं?

उनका यह भी कहना था कि जहाँ एक तरफ कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेता सड़कों से लेकर संसद तक आवाज बुलंद कर रहे हैं, वहीं मायावती के बयानों का रुख अक्सर विपक्ष (विशेषकर अखिलेश यादव और राहुल गांधी) की तरफ ही क्यों होता है?

धर्मेन्द्र कुमार सिंह (सपा प्रवक्ता) का पक्ष
चर्चा में समाजवादी पार्टी का पक्ष रखते हुए धर्मेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी पहले दिन से पूरी दृढ़ता के साथ छात्रों के साथ खड़ी है।

छात्रों के हक की लड़ाई: उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी एक राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि देश के भविष्य और मिडिल-लोअर क्लास के उन बच्चों की है जिनके माता-पिता अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा उनकी पढ़ाई पर लगाते हैं।

सरकार पर हमला: उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पूरी तरह संवेदनहीन हो चुकी है। परीक्षाओं की सुचिता बनाए रखने में नाकाम रहने वाली सत्ता व्यवस्था आज उन युवाओं पर दमन चक्र चला रही है जो केवल अपना हक और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली मांग रहे हैं।

विपक्षी एकता और मायावती के रुख पर: सपा प्रवक्ता ने यह भी कहा कि आज विपक्ष के तमाम दल और खुद उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव युवाओं के साथ कंधे से कंधا मिलाकर खड़े हैं, जबकि जनता सब देख रही है कि कौन किस वक्त किसके साथ खड़ा है।

मनमोहन अग्रवाल (वरिष्ठ पत्रकार) का विश्लेषण
वरिष्ठ पत्रकार मनमोहन अग्रवाल ने राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों का बारीकी से विश्लेषण करते हुए कहा:

दलित और बहुजन राजनीति का बदलता स्वरूप:
उन्होंने बताया कि बहुजन समाज पार्टी का मुख्य वोट बैंक और वैचारिक आधार हमेशा से सामाजिक न्याय और कांशीराम-बाबा साहब के सपनों से जुड़ा रहा है। लेकिन मौजूदा समय में मायावती का रुख अक्सर मुख्य विपक्षी दलों को घेरने वाला अधिक दिखता है, जिससे उनके अपने कैडर और समर्थकों के बीच भी असमंजस की स्थिति बन सकती है।

युवाओं का बदलता मिजाज: आज का युवा जाति और धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर अपने रोजगार और भविष्य के लिए सड़क पर उतर रहा है। ऐसे में जो दल या नेता इस युवा आक्रोश को जमीन पर उतरकर दिशा नहीं देंगे, आने वाले चुनावों (जैसे आगामी यूपी विधानसभा चुनाव) में उन्हें जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है।

शो के अंत में यह निष्कर्ष निकला कि पेपर लीक और बेरोजगारी जैसी गंभीर समस्याएं अब केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले चुकी हैं। सत्ता पक्ष को जहाँ अपनी नीतियों और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए जवाबदेह ठहराया जा रहा है, वहीं विपक्षी दलों के लिए भी यह लिटमस टेस्ट है कि वे जनता और छात्रों के मुद्दों पर कितने मुखर होकर साथ खड़े होते हैं।


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