चंदा चोरी के बाद अयोध्या में नया सियासी दांव, हनुमानगढ़ी पर छिड़ी रार
अयोध्या में चढ़ावा घटने की खबरों के बीच यूपी की राजनीति में आया नया मोड़, सपा प्रवक्ता मोहम्मद आज़म ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दावों को बताया झूठ।
Janpath: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही राजनीतिक दलों के बीच बयानों के तीर चलने तेज हो गए हैं। हाल ही में राम मंदिर के चढ़ावे में हुई कथित चोरी के मामले के बाद अब राज्य की राजनीति पूरी तरह ध्रुवीकरण और तुष्टीकरण के आरोपों के इर्द-गिर्द सिमटती दिख रही है। इसी गरमाए हुए मुद्दे पर 'द फ़ेडरल देश' के लोकप्रिय टॉक-शो 'जनपथ' में एंकर मनीष कुमार ने समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता मोहम्मद आज़म और वरिष्ठ पत्रकार नितिन श्रीवास्तव के साथ एक विशेष और विश्लेषनात्मक चर्चा की, जिसमें यूपी के मौजूदा सियासी हालात और भविष्य के चुनावी समीकरणों पर खुलकर बात की गई।
मुख्यमंत्री के हनुमानगढ़ी वाले बयान पर मचा घमासान
चर्चा का मुख्य केंद्र बिंदु मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का वह बयान रहा, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि अतीत में अयोध्या के प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर की सीढ़ियों पर नमाज़ अदा करवाई जा रही थी। इस पर पलटवार करते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे "पराजय काल विपरीत बुद्धि" करार दिया था। शो में इस पर बात करते हुए सपा प्रवक्ता मोहम्मद आज़म ने कहा कि भाजपा सरकार और उसके नेता समाजवादी पार्टी के 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की बढ़ती जागरूकता से बुरी तरह घबरा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुख्य मुद्दे से जनता का ध्यान भटकाने के लिए मुख्यमंत्री इस तरह के अनर्गल और धार्मिक रूप से संवेदनशील बयान दे रहे हैं।
1990 का कारसेवक गोलीकांड और आज की जवाबदेही
चर्चा के दौरान भाजपा द्वारा बार-बार 1990 के कारसेवक गोलीकांड की याद दिलाए जाने और सपा को 'राम विरोधी' बताने के नैरेटिव पर भी गंभीर विश्लेषण हुआ। सपा प्रवक्ता ने तर्क दिया कि 1990 में जो कुछ भी हुआ, वह तत्कालीन सरकार द्वारा कानून व्यवस्था और संविधान की रक्षा के लिए उठाया गया एक आवश्यक कदम था। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा खुद संविधान को नहीं मानती, जिसका गवाह इतिहास है। आज़म ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की जनता अब विकास, किसानों की आय और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर ध्यान दे रही है और वह इस तरह की नफ़रती राजनीति के बहकावे में नहीं आएगी।
चढ़ावा चोरी के दाग को छिपाने के लिए हिंदुत्व कार्ड का सहारा
वरिष्ठ पत्रकार नितिन श्रीवास्तव ने शो में राजनीतिक समीकरणों को समझाते हुए कहा कि राम मंदिर के भीतर हुई लूट की खबरों ने आम भक्तों की आस्था को गहरी ठेस पहुँचाई है और यह मामला भाजपा के गले की फांस बन चुका है। श्रीवास्तव ने विश्लेषण किया कि आने वाले 6 महीनों में उत्तर प्रदेश पूरी तरह चुनावी मोड में आ जाएगा। 2024 के लोकसभा चुनाव में अयोध्या जैसी महत्वपूर्ण सीट हारने के बाद भाजपा को अच्छी तरह अहसास है कि यूपी की जातीय राजनीति के सामने वे केवल धर्म और ध्रुवीकरण के सॉफ्ट हिंदुत्व कार्ड के सहारे ही 2027 की चुनावी वैतरणी पार कर सकते हैं।
पूर्व पुलिस अधिकारियों की विरोधाभासी बयानबाजी
शो में एंकर मनीष कुमार ने उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी और भाजपा सांसद बृजलाल के दावों का भी जिक्र किया, जिसका एक अन्य पूर्व आईपीएस अधिकारी बीएन राय ने पूरी तरह खंडन किया है। इस पर टिप्पणी करते हुए पत्रकार नितिन श्रीवास्तव ने कहा कि चुनावी लाभ के लिए पूर्व अधिकारियों द्वारा ऐसे विवादित बयान देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर बतौर पुलिस अधिकारी उनके कार्यकाल में ऐसा कुछ हो रहा था, तो उन्होंने उस समय कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की? इस विश्लेषनात्मक चर्चा से यह साफ हो गया कि आगामी चुनावों में विकास के दावों से कहीं ज्यादा धार्मिक ध्रुवीकरण उत्तर प्रदेश की राजनीति का मुख्य पिच रहने वाला है।
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