यूपी चुनाव 2027: क्या ओवैसी का 200 सीटों वाला प्लान बिगाड़ेगा सपा का खेल?
'जनपथ' में तीखी बहस: हैदर बोले- 'मुसलमान दरी बिछाने के लिए नहीं', सपा नेता आजम का पलटवार- वोटों का बिखराव भाजपा को फायदा पहुंचाएगा; 2027 की जंग हुई दिलचस्प।
Janpath: उत्तर प्रदेश में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर सूबे का सियासी पारा अभी से चढ़ने लगा है। लोकसभा चुनावों के नतीजों के बाद जहां एक तरफ समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस का 'इंडिया गठबंधन' उत्साहित है, वहीं दूसरी तरफ असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने राज्य की 200 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान करके विपक्ष के खेमे में खलबली मचा दी है।
'द फेडरल देश' के चर्चित शो 'जनपथ' में एंकर ललित राय ने इस मुद्दे पर एक विशेष राजनीतिक बहस की मेजबानी की. शो में AIMIM के प्रखर नेता हैदर और समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आजम मेहमान के तौर पर शामिल हुए। दोनों नेताओं के बीच मुस्लिम वोटों के एकाधिकार, 'वोट कटवा' के नैरेटिव और आगामी चुनावों के समीकरणों पर खुलकर तीखी बहस हुई।
AIMIM का दावा: "हम दरी बिछाने के लिए नहीं, सत्ता में हिस्सेदारी के लिए लड़ेंगे"
एंकर ललित राय के सवालों का जवाब देते हुए AIMIM के नेता हैदर ने पार्टी का रुख साफ किया कि उनकी पार्टी 2027 के चुनाव में पूरी ताकत के साथ 200 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। जब ललित राय ने सवाल किया कि पिछले चुनावों में खाता न खोल पाने वाली पार्टी इस बार क्या खेल बदलेगी? तो हैदर ने पलटवार करते हुए कहा:
"हमारी पार्टी 1927 से अस्तित्व में है। चुनावी हार-जीत अलग बात है, लेकिन पिछले 5 वर्षों में हमारे कार्यकर्ताओं ने जमीन पर संगठन को मजबूत किया है। सपा या बसपा भी उत्तर प्रदेश के बाहर चुनाव लड़ती हैं और वहां सीटें नहीं जीत पातीं, तो क्या वे चुनाव लड़ना छोड़ देती हैं?"
हैदर ने सपा पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी दल मुसलमानों का 22% वोट तो चाहते हैं, लेकिन उन्हें नेतृत्व या बड़ी हिस्सेदारी देने से कतराते हैं। उन्होंने हाल ही में कमाल अख्तर को समाजवादी पार्टी में 'चीफ व्हिप' (मुख्य सचेतक) के पद से हटाए जाने का उदाहरण देते हुए कहा कि मुसलमानों को सिर्फ चुनाव तक इस्तेमाल किया जाता है और बाद में साइडलाइन कर दिया जाता है।
समाजवादी पार्टी का पलटवार: "सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए वोटों का बिखराव आत्मघाती"
सपा के नेता आजम ने AIMIM के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की धर्मनिरपेक्ष (सेक्युलर) जनता अब जागरूक हो चुकी है। कमाल अख्तर के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि राजनीतिक व्यवस्था में कोई भी पद स्थायी नहीं होता और पार्टी अपनी रणनीतियों के हिसाब से बदलाव करती है।
आजम ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनावों में जनता ने भाजपा को 240 सीटों पर रोककर संविधान बदलने की उनकी कोशिशों को नाकाम कर दिया है। उन्होंने ओवैसी की पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा:
"गठन हवा-हवाई रैलियों से नहीं, बल्कि बैक-चैनल बातचीत और साझा न्यूनतम कार्यक्रम से बनते हैं। यदि मुस्लिम मतों का बिखराव होता है, तो इसका सीधा फायदा भाजपा जैसी गैर-सेक्युलर ताकतों को मिलेगा। उत्तर प्रदेश में बुलडोजर और एनकाउंटर राज को खत्म करने के लिए धर्मनिरपेक्ष ताकतों का एकजुट होना जरूरी है। AIMIM को वोट देना अपना वोट खराब करने जैसा होगा."
'वोट कटवा' और 'बी-टीम' के आरोपों पर तीखी तकरार
ललित राय के शो 'जनपथ' में दोनों नेताओं के बीच 'बी-टीम' के नैरेटिव को लेकर जमकर आरोप-प्रत्यारोप हुए:
AIMIM का आरोप: हैदर ने दावा किया कि इंडिया गठबंधन असल में 'आरएसएस के इशारे' पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार और अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं को गठबंधन में जगह दी गई, जिनका भाजपा के साथ पुराना ट्रैक रिकॉर्ड रहा है, लेकिन AIMIM को जानबूझकर दूर रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के 70% पूर्व नेता आज भाजपा में शामिल होकर सरकार चला रहे हैं।
सपा का जवाब: आजम ने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी ने आधिकारिक तौर पर कभी AIMIM को भाजपा की 'बी-टीम' नहीं कहा है। यह नैरेटिव भाजपा और मीडिया द्वारा सेट किया गया है क्योंकि AIMIM की चुनावी सक्रियता से सेक्युलर वोटों का नुकसान होता है, जिससे परोक्ष रूप से भाजपा को ही फायदा पहुंचता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सपा 10 साल से यूपी की सत्ता में नहीं है, तब भी ओवैसी केवल अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव पर ही हमला क्यों बोलते हैं?
'तीसरा मोर्चा' और चंद्रशेखर आज़ाद फैक्टर
ललित राय ने जब शो में पूछा कि यदि इंडिया गठबंधन उन्हें साथ नहीं लेता, तो उनके पास क्या विकल्प हैं? इस पर AIMIM नेता हैदर ने एक बड़े राजनीतिक संकेत की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी चंद्रशेखर आज़ाद (आज़ाद समाज पार्टी), स्वामी प्रसाद मौर्य, ओम प्रकाश राजभर और यहां तक कि मायावती (बसपा) के लिए भी विकल्प खुले रख रही है।
हालांकि, सपा नेता आजम ने इस 'तीसरे मोर्चे' या 'पीडीएम' (पिछड़ा, दलित, मुस्लिम) के फॉर्मूले को खारिज करते हुए कहा कि 2024 के चुनाव में भी ऐसा ही एक मोर्चा बनाने की कोशिश हुई थी, जिसे उत्तर प्रदेश की जनता ने पूरी तरह नकार दिया। जनता जानती है कि भाजपा के खिलाफ जमीन पर असली लड़ाई कौन लड़ रहा है।
2027 की राह नहीं होगी आसान
'जनपथ' की इस विशेष चर्चा से साफ है कि 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय होने जा रहा है। यदि ओवैसी की पार्टी वाकई 200 सीटों पर मजबूती से लड़ती है और 5 से 10 हजार सेक्युलर वोटों का भी ट्रांसफर अपनी तरफ करा लेती है, तो विधानसभा चुनावों में छोटे मार्जिन वाली सीटों पर सपा-कांग्रेस गठबंधन के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। अब देखना यह होगा कि ललित राय के शो में उठी इन आवाजों के बाद क्या भविष्य में कोई बीच का रास्ता निकलता है या विपक्ष के इस बिखराव का फायदा एक बार फिर सत्तारूढ़ दल को मिलेगा।
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