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जनपथ: यूपी राज्यसभा चुनाव का गणित, क्या होगी क्रॉस वोटिंग?

यूपी की 10 राज्यसभा सीटों पर घमासान। अखिलेश यादव ने धनराज नाथवानी को उतारा मैदान में। जानिए 'जनपथ' शो में सीटों का गणित, क्रॉस वोटिंग और 2027 की इनसाइड स्टोरी।


Janpath: उत्तर प्रदेश में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। मीडिया संस्थान ‘द फेडरल देश’ के खास कार्यक्रम ‘जनपथ’ में एंकर मनीष कुमार ने उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव और समाजवादी पार्टी द्वारा खेले गए अप्रत्याशित दांव पर वरिष्ठ पत्रकारों के साथ विस्तृत चर्चा की। इस परिचर्चा में लखनऊ से वरिष्ठ पत्रकार मनमोहन अग्रवाल और लंदन से वरिष्ठ पत्रकार रज़ा रिज़वी बतौर राजनीतिक विश्लेषक शामिल हुए।


अखिलेश यादव का ‘सरप्राइज’ दांव और धनराज नाथवानी की उम्मीदवारी
चर्चा की शुरुआत करते हुए एंकर मनीष कुमार ने बताया कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने अचानक धनराज नाथवानी को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर सभी को चौंका दिया है। धनराज नाथवानी, झारखंड से राज्यसभा सांसद परिमल नाथवानी के बेटे हैं, जिन्हें रिलायंस इंडस्ट्रीज और अंबानी परिवार का बेहद करीबी माना जाता है।

कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकारों ने रेखांकित किया कि सपा के इस फैसले ने राज्य के सियासी गलियारों में बहस छेड़ दी है कि क्या उत्तर प्रदेश की राजनीति में अंबानी परिवार या बड़े कॉरपोरेट की सीधी एंट्री हो चुकी है। पहले जहां प्रो. रामगोपाल यादव के साथ-साथ सलीम शेरवानी जैसे नेताओं के नामों पर कयास लगाए जा रहे थे, वहीं किसी औद्योगिक पृष्ठभूमि से जुड़े व्यक्ति को आगे लाना पूरी तरह अप्रत्याशित रहा। हालांकि, सपा का कॉरपोरेट जगत से पुराना नाता रहा है; पार्टी के इतिहास में अनिल अंबानी, ललित सूरी और संजय सेठ जैसे नाम भी राज्यसभा जा चुके हैं।

सीटों का अंकगणित और तीसरे उम्मीदवार का पेंच
राज्यसभा चुनाव के संख्याबल पर विश्लेषण करते हुए बताया गया कि समाजवादी पार्टी के पास अपने दो उम्मीदवारों (प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज नाथवानी) को जिताने के लिए पर्याप्त वोट मौजूद हैं। पेंच तीसरे उम्मीदवार को लेकर फंसा हुआ है:

सपा के पास प्रथम वरीयता के आवश्यक मतों के बाद लगभग 27 अतिरिक्त वोट बचते हैं, जबकि तीसरे उम्मीदवार की जीत के लिए करीब 10 और वोटों की दरकार होगी।

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) यदि 8 उम्मीदवार उतारती है, तो उसके पास भी अपने सभी प्रत्याशियों को जिताने के लिए 4-5 विधायकों की कमी पड़ सकती है।

यदि सपा तीसरा उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारती है, तो चुनाव निर्विरोध हो सकता है। लेकिन यदि दोनों खेमों से अतिरिक्त उम्मीदवार आते हैं, तो क्रॉस वोटिंग और विधायकों की जोड़-तोड़ (हॉर्स ट्रेडिंग) की प्रबल संभावना बनेगी।

2022 विधानसभा चुनावों के समीकरणों का हवाला देते हुए बताया गया कि सपा गठबंधन के तहत चुनाव लड़े आरएलडी और सुभासपा (ओमप्रकाश राजभर) के कई ऐसे विधायक हैं, जो मूलतः सपा पृष्ठभूमि से आते हैं। ऐसे में क्रॉस वोटिंग की स्थिति में आंकड़े किसी भी ओर झुक सकते हैं।

कॉरपोरेट संबंध, पीडीए का नारा और 2027 का रोडमैप
चर्चा के दौरान इस बात पर भी मंथन हुआ कि अखिलेश यादव जो लगातार 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) और कार्यकर्ताओं की बात करते हैं, उनका एक बड़े उद्योगपति परिवार के सदस्य को टिकट देना पार्टी कार्यकर्ताओं में क्या संदेश देगा।

विश्लेषकों का मानना था कि उद्योगपतियों की किसी एक दल के प्रति स्थायी निष्ठा नहीं होती; उनका रुख व्यावहारिक और व्यापारिक होता है। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए अखिलेश यादव यह संदेश देना चाहते हैं कि प्रदेश के विकास और आगामी चुनावी रणनीति के लिए कॉरपोरेट जगत का सहयोग भी जरूरी है। चर्चा में यह भी जिक्र आया कि सोशल मीडिया पर अखिलेश यादव, मुकेश अंबानी और धनराज नाथवानी के पुराने वीडियो व तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं, जिससे इस फैसले को सीधे तौर पर सपा के बड़े आर्थिक व राजनीतिक तालमेल के रूप में देखा जा रहा है।

इसके अलावा चर्चा में भाजपा खेमे की संभावित सूची, बृजभूषण शरण सिंह को लेकर उड़ी सियासी अफवाहों और वर्तमान मंत्री राकेश सचान के हालिया घटनाक्रम पर भी विचार साझा किए गए। परिचर्चा का सार यही रहा कि सपा के इस एक फैसले ने राज्यसभा चुनाव के मुकाबले को बेहद रोचक और कांटे की टक्कर में तब्दील कर दिया है।


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