बंगाल की राजनीति में उबाल: BJP का असंतोष और ममता की 'करो या मरो' जंग
'जनपथ' शो का विश्लेषण: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद टीएमसी में टूट का खतरा, पुलिस का राजनीतिकरण और अन्नपूर्णा योजना पर यू-टर्न से बढ़ता असंतोष।
Janpath: 'द फ़ेडरल देश' के कार्यक्रम 'जनपथ' में एंकर मनीष कुमार और कोलकाता से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार समीर पुरकायस्थ ने पश्चिम बंगाल की वर्तमान राजनीतिक उथल-पुथल, सत्ता परिवर्तन के बाद की कटुता और राज्य में गहराते सियासी संकट पर विस्तृत चर्चा की। इस चर्चा में पश्चिम बंगाल की राजनीति के हर उस पहलू को छुआ गया, जो इस वक्त राज्य में उफान पर है।
यहाँ इस चर्चा पर आधारित एक विस्तृत खबर दी गई है:
सत्ता परिवर्तन के बाद की कटुता और टीएमसी (TMC) में टूट का खतरा
बंगाल में नई सरकार (बीजेपी) के गठन के बाद से ही राजनीतिक कटुता चरम पर है। चर्चा में यह बात सामने आई कि राज्य में सत्ता का हस्तांतरण सहज नहीं रहा।
अस्वीकार्यता का भाव: टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने चुनाव हारने के बाद भी कथित तौर पर नतीजों को सहजता से स्वीकार नहीं किया और मुख्यमंत्री पद से जो एक औपचारिक इस्तीफा (Customary Resignation) दिया जाता है, वह नहीं दिया गया। इससे दोनों दलों के बीच शुरुआत से ही कड़वाहट पैदा हो गई।
टीएमसी को तोड़ने की कोशिश: आरोप है कि बीजेपी सीधे तौर पर नहीं, लेकिन पर्दे के पीछे से टीएमसी में सेंधमारी कर रही है। टीएमसी के सांसदों (28 में से 20) और विधायकों का एक बड़ा बागी गुट अलग होकर खुद को 'असली टीएमसी' बता रहा है, जिसे कथित तौर पर बीजेपी का समर्थन प्राप्त है।
टीएमसीपी (TMCP) स्थापना दिवस विवाद और ममता पर FIR
हाल ही में तृणमूल कांग्रेस छात्र परिषद (TMCP) के स्थापना दिवस को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जिसके परिणामस्वरूप कोलकाता पुलिस ने एफआईआर (FIR) दर्ज की है।
अदालत की शर्तें: राज्य सरकार ने मेयो रोड पर कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी थी। बाद में कोर्ट ने कैथेड्रल रोड पर कार्यक्रम करने की अनुमति दी, लेकिन कुछ सख्त शर्तों के साथ भीड़ 1500 से अधिक नहीं होगी, कार्यक्रम दोपहर 3 बजे तक खत्म होगा और सड़क का एक हिस्सा ट्रैफिक के लिए खुला रहेगा।
शर्तों का उल्लंघन: कार्यक्रम वाले दिन भारी भीड़ उमड़ी, जिससे दोनों तरफ की सड़कें जाम हो गईं और ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई। इसी अदालत की अवमानना और शर्तों के उल्लंघन को लेकर कोलकाता पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है।
ममता का पलटवार: इस एफआईआर पर ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर जनता आ जाए तो वह क्या कर सकती हैं? उन्होंने स्पष्ट किया कि वह जनता पर "बुलडोजर" नहीं चला सकतीं।
बीजेपी का 'हनीमून पीरियड' खत्म: जनता और नेताओं में असंतोष
बीजेपी सरकार के 3-4 महीने पूरे होने के बाद अब उसका 'हनीमून पीरियड' खत्म होता दिख रहा है। जनता के बीच सरकार को लेकर निराशा बढ़ने लगी है:
अन्नपूर्णा योजना पर यू-टर्न: बीजेपी ने चुनाव से पहले वादा किया था कि सत्ता में आने पर 'अन्नपूर्णा योजना' के तहत सभी महिलाओं को 1500 से 3000 रुपये दिए जाएंगे। लेकिन सरकार बनने के बाद इसमें 'आर्थिक मानदंड' (Economic Criteria) लागू कर दिए गए। इससे आधे से अधिक महिलाएं इस लाभ से वंचित हो गई हैं, जिससे महिलाओं में भारी आक्रोश और प्रदर्शन देखने को मिल रहा है।
'कट मनी' और 'गुटबाजी' का जारी रहना: बीजेपी ने टीएमसी राज के 'जंगलराज' और भ्रष्टाचार को खत्म करने का वादा किया था। लेकिन, अब बीजेपी में भी वही 'कट मनी' कल्चर और गुटबाजी हावी हो रही है। दुर्गा पूजा कमेटियों पर कब्जे को लेकर भी पार्टी के अंदरूनी गुटों में झड़पें हो रही हैं।
महंगाई और विस्थापन: चीनी, प्याज और सब्जियों के बढ़ते दाम तथा रेलवे स्टेशनों के आसपास से हॉकर्स (फेरीवालों) को हटाए जाने से गरीब तबके में सरकार के खिलाफ भारी नाराजगी है।
पुलिस का राजनीतिकरण: एक पुरानी परंपरा
बंगाल में पुलिस के राजनीतिकरण का मुद्दा हमेशा से हावी रहा है, जो वामपंथियों के शासन से शुरू होकर टीएमसी और अब बीजेपी के शासन में भी जारी है।
ममता का आरोप: ममता बनर्जी ने वर्तमान प्रशासन पर निशाना साधते हुए पुलिस के चेहरे को "राक्षसी" करार दिया है, जबकि पहले इसे मानवीय कहा जाता था। अभिषेक बनर्जी के दफ्तर में पुलिस का जाना और डेरेक ओ'ब्रायन के साथ बदसलूकी के आरोप इसी राजनीतिकरण का हिस्सा माने जा रहे हैं।
दोहरा मापदंड: बीजेपी शासन में भी पुलिस का विपक्ष के खिलाफ इस्तेमाल हो रहा है। वहीं दूसरी ओर, शुभेंदु अधिकारी के 'रक्षा बंधन' कार्यक्रम को पुलिस द्वारा बैरिकेडिंग लगाकर रोकने जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं, जो दोहरे मापदंड को दर्शाती हैं।
ममता बनर्जी के लिए 'अस्तित्व की लड़ाई' (Existential Fight)
टीएमसी के लिए वर्तमान स्थिति 'करो या मरो' वाली बन गई है।
संगठनात्मक कमजोरी: टीएमसी का संगठन इस वक्त काफी कमजोर और बिखरा हुआ नजर आ रहा है। पंचायत और नगर पालिका स्तर से पार्टी सदस्यों के इस्तीफे हो रहे हैं।
ममता की रणनीति: अपने खिसकते जनाधार (खासकर गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों में) को वापस पाने के लिए ममता बनर्जी ने जिला दौरों और अन्य राज्यों के दौरों का ऐलान किया है। उन्होंने बीजेपी को चुनौती देते हुए कहा है कि वह देखना चाहती हैं कि "बीजेपी के पास कितने अंडे और ईंटें हैं।"
निष्कर्ष:
पश्चिम बंगाल में आगामी नवंबर-दिसंबर में होने वाले निकाय चुनावों (Civic Body Elections) से पहले राजनीतिक माहौल बेहद गर्म हो चुका है। एक तरफ बीजेपी अपने वादों से पलटती और गुटबाजी का शिकार होती दिख रही है, तो दूसरी तरफ ममता बनर्जी अपनी पार्टी को टूटने से बचाने और अपना खोया हुआ जनाधार वापस पाने की जद्दोजहद में लगी हुई हैं।
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