हठ, विन्यास या यिन? उम्र और जरूरत के हिसाब से चुनें अपना योग
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हठ, विन्यास या यिन? उम्र और जरूरत के हिसाब से चुनें अपना योग

योग हर व्यक्ति के लिए अलग होता है। विशेषज्ञों के अनुसार उम्र, शरीर और स्वभाव के अनुरूप योग शैली चुनने से ही अधिकतम लाभ मिलता है।


12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को मनाया जाएगा। इसके पहले ही कॉलोनियों, पार्कों और फिटनेस सेंटरों में मुफ्त योग कक्षाओं, ट्रायल सत्रों और विशेष कार्यशालाओं की भरमार दिखाई देने लगी है। व्हाट्सऐप पर योग संबंधी सलाहों और मुफ्त क्लासों के निमंत्रणों की बाढ़ आई हुई है, जबकि सोशल मीडिया पर लोग कठिन योग मुद्राओं में अपनी तस्वीरें साझा कर रहे हैं।

योग की इस बढ़ती लोकप्रियता के बीच विशेषज्ञ एक महत्वपूर्ण चेतावनी भी दे रहे हैं—योग हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं होता। यदि आप अपने शरीर, उम्र या जरूरत के अनुसार सही योग शैली नहीं चुनते, तो लाभ की जगह चोट, मांसपेशियों में खिंचाव या नींद की समस्याएं भी हो सकती हैं।

योग चुनते समय उम्र, शरीर और स्वभाव का रखें ध्यान

चेन्नई की पूर्व योग शिक्षिका और साधक बेला कोठारी के अनुसार, योग अभ्यास पूरी तरह व्यक्ति विशेष के अनुरूप होना चाहिए। इसमें उम्र, शरीर की बनावट और स्वास्थ्य संबंधी लक्ष्यों को ध्यान में रखना जरूरी है।उन्होंने कहा कि अनुभवी योग शिक्षक पहले व्यक्ति की शारीरिक क्षमता, लचीलापन और गतिशीलता का आकलन करते हैं और उसी के अनुसार अभ्यास सुझाते हैं। कोई भी अच्छा प्रशिक्षक किसी व्यक्ति को उसकी क्षमता से अधिक अभ्यास करने के लिए मजबूर नहीं करता।

कोच्चि स्थित ‘समर्थ योग दर्शन’ की संचालिका सोनल जोशी का मानना है कि योग चुनते समय व्यक्ति के स्वभाव को भी समझना जरूरी है।उनके अनुसार, जिन लोगों का स्वभाव शांत, सुस्त या कम सक्रिय होता है, उन्हें धीरे-धीरे किए जाने वाले सौम्य योग अभ्यास अधिक लाभ पहुंचाते हैं। वहीं अत्यधिक ऊर्जावान और सक्रिय व्यक्तित्व वाले लोग चुनौतीपूर्ण योग अभ्यासों से बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।

योग का व्यक्तिगत दृष्टिकोण

चेन्नई के प्रतिष्ठित कृष्णमाचार्य योग मंदिर (केवाईएम) में योग का दृष्टिकोण पूरी तरह व्यक्तिगत है।संस्थान की प्रकाशन एवं संचार निदेशक श्रीलेखा वी के अनुसार, यहां किसी एक निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जाता। प्रत्येक व्यक्ति की जीवनशैली, खानपान, स्वास्थ्य इतिहास और जीवन की गुणवत्ता को समझने के बाद ही योग अभ्यास तय किए जाते हैं।

केवाईएम का 50 वर्षों से अधिक पुराना योग चिकित्सा केंद्र मांसपेशियों और हड्डियों की समस्याओं से लेकर एसिडिटी जैसी बीमारियों के लिए भी चिकित्सीय योग प्रदान करता है।

गलत योग से चोट का खतरा

केवाईएम के वरिष्ठ योग चिकित्सक एस. श्रीधरन का कहना है कि हर व्यक्ति शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से अलग होता है। इसलिए आसन, प्राणायाम और ध्यान जैसे योग के मूल उपकरण समान होने के बावजूद, उनका संयोजन प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग होना चाहिए।उन्होंने चेतावनी दी कि गलत तरीके से योग करने पर चोट लगने का जोखिम बना रहता है। इसलिए योग को व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार अपनाना अधिक सुरक्षित और प्रभावी होता है।

योग की प्रमुख शैलियां

1. हठ योग (Hatha Yoga)

हठ योग धीमी गति से किए जाने वाले आसनों और नियंत्रित श्वास पर आधारित होता है। यह शुरुआती लोगों के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। ‘ह’ का अर्थ सूर्य और ‘ठ’ का अर्थ चंद्रमा होता है। हठ योग का उद्देश्य शरीर के भीतर इन दोनों ऊर्जाओं का संतुलन स्थापित करना है। यह तनाव कम करने और मन-शरीर के सामंजस्य को बढ़ाने में मदद करता है।

2. विन्यास योग (Vinyasa Yoga)

विन्यास योग में कई आसनों को एक सतत प्रवाह के रूप में किया जाता है। इसमें सांस और शरीर की गतिविधियां एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं।यह योग मांसपेशियों को मजबूत बनाने, जोड़ों की गतिशीलता बढ़ाने और शरीर के लचीलेपन में सुधार करने के लिए उपयुक्त है।

3. शिवानंद योग (Sivananda Yoga)

यह शैली स्वामी शिवानंद सरस्वती की शिक्षाओं पर आधारित है। इसमें 12 प्रमुख आसनों, प्राणायाम और मंत्रोच्चार का विशेष महत्व होता है।यह शरीर की संरचना को संतुलित करने, मांसपेशियों को मजबूत बनाने और तंत्रिका तंत्र को बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है।

4. चिकित्सीय योग (Therapeutic Yoga)

यह योग विशेष स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखकर कराया जाता है। इसमें श्वास और शरीर की गतिविधियों का सटीक समन्वय होता है।इस शैली में व्यक्ति की क्षमता के अनुसार श्वास और गतिविधियों की गति निर्धारित की जाती है, जिससे शरीर और मन दोनों को लाभ मिलता है।

5. अयंगर योग (Iyengar Yoga)

अयंगर योग में ब्लॉक, बेल्ट और कंबल जैसे सहायक उपकरणों का उपयोग किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य शरीर की संरचनात्मक और शारीरिक संरेखण (Alignment) को बेहतर बनाना होता है।यह उन लोगों के लिए उपयोगी है जो कम लचीले हैं, अधिक वजन वाले हैं या अतिरिक्त सहारे की जरूरत महसूस करते हैं।

6. यिन या रिस्टोरेटिव योग (Yin/Restorative Yoga)

इस शैली में कुछ विशेष मुद्राओं को 3 से 10 मिनट तक बनाए रखा जाता है। इससे शरीर के गहरे संयोजी ऊतकों (Connective Tissues) को धीरे-धीरे खिंचाव मिलता है।यह योग तनाव कम करने, शरीर की लचक बढ़ाने और मानसिक शांति प्राप्त करने में मदद करता है।

अलग-अलग उम्र के लिए योग

बच्चे और किशोर

बच्चों और किशोरों के लिए खेल-आधारित विन्यास योग या सक्रिय हठ योग सबसे बेहतर माना जाता है। यह उनकी ऊर्जा को सही दिशा देता है, शरीर की मुद्रा सुधारता है और पढ़ाई के तनाव को कम करने में मदद करता है।

महिलाएं

मासिक धर्म, गर्भावस्था और प्रसव के बाद महिलाओं की शारीरिक जरूरतें बदलती रहती हैं। ऐसे में उन्हें विशेष रूप से अनुकूलित योग अभ्यासों की आवश्यकता होती है।मासिक धर्म या गर्भावस्था के दौरान रिस्टोरेटिव और प्रीनेटल योग लाभदायक हो सकते हैं, जबकि सामान्य समय में विन्यास या अयंगर योग हड्डियों और कोर मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है।

तनावग्रस्त पुरुष और महिलाएं

लंबे समय तक डेस्क पर काम करने वाले लोगों में मानसिक थकान, गर्दन और कंधों में जकड़न तथा अनिद्रा जैसी समस्याएं आम होती हैं।ऐसे लोगों के लिए रिस्टोरेटिव यिन योग और प्राणायाम का संयोजन सबसे प्रभावी माना जाता है। यह तनाव हार्मोन कोर्टिसोल को कम करता है और शरीर को गहरी राहत प्रदान करता है।

वरिष्ठ नागरिक

इस वर्ष योग दिवस का विषय स्वस्थ वृद्धावस्था (Healthy Ageing) है। ऐसे में बुजुर्गों के लिए चेयर योग और हल्के योग अभ्यास उपयुक्त माने जाते हैं।ये अभ्यास संतुलन, जोड़ों की गतिशीलता और शरीर की स्थिरता को बेहतर बनाते हैं तथा गिरने के जोखिम को कम करते हैं।

आखिर कौन-सा योग सबसे बेहतर है?

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी व्यक्ति के लिए सबसे उपयुक्त योग शैली का चुनाव पूरी तरह व्यक्तिगत होता है। इसके लिए अक्सर प्रयोग और अनुभव की आवश्यकता होती है।एस. श्रीधरन के अनुसार, योग एक अनुभव है। जो शैली आपको बिना चोट पहुंचाए सबसे अधिक शारीरिक और मानसिक लाभ दे, वही आपके लिए आदर्श योग है।

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