
चंपत राय का इस्तीफा मंजूर! आगे क्या.......
अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी विवाद में चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार। वीएचपी के बजरंग बागरा बन सकते हैं नए महासचिव।
Ram Mandir Donation Row: अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे और चंदे में हुई करोड़ों रुपये की हेराफेरी के मामले में एक बहुत बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक गाज गिरी है। सूत्रों का दावा है कि बैठक में 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' ने अपने महासचिव चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। चंपत राय ने मंदिर के चंदे में हुई भारी हेराफेरी और विवाद के बाद अपने पद से कदम पीछे खींच लिए थे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस महा-विवाद के बाद अब ट्रस्ट के भीतर एक बड़े प्रशासनिक ओवरहॉल (कायाकल्प) की तैयारी शुरू हो चुकी है। लेकिन इन सबके बीच जो बड़ा सवाल बना हुआ है वो ये कि अब आगे क्या होगा? क्या चंपत राय पर क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी या बस इस्तीफे से ही दान में हुई गड़बड़ी पर लीपापोती हो जाएगी।
कौन हैं बजरंग बागरा और क्यों हैं पहली पसंद?
चंपत राय के उत्तराधिकारी के रूप में देखे जा रहे बजरंग बागरा के पास मजबूत प्रशासनिक और वित्तीय अनुभव है:
पेशेवर पृष्ठभूमि: बजरंग बागरा पेशे से एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और वे सार्वजनिक क्षेत्र की बड़ी कंपनी नालको के पूर्व प्रमुख भी रह चुके हैं। वर्तमान में वे विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय महासचिव हैं।
ट्रस्ट का प्रोफेशनलाइजेशन: सूत्रों का दावा है कि राम मंदिर निर्माण और प्रबंधन के इस अगले चरण में ट्रस्ट एक ऐसे चेहरे को लाना चाहता है जिसके पास गवर्नेंस, फाइनेंस और संस्थागत प्रशासन की गहरी समझ हो, ताकि ट्रस्ट के कामकाज को पूरी तरह पेशेवर बनाया जा सके और भविष्य में ऐसी वित्तीय गड़बड़ी न हो।
अंतिम फैसला कब?: हालांकि, नए महासचिव के नाम का आधिकारिक एलान तुरंत नहीं किया जाएगा। 19-20 जुलाई को दिल्ली में होने वाली वीएचपी (VHP) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इस पर अंतिम मुहर लग सकती है। बताया जा रहा है कि चंपत राय फिलहाल एक ट्रस्टी के रूप में बने रहेंगे।
सीएम योगी के कड़े रुख के बाद गिरे इस्तीफे, 7.5 करोड़ गायब!
इस हाई-प्रोफाइल चोरी का खुलासा तब हुआ जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले पर बेहद कड़ा रुख अपनाया और विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी।
SIT रिपोर्ट का बड़ा खुलासा: रिपोर्ट में सामने आया है कि सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगे होने के बावजूद, नकद चंदे की गिनती के प्रभारी बनाए गए मंदिर के कर्मचारियों ने ही सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाकर पैसे चुराए। ऐसा इसलिए मुमकिन हुआ क्योंकि सीसीटीवी फुटेज की नियमित रूप से कोई मॉनिटरिंग या चेकिंग नहीं की जा रही थी।
7.5 करोड़ रुपये गायब: शुरुआती अनुमानों और रिपोर्टों के मुताबिक, मंदिर के खजाने से लगभग 7 से 7.5 करोड़ रुपये गायब हैं।
चंपत राय के ड्राइवर 'टिन्नू यादव' ने किया विश्वासघात
इस मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसमें सबसे चौंकाने वाला नाम चंपत राय के निजी ड्राइवर राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का है।
सूत्रों के अनुसार, चंपत राय ने अपने करीबी करीबियों को बताया है कि इस पूरी चंदा चोरी का मुख्य सूत्रधार उनका ड्राइवर टिन्नू यादव ही है। राय ने कहा, "टिन्नू यादव ने मेरे भरोसे का नाजायज फायदा उठाकर इस बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम दिया।" बताया जा रहा है कि जब टिन्नू को अपनी गिरफ्तारी का डर सताने लगा, तो उसने बचने के लिए इस मामले से जुड़ी कुछ संवेदनशील जानकारियां एक समाजवादी पार्टी के नेता को लीक कर दीं, जिसके बाद इस मुद्दे पर भारी राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया।
पुलिस के शिकंजे में आए अन्य आरोपी:
टिन्नू यादव के अलावा पुलिस अब तक अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। इस मामले में ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने भी अपना इस्तीफा सौंप दिया है।
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