सपा की रथ यात्रा: क्या भाजपा के बुने जाल में फंस रहे हैं अखिलेश यादव?
द फेडरल देश' के निष्पक्ष शो में अयोध्या, काशी और मथुरा से अखिलेश की 'पीडीए रथ यात्रा' पर छिड़ा सियासी घमासान; सपा ने 'सॉफ्ट हिंदुत्व' पर दिया जवाब।
Nishpaksh: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की सियासी तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी ने अपने चुनावी तेवरों में एक बड़ा और चौंकाने वाला रणनीतिक बदलाव किया है। डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'द फेडरल देश' के चर्चित टॉक शो निष्पक्ष में वरिष्ठ एंकर नीलू व्यास ने इस नए घटनाक्रम पर देश के जाने-माने राजनीतिक विश्लेषकों और पार्टी प्रवक्ताओं के साथ गहन चर्चा की।
शो में मुख्य सवाल यह उठा कि क्या मुसलमानों और यादवों के समीकरण से आगे बढ़कर अब अखिलेश यादव भाजपा के ही पारंपरिक कोर हिंदू वोट बैंक और धार्मिक केंद्रों अयोध्या, काशी और मथुरा में सेंध लगाने की तैयारी कर रहे हैं?
1. भाजपा के गढ़ में 'पीडीए रथ यात्रा' का शंखनाद
एंकर नीलू व्यास ने चर्चा की शुरुआत करते हुए बताया कि समाजवादी पार्टी बहुत जल्द अयोध्या, मथुरा और वाराणसी (काशी) से एक भव्य 'पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रथ यात्रा' की शुरुआत करने जा रही है। यह यात्रा उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों से होकर गुजरेगी।
शो में यह सवाल उठाया गया कि भाजपा के इन सबसे संवेदनशील और मजबूत धार्मिक केंद्रों से यात्रा शुरू करना क्या सपा का कोई बड़ा रणनीतिक बदलाव है, या फिर यह भाजपा को उसी के घर में घेरने की सोची-समझी चाल है?
2. 'सॉफ्ट हिंदुत्व' बनाम 'पीडीए': शब्दों का हेरफेर या हकीकत?
लखनऊ से जुड़ीं वरिष्ठ पत्रकार और मशहूर लेखिका सुनीता एरॉन ने इस मुद्दे पर बहुत ही बारीक और पुराना विश्लेषण पेश किया। सुनीता एरॉन ने कहा:
"यह केवल शब्दों का हेरफेर है। रथ शब्द का इस्तेमाल होते ही लोग इसे चेरियट (Chariot) या धार्मिक यात्रा मान लेते हैं। हकीकत यह है कि अखिलेश यादव ने अपनी चुनावी रैलियों के लिए एक 'मर्सिडीज बेंज 10-व्हीलर बस' को विशेष रूप से मॉडिफाई कराया है, जिसे वे 'पीडीए रथ' कह रहे हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि मुलायम सिंह यादव के जमाने की पॉलिटिक्स अलग थी, जहां भाजपा उन पर 'मुस्लिम तुष्टीकरण' का आरोप लगाती थी। लेकिन अखिलेश यादव ने आने के बाद से लैपटॉप, इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास की राजनीति की है। हालांकि, आज के राजनीतिक माहौल में 'सॉफ्ट हिंदुत्व' (जैसे नवरात्रि की पूजा की तस्वीरें साझा करना या शंकराचार्य से मिलना) सपा के लिए भी जरूरी हो गया है, क्योंकि पीडीए (पिछड़ा-दलित) वर्ग के लोग भी पूरी तरह से धार्मिक हैं और वे भी मंदिरों में जाते हैं।
3. "हमारा मंदिर या आस्था राजनीतिक मुद्दा नहीं" सपा प्रवक्ता सर्वेश त्रिपाठी
सपा प्रवक्ता सर्वेश त्रिपाठी ने पार्टी का पक्ष मजबूती से रखते हुए 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की थ्योरी को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि आस्था और धर्म हर शिक्षित व्यक्ति का पूरी तरह से व्यक्तिगत मामला (Personal Issue) होता है।
सर्वेश त्रिपाठी ने भाजपा और गोदी मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा:
"हमारी जीत केवल चुनावों में नहीं होती, बल्कि हमारे 'पीडीए' विज़न की जीत इस बात से साबित होती है कि आज भाजपा हमारे डर से अपने संगठन और संसद में पिछड़ों और दलितों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर मजबूर हो गई है।"
उन्होंने एनसीआरबी (NCRB) के आंकड़ों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में पिछड़ों, दलितों (SC-ST) और बच्चों पर अपराध के मामले में राज्य नंबर वन पर है। उन्होंने कहा कि काशी में मणिकर्णिका घाट पर मूर्तियों को तोड़कर हमारी विरासत से खिलवाड़ किया गया और अयोध्या में दलितों-गरीबों की जमीनों का भारी वित्तीय घोटाला (2 करोड़ की जमीन 55 करोड़ में बेचना) सामने आया है। हमारी यह यात्रा इन्हीं मुद्दों पर जनता के बीच 'जनजागरण' फैलाने के लिए है।
4. क्या सपा फंस रही है भाजपा के बुने जाल में?
एंकर नीलू व्यास ने सुनीता एरॉन से सवाल किया कि पूर्व में जब कांग्रेस और राहुल गांधी ने रुद्राक्ष पहनकर या मंदिरों में जाकर 'सॉफ्ट हिंदुत्व' का रास्ता अपनाया था, तब भाजपा ने उन्हें अपने जाल (Trap) में फंसा लिया था। क्या अखिलेश यादव भी उसी जाल की तरफ बढ़ रहे हैं?
इस पर सुनीता एरॉन ने सहमति जताते हुए कहा कि पीडीए (PDA) निश्चित रूप से भाजपा के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है, जिसके डैमेज कंट्रोल के लिए भाजपा ने यूपी की राजनीति में रामविलास पासवान के नारे 'पासी, पासवान, पंडित' का कार्ड भी खेलना शुरू कर दिया है। लेकिन सपा को बहुत संभलकर चलना होगा ताकि वे मुसलमानों और अल्पसंख्यकों के हक (Equity) की बात करते-करते भाजपा के सांप्रदायिक एजेंडे के जाल में न उलझ जाएं।
संवाद ही असली कसौटी
चर्चा के अंत में सर्वेश त्रिपाठी ने ऋषि शांडिल्य के वंशज होने का हवाला देते हुए सनातन इतिहास के महान वैज्ञानिकों (आर्यभट्ट, धनवंतरी, सुश्रुत) को याद किया और कहा कि आज के धर्माचार्य शिक्षा और नीट (NEET) जैसे गंभीर मुद्दों पर खामोश हैं। सपा की यह यात्रा जनता से केवल संवाद स्थापित करने और उनकी आवाज़ बनने का एक जरिया है।
एंकर नीलू व्यास ने शो का समापन करते हुए कहा कि आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा सपा के इस 'पीडीए रथ' के मुकाबले उत्तर प्रदेश में क्या नई रणनीति लेकर सामने आती है।
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