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राहुल के नीट से केजरीवाल का E-20 मुद्दा बड़ा क्यों? आप कांग्रेस आमने सामने

'द फ़ेडरल देश' के शो 'निष्पक्ष' में E-20 पेट्रोल पर कांग्रेस और AAP के बीच तीखी झड़प। कांग्रेस ने केजरीवाल पर लगाया अमित शाह को बचाने का आरोप, AAP ने दिया जवाब।


Nishpaksh: केंद्र सरकार की 20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) नीति को लेकर देश की राजनीति में एक नया उबाल आ गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस नीति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, लेकिन इस मुद्दे ने विपक्ष (INDIA गठबंधन) के भीतर ही एक नई बहस को जन्म दे दिया है।


'द फ़ेडरल देश' के खास कार्यक्रम 'निष्पक्ष' में एंकर नीलू व्यास ने इसी गर्माए हुए राजनीतिक माहौल पर एक विस्तृत और तीखी चर्चा की। इस चर्चा में कांग्रेस के प्रवक्ता प्रबल प्रताप शाही और सामाजिक-राजनीतिक विश्लेषक व 'आप' समर्थक अकील खान शामिल हुए। शो के दौरान कांग्रेस और 'आप' समर्थक के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसने विपक्षी एकता पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आम आदमी पार्टी का E20 के खिलाफ हल्लाबोल और ट्रम्प का एंगल
शो की शुरुआत में एंकर नीलू व्यास ने बताया कि कैसे अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी ने प्रधानमंत्री आवास (7 लोक कल्याण मार्ग) के घेराव की कोशिश की। दिल्ली पुलिस द्वारा फिरोज शाह रोड पर रोके जाने के बाद, 'आप' नेताओं ने सड़क पर ही धरना दिया।

इस दौरान आम आदमी पार्टी ने कुछ प्रमुख दावे और मांगें रखीं:

2 लाख हस्ताक्षर: पार्टी का दावा है कि उन्होंने इस नीति के खिलाफ एक ऑनलाइन अभियान चलाकर 2 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर जुटाए हैं।

पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव: पंजाब की भगवंत मान सरकार ने E20 पेट्रोल नीति को वापस लेने के लिए विधानसभा में एक प्रस्ताव भी पारित किया है।

डोनाल्ड ट्रम्प का दबाव: अरविंद केजरीवाल ने सीधा आरोप लगाया कि पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारी दबाव में आकर यह फैसला लिया है। अमेरिका में एथेनॉल का सबसे ज्यादा उत्पादन होता है, और वहां के 'वेस्ट' (कचरे) को भारतीय नागरिकों पर थोपा जा रहा है।

केजरीवाल का बयान: 'नीट से बड़ा बने E20 का मुद्दा'
इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा चर्चा अरविंद केजरीवाल के उस बयान की हो रही है, जिसमें उन्होंने कहा कि "E20 के विरोध को NEET (नीट) छात्रों के आंदोलन से ज्यादा बड़ा बनाना चाहिए।" एंकर नीलू व्यास ने सवाल उठाया कि क्या राहुल गांधी द्वारा नीट और छात्र आंदोलन को सफलतापूर्वक 'ओन-अप' (अपना) कर लेने के बाद अरविंद केजरीवाल के भीतर कोई असुरक्षा (Insecurity) की भावना आ गई है? क्या दोनों पार्टियों के बीच 'सबसे बड़ा आंदोलन' करने की कोई राजनीतिक होड़ चल रही है?

कांग्रेस का आक्रामक पलटवार: 'केजरीवाल RSS के मोहरे, शाह को बचाने आए'
इस सवाल पर कांग्रेस प्रवक्ता प्रबल प्रताप शाही ने आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल पर बेहद गंभीर और आक्रामक आरोप लगाए। शाही का गुस्सा इस कदर था कि वे शो के बीच में ही अपनी बात कहकर उठकर चले गए।

कांग्रेस प्रवक्ता के मुख्य आरोप:

'मोदी और शाह घिर चुके थे': शाही ने दावा किया कि नीट के मुद्दे और छात्रों के आंदोलन पर सरकार पूरी तरह घिर चुकी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को दिल्ली और बिहार (जहानाबाद) में छात्रों पर बर्बरता की गई, पैलेट गन और सेमी-ऑटोमैटिक राइफल (AK-47) का इस्तेमाल किया गया। इन घटनाओं के बाद गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफा लगभग तय हो रहा था।

'RSS के इशारे पर केजरीवाल का ड्रामा': कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि जब-जब मोदी सरकार कमजोर पड़ती है या फंसती है, तब-तब अरविंद केजरीवाल उन्हें बचाने आ जाते हैं। शाही ने केजरीवाल को 'RSS द्वारा स्पॉन्सर्ड' बताया और कहा कि यह E20 का ड्रामा आरएसएस के इशारे पर छात्रों के आंदोलन से ध्यान भटकाने के लिए रचा गया है।

'असली मुद्दा यूएस ट्रेड डील है': शाही ने कहा कि कांग्रेस 'यूएस ट्रेड डील' के खिलाफ लड़ रही है, जो किसानों को बर्बाद कर देगी, लेकिन 'आप' ध्यान भटका रही है।

विश्लेषक अकील खान का तर्क: '30 करोड़ गाड़ियों का सवाल, मोदी दें इस्तीफा'
कांग्रेस के इन तीखे हमलों का जवाब 'आप' समर्थक और राजनीतिक विश्लेषक अकील खान ने दिया। उन्होंने E20 के मुद्दे को आम आदमी की रोजी-रोटी और अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए कांग्रेस के 'ध्यान भटकाने' वाले आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

अकील खान के मुख्य तर्क:

'करोड़ों लोगों का मुद्दा है E20': अकील खान ने स्पष्ट किया कि नीट बेशक एक महत्वपूर्ण मुद्दा है जो लाखों छात्रों से जुड़ा है और वह चलता रहेगा। लेकिन E20 पेट्रोल का मुद्दा देश के 30 करोड़ वाहन मालिकों से जुड़ा है। यह गांव-गांव और शहर-शहर के गरीब और मध्यम वर्ग को प्रभावित कर रहा है क्योंकि इससे गाड़ियों के इंजन खराब हो रहे हैं।

'मोदी का सरेंडर': उन्होंने केजरीवाल के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका और 'डीप स्टेट' के आगे सरेंडर कर दिया है। यह नीति देश की पहले से ही खस्ताहाल अर्थव्यवस्था को पूरी तरह बर्बाद कर देगी।

बीजिंग का उदाहरण: अकील खान ने बीजिंग (चीन) का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 10 साल पहले ही पेट्रोल-डीजल के वाहनों को हटाकर इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) पर जोर दिया गया, जिससे प्रदूषण कम हुआ। जबकि भारत सरकार पुरानी गाड़ियों को कबाड़ कर रही है और नई गाड़ियां खरीदने के लिए अडानी-अंबानी जैसे उद्योगपतियों को फायदा पहुंचा रही है।

'कोई प्रतिस्पर्धा नहीं': उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इसमें कोई आपसी होड़ नहीं है। देश में कई ज्वलंत मुद्दे हैं और 'आप' E20 के मुद्दे को 'पैन-इंडिया' (संपूर्ण भारत) स्तर पर लेकर जाएगी।

विपक्ष की आपसी खींचतान
'निष्पक्ष' शो की इस गर्मागरम बहस ने यह साफ कर दिया है कि भले ही विपक्ष (INDIA गठबंधन) सड़क से लेकर संसद तक मोदी सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा हो, लेकिन 'मुद्दों के नेतृत्व' को लेकर उनके बीच गहरी राजनीतिक खींचतान जारी है।

एक तरफ कांग्रेस यह मान रही है कि छात्र आंदोलन और नीट के मुद्दे ने सरकार की जड़ें हिला दी हैं, तो वहीं आम आदमी पार्टी E20 पेट्रोल के मुद्दे को देश का सबसे बड़ा आर्थिक संकट बताकर अपना स्वतंत्र राजनीतिक कद और बड़ा करने की कोशिश में है। सवाल यह है कि क्या यह 'कम्पटीशन' विपक्ष को मजबूत करेगा, या फिर आपस में भिड़कर ये पार्टियां मोदी सरकार को एक बार फिर संकट से निकलने का सुरक्षित रास्ता दे देंगी?


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