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FBI का 'ऑपरेशन हार्ड बॉल': साबरमती जेल से अमेरिका तक बिश्नोई का जाल

FBI की बड़ी कार्रवाई में लॉरेंस बिश्नोई और 3 सिंडिकेट के 24 आरोपी गिरफ्तार, 1 टन कोकीन जब्त; पंजाब पुलिस के अधिकारी पर 4 लाख डॉलर की फिरौती मांगने का आरोप.


Nishpaksh: अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी (FBI) ने भारत के जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय दो अन्य क्रिमिनल सिंडिकेट्स के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और अभूतपूर्व कार्रवाई की है। 'ऑपरेशन हार्ड बॉल' नाम के इस बेहद गोपनीय और सुनियोजित मिशन के तहत अमेरिकी न्याय विभाग ने कनाडा और यूरोप सहित दुनिया भर के 50 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है। इस वैश्विक कार्रवाई ने न केवल अंतरराष्ट्रीय ड्रग और एक्सटॉर्शन रैकेट का भंडाफोड़ किया है, बल्कि भारत के जेल प्रशासन और क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम की खोखली हो चुकी दीवारों को भी बेनकाब कर दिया है।


द फ़ेडरल के विशेष शो 'निष्पक्ष' में इस विषय पर गहन चर्चा करते हुए वरिष्ठ खोजी पत्रकार राजेश आहूजा ने बताया कि यह वैश्विक नेटवर्क किस तरह भारत की अति-सुरक्षित समझी जाने वाली जेलों से संचालित हो रहा था और इसके भारत-अमेरिका संबंधों तथा आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों पर क्या दूरगामी राजनीतिक असर हो सकते हैं।

50 ठिकाने, 24 गिरफ्तारियां और करोड़ों की ड्रग्स बरामद
अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice) द्वारा जारी तीन अलग-अलग संघीय अभियोगों (Indictments) के अनुसार, यह कार्रवाई कई वर्षों की गहन और गोपनीय जांच के बाद की गई है। कुल 37 आरोपियों के खिलाफ नामजद मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 24 को कैलिफ़ोर्निया, इंडियाना, जॉर्जिया (अमेरिका), कनाडा और स्पेन से दबोचा जा चुका है, जबकि 10 मुख्य आरोपी अभी भी फरार हैं।

इस ऑपरेशन में अंतरराष्ट्रीय गिरोहों के तीन प्रमुख अंगों का उल्लेख किया गया है:

लॉरेंस बिश्नोई गैंग (जो साबरमती जेल के भीतर से संचालित हो रहा है)

जग्गू भगवानपुरिया गिरोह

रविंदर सिंह ढांडा का ड्रग नेटवर्क

इस संयुक्त वैश्विक कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसियों द्वारा बरामद की गई सामग्री की सूची इस प्रकार है:

कोकीन: लगभग 1,000 किलोग्राम (1 टन)

हेरोइन: 1 किलोग्राम

अवैध आधुनिक हथियार: 12

जब्त नकदी: 40,000 अमेरिकी डॉलर

साबरमती जेल में बंद लॉरेंस और 'VoIP' का मायाजाल: क्या सो रही हैं भारतीय एजेंसियां?
इस पूरी थ्योरी में सबसे चौंकाने वाला और चिंताजनक पहलू यह है कि लॉरेंस बिश्नोई गुजरात की साबरमती जेल की अति-सुरक्षित सेल में बंद होने के बावजूद निर्बाध रूप से अपना साम्राज्य चला रहा था। FBI के मुताबिक, बिश्नोई जेल के अंदर से ही सैटेलाइट फोन और वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (VoIP) के जरिए विदेशों में बैठे अपने गुर्गों और सिंडिकेट्स से लगातार संपर्क में था।

वरिष्ठ पत्रकार राजेश आहूजा ने भारत के जेल सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा:

"हमारी जेलों में एक निश्चित कीमत देकर हर सुविधा मुहैया हो जाती है। जब कोई मामूली अपराधी पहली बार जेल जाता है, तो जेल प्रशासन की मिलीभगत और वहां सक्रिय गैंग्स के प्रोटेक्शन रैकेट के कारण वह एक हार्डन्ड क्रिमिनल (शातिर अपराधी) बनकर निकलता है। दिल्ली की तिहाड़ जेल के भीतर टिल्लू ताजपुरिया की बेरहमी से की गई हत्या इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।"

आहूजा ने यह भी खुलासा किया कि भारतीय जेलें अब केवल आपराधिक साजिशों का ही नहीं, बल्कि रेडिकलाइजेशन (कट्टरपंथ) का भी केंद्र बन चुकी हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के पास ऐसे कई मामले हैं, जहां बेंगलुरु जेल में बंद केरल बम ब्लास्ट के एक दोषी ने जेल के भीतर ही नए लड़कों को रिक्रूट कर लिया था। भारत में जेल चूंकि 'राज्य का विषय' (State Subject) है, इसलिए देश भर की जेलों में स्टैंडर्डाइजेशन और 'आदर्श जेल मैनुअल' के पालन की भारी कमी है, जिसका सीधा फायदा ये अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट उठा रहे हैं।

पंजाब पुलिस के अधिकारी पर 4 लाख डॉलर की फिरौती का आरोप: प्रत्यर्पण की तैयारी
इस अंतरराष्ट्रीय इंडिकमेंट में एक और बेहद सनसनीखेज खुलासा पंजाब पुलिस के एक सेवारत अधिकारी को लेकर हुआ है। आरोप है कि होशियारपुर जिले के टांडा में तैनात एक पुलिस अधिकारी ने एक पीड़ित परिवार को मर्डर कमिट करने (हत्या के मामले) में फंसाने की धमकी देकर 4,00,000 अमेरिकी डॉलर (करीब 3.3 करोड़ रुपये) की रंगदारी (Extortion) मांगी थी।

अमेरिकी अभियोजकों (FBI Prosecutors) ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है और स्पष्ट किया है कि यदि आवश्यकता पड़ी, तो इस दागी पुलिस अधिकारी को भारत से अमेरिका एक्स्ट्राडाइट (प्रत्यर्पण) कराया जाएगा। फिलहाल, प्रारंभिक कार्रवाई के तौर पर उक्त अधिकारी को टांडा डिस्ट्रिक्ट से हटा दिया गया है। यह घटना दर्शाती है कि गैंगस्टर्स का नेटवर्क किस कदर भारतीय पुलिसिंग और प्रशासनिक व्यवस्था के भीतर तक पैठ बना चुका है।

कनाडा और अमेरिका के पंजाबी समुदाय में दहशत का माहौल
लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बरार और जग्गू भगवानपुरिया के सिंडिकेट्स ने अमेरिका (विशेषकर कैलिफ़ोर्निया के स्टॉकटन) और कनाडा में बसी बड़ी सिख और पंजाबी आबादी को अपना निशाना बनाया है। इससे पहले 90 के दशक में पंजाब के चरमपंथी वहां जाकर शरण लेते थे, लेकिन इस नई पीढ़ी के गैंगस्टर्स ने वहां बाकायदा ड्रग और एक्सटॉर्शन रैकेट स्थापित कर लिया है।

कबड्डी लीग और पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री में दखल
: अमेरिकी मीडिया (जैसे लॉस एंजिल्स टाइम्स) की रिपोर्ट्स के अनुसार, कैलिफ़ोर्निया में आयोजित होने वाली कबड्डी लीग के आयोजक हरसिमरन सिंह को लगातार धमकियां दी गईं, जिसके कारण खिलाड़ियों ने टूर्नामेंट से पैर पीछे खींच लिए। पंजाब में भी एक अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी की हत्या इसी सिंडिकेट ने की थी। सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद यह साफ हो चुका है कि विदेशों में होने वाले पंजाबी सिंगर्स के शोज़ और म्यूजिक इंडस्ट्री को ये गैंगस्टर्स पूरी तरह नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं।

लॉन्ग-हॉल ट्रक्स और युवाओं का शोषण: FBI और कैनेडियन पुलिस की जांच में सामने आया है कि कनाडा से अमेरिका के बीच ड्रग्स की तस्करी के लिए 'लॉन्ग-हॉल ट्रक्स' का इस्तेमाल किया जाता है। पंजाब से कनाडा जाने वाले जिन युवाओं को ड्राइविंग आती है, उन्हें इस ट्रकिंग बिजनेस में आसानी से फंसा लिया जाता है। इन युवाओं को इसलिए मजबूर किया जाता है क्योंकि इनके परिवार पीछे पंजाब में होते हैं, जिन्हें जान से मारने की धमकी देकर गैंगस्टर्स अपनी मर्जी से ड्रग्स की डिलीवरी करवाते हैं।

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1. भारत-US और भारत-कनाडा राजनयिक संबंध
नीलू व्यास के इस सवाल पर कि क्या इस खुलासे से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह या एनएसए अजीत डोभाल पर दबाव बढ़ेगा, राजेश आहूजा ने कहा कि इसके आसार बेहद कम हैं। जब तक यह साबित न हो जाए कि इन आपराधिक गतिविधियों में भारत सरकार की आधिकारिक शह थी, तब तक सरकार पर कोई सीधा दबाव नहीं आएगा।

कनाडा में सरकार बदलने और मार्क कार्नी के आने के बाद रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) ने अपना सुर बदलते हुए साफ किया है कि हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं थी, बल्कि इसी बिश्नोई गैंग का इस्तेमाल किया गया था। वहीं गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश के मामले में अमेरिकी जेल में बंद निखिल गुप्ता और पूर्व रॉ (R&AW) अधिकारी विकास यादव के खिलाफ दिल्ली पुलिस पहले ही मुकदमा दर्ज कर चुकी है, जिससे यह साफ होता है कि यह किसी भी तरह का 'ऑफिशियल सैंक्शन' (आधिकारिक अभियान) नहीं था।

2. पंजाब विधानसभा चुनाव पर असर
पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। पिछले पांच वर्षों से राज्य में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) और मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार के लिए यह इंडिकमेंट एक बड़ा सिरदर्द बनने जा रहा है। विपक्ष इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाएगा कि चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के छात्र संगठन के चुनावों से निकले ये अपराधी (लॉरेंस, गोल्डी, जग्गू) आज वैश्विक डॉन कैसे बन गए और राज्य सरकार युवाओं के अपराधीकरण और ड्रग्स की निर्बाध सप्लाई को रोकने में नाकाम क्यों रही।

3. मानसून सत्र में विपक्ष की रणनीति: 'दुधारी तलवार'
आगामी संसद के मानसून सत्र में देश की राजधानी दिल्ली में लगातार हो रही जबरन वसूली की घटनाओं और शोरूम्स पर सरेआम गोलीबारी के मुद्दों पर विपक्ष के पास सरकार को घेरने के लिए पर्याप्त मसाला है। हालांकि, आहूजा ने सचेत किया कि विपक्ष के लिए यह मुद्दा एक दुधारी तलवार की तरह है:

"अगर विपक्ष इस मुद्दे को हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जोड़कर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा, तो उसे राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। निज्जर एक घोषित देशद्रोही और आतंकवादी था। यदि भारत का कोई गैंगस्टर उसे विदेशी धरती पर मार देता है, तो देश के भीतर जनभावनाएं सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि सहानुभूति की तरफ झुक सकती हैं। इसलिए विपक्ष को जेलों की सुरक्षा और देश के भीतर कानून व्यवस्था की विफलता पर ही ध्यान केंद्रित करना होगा, अन्यथा वह अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार बैठेगा।"

'सावधानी हटी, दुर्घटना घटी'
'ऑपरेशन हार्ड बॉल' ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पंजाब और भारत के स्थानीय गैंग्स अब केवल 'लोकल गुंडे' नहीं रह गए हैं, बल्कि वे एक बहुराष्ट्रीय कॉरपोरेट की तरह 'ट्रांसनेशनल क्रिमिनल सिंडिकेट' में तब्दील हो चुके हैं। यदि भारतीय खुफिया एजेंसियों, राज्य सरकारों और जेल प्रशासन ने आपसी समन्वय के साथ तुरंत कड़े सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो पंजाब का भविष्य एक बार फिर उसी काले दौर की ओर बढ़ सकता है जिससे वह दशकों पहले उबर चुका है। पंजाब जैसे संवेदनशील सीमावर्ती राज्य पर यह मुहावरा अक्षरशः लागू होता है - सावधानी हटी, दुर्घटना घटी।


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