NEET-NET पेपर लीक: इस्तीफे पर अड़े छात्र, क्या झुकेगी सरकार?
नीट-नेट पेपर लीक पर सरकार और छात्र प्रतिनिधियों की बैठक के बाद भी गतिरोध बरकरार; कांग्रेस और छात्र संगठनों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे व पीएम की माफी की मांग दोहराई।
Nishpaksh: नीट (NEET) और यूजीसी-नेट (UGC-NET) परीक्षा धांधली को लेकर चल रहा राष्ट्रव्यापी आंदोलन अब एक नए मोड़ पर पहुँच गया है। राजधानी दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में सरकार और प्रदर्शनकारी छात्र संगठन 'कॉकरोच जनता पार्टी' के प्रतिनिधियों के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक बेनतीजा समाप्त हो गई है। छात्र प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा गैर-समझौतावादी है और जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
'द फ़ेडरल देश' के विशेष चर्चा कार्यक्रम निष्पक्ष में एंकर नीलू व्यास, कांग्रेस के प्रवक्ता प्रबल प्रताप शाही और वरिष्ठ पत्रकार टी.के. राजलक्ष्मी ने इस पूरे घटनाक्रम के राजनीतिक और प्रशासनिक पहुलुओं का बारीकी से विश्लेषण किया।
1. वार्ता और तीन प्रमुख शर्तें
चर्चा की शुरुआत करते हुए एंकर ने बताया कि कांस्टीट्यूशन क्लब में हुई बैठक के बाद छात्र नेता सौरभ दास और आशुतोष रंका ने मीडिया को संबोधित करते हुए अपनी तीन मुख्य मांगें दोहराईं:
शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पद से तुरंत हटना।
मुकदमों की वापसी व मुआवजा: प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर (FIR) रद्द की जाएं तथा परीक्षा धांधली के तनाव में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा दिया जाए।
पुलिस बर्बरता पर रोक: जंतर-मंतर और दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों पर हो रहे पुलिसिया बल प्रयोग को तुरंत रोका जाए।
सूत्रों के अनुसार, सरकार ने मुकदमों की वापसी और मुआवजा देने जैसे मुद्दों पर सहमति के संकेत दिए हैं, लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर निर्णय लेने के लिए शनिवार दोपहर तक का समय मांगा है। छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि इस्तीफा नहीं हुआ, तो देशव्यापी आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
2. राहुल गांधी और विपक्ष का आक्रामक रुख
संसद परिसर के बाहर मीडिया से बात करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी छात्रों की मांगों का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष तीन प्रमुख शर्तों पर अडिग है:
भ्रष्ट परीक्षा तंत्र और शिक्षा मंत्री की विदाई: शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना होगा।
जवाबदेही तय हो: छात्रों पर लाठीचार्ज करने और उन्हें प्रताड़ित करने वाले पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।
प्रधानमंत्री की माफी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के करोड़ों युवाओं और छात्रों से इस अव्यवस्था के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने संसद में छात्रों का पक्ष रखने की कोशिश की, तो उनका माइक बंद कर दिया गया और उन्हें बोलने का अवसर नहीं दिया गया।
3. कांग्रेस प्रवक्ता प्रबल प्रताप शाही का हमला
चर्चा में शामिल कांग्रेस प्रवक्ता प्रबल प्रताप शाही ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा:
दमनकारी नीतियां: बिहार के जहानाबाद में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई गोलीबारी और दिल्ली में अर्धसैनिक बलों (CRPF/ITBP) की तैनाती यह दर्शाती है कि सरकार संवाद के बजाय दमन का रास्ता चुन रही है।
प्रशासनिक नाकामी: केवल शिक्षा सचिव को बदलने से व्यवस्था नहीं सुधरेगी। जब तक पूरी प्रणाली की जवाबदेही तय नहीं होती और शीर्ष स्तर पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक छात्रों को न्याय नहीं मिल सकता।
माफी की मांग: उन्होंने कहा कि जिस तरह तीन कृषि कानूनों के विरोध में चले लंबे किसान आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री को माफी मांगनी पड़ी थी, उसी तरह देश के 21 युवाओं की आत्महत्या और करोड़ों के भविष्य से खिलवाड़ के लिए भी उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा।
4. वरिष्ठ पत्रकार टी.के. राजलक्ष्मी का राजनीतिक विश्लेषण
वरिष्ठ पत्रकार टी.के. राजलक्ष्मी ने सरकार की रणनीति और आंतरिक दबावों पर प्रकाश डाला:
पार्टी के भीतर और बाहर बढ़ता दबाव: उन्होंने बताया कि यह दबाव केवल विपक्ष या छात्रों का नहीं है, बल्कि भाजपा के भीतर से भी आवाजें उठ रही हैं। पूर्व शिक्षा मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए छात्रों के प्रति संवेदनशीलता और सहानुभूति बरतने की बात कही है।
समय टालने की नीति: सरकार द्वारा फास्ट-ट्रैक कोर्ट और सोमवार को संसद में एंटी-पेपर लीक बिल लाने के आश्वासनों को उन्होंने केवल समय बिताने की रणनीति बताया। उन्होंने कहा कि 16 मेट्रो स्टेशनों को बंद करना, कैनॉट प्लेस के बाजारों में दुकानों को बंद कराना और फेशियल रिकग्निशन वैन के जरिए छात्रों को डराना यह साबित करता है कि सरकार बैकफुट पर है।
विश्वविद्यालयों में भय का माहौल: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) और जेएनयू (JNU) जैसे संस्थानों में सर्कुलर जारी कर छात्रों को प्रदर्शन से दूर रहने की हिदायत दी जा रही है, जिससे छात्र आक्रोशित हैं और अब वे किसी भी कानूनी कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं।
परिचर्चा के अंत में यह निष्कर्ष सामने आया कि प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया संदेशों या फास्ट-ट्रैक कोर्ट के वादों से आंदोलित युवा संतुष्ट नहीं हैं। सरकार द्वारा मांगी गई शनिवार दोपहर की समयसीमा और सोमवार को संसद सत्र के दौरान एंटी-पेपर लीक बिल के पेश होने पर पूरे देश की निगाहें टिकी रहेंगी।
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