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छात्र आंदोलन: कनाट प्लेस में बाजार बंद करने की एडवाइजरी से बढ़ा तनाव

नीट और नेट पेपर लीक को लेकर छात्रों का प्रदर्शन तेज, पुलिस क्रैकडाउन की आशंका के बीच कनाट प्लेस और जंतर-मंतर पर सुरक्षा बढ़ाई गई।


Nishpaksh: नीट (NEET) और यूजीसी-नेट (UGC-NET) परीक्षाओं में हुई धांधली और पेपर लीक मामलों को लेकर देशभर में छात्रों का गुस्सा बढ़ता ही जा रहा है। दिल्ली के जंतर-मंतर और कनाट प्लेस इलाके में भारी विरोध प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।


इसी गंभीर मुद्दे पर 'द फ़ेडरल देश' के शो 'निष्पक्ष' में एंकर नीलू व्यास ने वरिष्ठ पत्रकार टीके राजलक्ष्मी और कांग्रेस प्रवक्ता सुजाता पॉल के साथ विस्तार से चर्चा की। शो में तीनों ने अपनी-अपनी बात रखी:

1. नीलू व्यास (एंकर) के सवाल और प्रमुख बिंदु
कनाट प्लेस बंद करने की एडवाइजरी: न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) ने कनाट प्लेस और जंतर-मंतर के आसपास की दुकानें, दफ्तर और रेस्तरां शाम 6:30 बजे तक बंद करने को कहा है। यह कदम NDMC के चेयरमैन व वाइस चेयरमैन से फोन पर हुई बात के बाद उठाया गया।

पुलिस कार्रवाई की आशंका: दुकानें बंद कराने के फैसले पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आशंका जताई कि क्या सरकार फिर से कोई बड़ा पुलिस क्रैकडाउन करने वाली है? इससे पहले भी प्रदर्शन स्थल पर आंसू गैस के गोले दागे गए थे, लाठीचार्ज हुआ था और इंटरनेट बंद किया गया था।

प्रधानमंत्री का बयान: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया संदेश का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि पीएम ने युवाओं के भविष्य को प्राथमिकता बताते हुए दोषियों को सख्त सजा देने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित करने की बात कही है।

सड़कों पर राजनीतिक भिड़ंत: पटना और कोल्हापुर जैसे शहरों में कांग्रेस और बीजेपी कार्यकर्ताओं के आमने-सामने आने की जानकारी दी गई। साथ ही, बीजेपी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा के घर/दफ्तर में मिलने के प्रस्ताव और छात्र संगठनों द्वारा किसी तटस्थ (न्यूट्रल) जगह पर मिलने की शर्त के कारण बने गतिरोध पर चिंता जताई।

2. सुजाता पॉल (कांग्रेस प्रवक्ता) का पक्ष
सरकार में डर और तानाशाही का आरोप: भारतीय जनता पार्टी इस वक्त पूरी तरह डरी हुई है। इतिहास गवाह है कि तानाशाह हमेशा कायर होते हैं और यही वजह है कि इस छात्र आंदोलन को जबरन कुचलने की कोशिश की जा रही है।

व्यवस्था से निराश छात्र और 'इलाज' प्लेकार्ड: देश का युवा व्यवस्था टूटने से हताश है। प्रदर्शन के दौरान छात्रों द्वारा लहराए गए 'इलाज' लिखे प्लेकार्ड का अर्थ समझाते हुए उन्होंने बताया:

इ - शिक्षा मंत्री का इस्तीफा

ला - लाठीचार्ज की जवाबदेही

ज - परीक्षा प्रणाली की जवाबदेही

छात्रों के मन से पुलिस का खौफ खत्म: एक छात्र के वीडियो का हवाला दिया गया, जिसमें उसने पुलिस के सामने कहा था— "मम्मा मैं आंदोलन में पहुँच गया हूँ और अभी जिंदा हूँ।" इससे साफ है कि युवाओं के मन से कार्रवाई का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है।

कांग्रेस बनाम बीजेपी का नैरेटिव खारिज: सत्ता पक्ष इसे सिर्फ दो राजनीतिक दलों की लड़ाई के रूप में पेश करना चाहता है, जबकि हकीकत यह है कि आम छात्र खुद सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं। प्रियंका गांधी ने भी सरकार को चुनौती दी है कि अगर हिम्मत है तो बाहर आकर सीधे जवाब दें।

3. टीके राजलक्ष्मी (वरिष्ठ पत्रकार) का विश्लेषण
एडवाइजरी पर संदेह: NDMC की तरफ से कोई आधिकारिक लिखित आदेश नहीं आया है। NDTA केवल मौखिक बातचीत के आधार पर व्यापारियों में डर का माहौल बना रही है। मंदी के दौर में कोई भी व्यापारी सीपी जैसे मुख्य बाजार को खुद बंद नहीं करना चाहेगा, जिससे साफ है कि उन पर प्रशासनिक दबाव है।

प्रशासन की विफलता: 20 मार्च के प्रदर्शन की जानकारी पहले से होने के बावजूद दिल्ली पुलिस ने न तो छात्रों को अनुमति दी और न ही कोई तय या वैकल्पिक रूट दिया। भीड़ इकट्ठा होने पर उसे संभालने के बजाय स्थिति को और बिगड़ने दिया गया, जो प्रशासन की अक्षमता को दर्शाता है।

फास्ट-ट्रैक कोर्ट पर प्रतिक्रिया: प्रधानमंत्री द्वारा फास्ट-ट्रैक कोर्ट के ऐलान को महज एक 'डैमेज कंट्रोल' करार दिया गया। परीक्षा प्रणाली में कमियों को दूर करना और तंत्र को ठीक करना सरकार की मूल जिम्मेदारी है, इसे अलग से प्रचारित करने की आवश्यकता नहीं थी।

आंदोलन का दायरा बढ़ा: यह मुद्दा अब सिर्फ नीट या शिक्षा तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसमें बेरोजगारी और शिक्षित युवाओं का गुस्सा भी शामिल हो गया है। जंतर-मंतर पर 24 घंटे के भीतर दोबारा मंच तैयार हो जाना यह साबित करता है कि छात्रों का मनोबल टूटा नहीं है।


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