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निष्पक्ष: क्या उपचुनाव के नतीजों ने खोल दी BJP के नए नेतृत्व की पोल?

द फ़ेडरल देश के शो 'निष्पक्ष' में नीलू व्यास के साथ देखिए बांकेपुर में प्रशांत किशोर की जीत, दतिया में कांग्रेस का कब्जा और पेपर लीक विवाद पर बीजेपी को लगे करारे झटके का विस्तृत विश्लेषण।


Nishpaksh: देश भर में नीट (NEET), एसएससी और विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में हुए पेपर लीक विवाद तथा बेरोजगार युवाओं और GenZ के व्यापक विरोध प्रदर्शनों के ठीक बाद आए तीन प्रमुख बीजेपी शासित राज्यों—बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात—की विधानसभा सीटों के उपचुनाव नतीजों ने केंद्र और राज्य की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी को गहरा झटका दिया है।


डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म 'द फ़ेडरल देश' के फ्लैगशिप शो 'निष्पक्ष' में सीनियर एंकर नीलू व्यास ने वरिष्ठ पत्रकारों फैजान अहमद (पटना), गौतम सरकार और टी.के. राजलक्ष्मी के साथ इस बात का गहन विश्लेषण किया कि कैसे बिहार के बांकेपुर में प्रशांत किशोर और मध्य प्रदेश के दतिया में कांग्रेस ने बीजेपी के 'अभेद्य किलों' को ध्वस्त कर दिया।

1. बांकेपुर में 30 साल बाद बीजेपी का साम्राज्य खत्म: प्रशांत किशोर की 19,000 वोटों से एतिहासिक जीत
बिहार की राजधानी पटना की बांकेपुर (पूर्व में पटना पश्चिम) विधानसभा सीट को पिछले तीन दशकों (1995 से) से बीजेपी का अभेद्य किला माना जाता था। यह सीट बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का गृह क्षेत्र रही है।

प्रशांत किशोर का बड़ा कारनामा: जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बांकेपुर सीट पर बीजेपी प्रत्याशी को करीब 19,000 वोटों के बड़े अंतर से हराकर इतिहास रच दिया। इस चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) उम्मीदवार तीसरे स्थान पर खिसक गया।

जाति और पार्टी का तिलस्म टूटा: पटना के इस एलिट और अपर कास्ट बहुल (कायस्थ, भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण) क्षेत्र में मतदाताओं ने इस बार न तो पार्टी का नाम देखा और न ही जातिगत बंधन। पटना के प्रबुद्ध मतदाताओं ने पढ़े-लिखे, मुखर और जनता के मुद्दों को विधानसभा में उठाने वाले चेहरे के रूप में प्रशांत किशोर और उनके चुनाव चिह्न (स्कूल बैग) पर भरोसा जताया।

ऐन मौके पर प्रत्याशी बदलने की गाज: बीजेपी ने चुनाव के बीच में अपना प्रत्याशी बदलकर एक अप्रसिद्ध चेहरा मैदान में उतारा। स्थानीय मतदाताओं को यह लगा कि पार्टी ने अपने कैडर पर एक ऐसा प्रत्याशी थोप दिया है जो जनता की समस्याओं को उठाने में असमर्थ है।

2. मध्य प्रदेश: दतिया में नरोत्तम मिश्रा के गढ़ पर कांग्रेस का कब्जा
मध्य प्रदेश की चर्चित दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार कुंवर घनश्याम सिंह ने बीजेपी के आशुतोष तिवारी को 6,000 से अधिक मतों से पराजित कर दिया।

नरोत्तम मिश्रा समर्थकों की बगावत: दतिया को पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का मजबूत गढ़ माना जाता था। 2023 के चुनाव में उनकी हार के बाद बीजेपी ने उनके विरोधी खेमे के नए चेहरे आशुतोष तिवारी को पहली बार मैदान में उतारा। इससे नरोत्तम मिश्रा के समर्थक बेहद नाराज थे, जिसका सीधा फायदा पूर्व रियासत परिवार से आने वाले और दो बार के पूर्व विधायक घनश्याम सिंह को मिला।

सत्ताधारी दल को बड़ा झटका: आमतौर पर उपचुनावों में राज्य की सत्ताधारी पार्टी का पलड़ा भारी रहता है, लेकिन मध्य प्रदेश और बिहार दोनों जगह सत्ताधारी बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा।

3. 'पेपर लीक', GenZ का आक्रोश और पुलिसिया दमन का 'बैकफ़ायर'
शो 'निष्पक्ष' में विश्लेषकों ने इस बात पर खास जोर दिया कि यह जनादेश सिर्फ स्थानीय मुद्दों का नहीं, बल्कि देश भर में युवाओं और छात्रों के बीच पनप रहे भारी गुस्से का परिणाम है।

युवाओं और बेरोजगारों की उपेक्षा: देश भर में पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में धांधली और उच्च शिक्षित युवाओं की बेरोजगारी (Educated Unemployment) ने GenZ मतदाताओं को बीजेपी के खिलाफ लामबंद किया।

छात्रों पर लाठीचार्ज का विरोध: दिल्ली से लेकर पटना तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए पुलिसिया दमन, लाठीचार्ज और पुलिस प्रशासन के सख्त रवैये ने युवाओं के मन में सत्ता के खिलाफ गहरा असंतोष पैदा किया। इस गुस्से का असर ईवीएम (EVM) में सीधे तौर पर बीजेपी के वोट शेयर में आई भारी गिरावट के रूप में दिखा।

4. बीजेपी का गिरता वोट शेयर और नई राजनीतिक दिशा
वोट शेयर आधा हुआ: बांकेपुर में बीजेपी का पारंपरिक वोट शेयर घटकर लगभग आधा रह गया। जहाँ जन सुराज को करीब 49-50% वोट हासिल हुए, वहीं बीजेपी और आरजेडी दोनों के पारंपरिक वोट बैंक का बड़ा हिस्सा कटकर प्रशांत किशोर के पक्ष में चला गया।

जनरेशनल शिफ्ट पर सवाल: 45 वर्षीय नितिन नवीन को बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर युवाओं को आकर्षित करने की जो रणनीति बनाई गई थी, बांकेपुर के इस झटके ने उस पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।


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