दतिया में मिश्रा के आंसू, बांकीपुर में पीके का खौफ; उपचुनाव में फंसी बीजेपी!
द फेडरल देश के शो 'निष्पक्ष' में नीलू व्यास के साथ बड़ा खुलासा; दतिया में नरोत्तम मिश्रा और बांकीपुर में नितिन नवीन के गढ़ में आंतरिक कलह ने बढ़ाई मुश्किलें।
Nishpaksh: मध्य प्रदेश का दतिया और बिहार का बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव इस समय देश की राजनीति के सबसे बड़े अखाड़े में तब्दील हो चुके हैं। आमतौर पर उपचुनावों की गूंज स्थानीय स्तर पर ही सिमट कर रह जाती है, लेकिन इन दोनों सीटों पर उभरे आंतरिक गतिरोध, नेताओं की बगावत और बदले समीकरणों ने इसे राष्ट्रीय सुर्खी बना दिया है। 'द फेडरल देश' के शो 'निष्पक्ष' में वरिष्ठ पत्रकार नीलू व्यास ने राजनीतिक विश्लेषकों पंकज मुकाती और फैज़ान अहमद के साथ इस बड़े सियासी फेरबदल का एक-एक पन्ना खंगाला और यह समझने की कोशिश की कि क्या इन दोनों वीआईपी (VIP) सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सामने हार का डर मंडरा रहा है।
दतिया: दादा नरोत्तम मिश्रा का कटा टिकट, क्या भितरघात डूबा देगी नैय्या?
मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में उस समय भूचाल आ गया, जब पार्टी हाईकमान ने 10 साल तक सूबे के कद्दावर गृहमंत्री रहे और 'दादा' के नाम से मशहूर नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर संघ (RSS) के करीबी आशुतोष तिवारी को चुनावी मैदान में उतार दिया। पिछले 2-3 महीनों से खुद को उम्मीदवार मानकर तैयारी कर रहे नरोत्तम मिश्रा इस फैसले से इस कदर टूट गए कि मंच से उतरते समय उनके आंसू सरेआम छलक पड़े। हालांकि, उन्होंने भरे मन से आशुतोष तिवारी के लिए घर-घर जाकर वोट की भीख मांगने का दावा किया है, लेकिन अंदरूनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।
पॉलिटिक्स एक्सपर्ट पंकज मुकाती ने 'निष्पक्ष' शो में चर्चा के दौरान इस बात का साफ खुलासा किया कि दतिया में बीजेपी की यह लड़ाई अब बेहद मुश्किल हो चुकी है। दरअसल, दतिया में नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ ज़मीनी स्तर पर भारी 'एंटी-इन्कंबेंसी' (जनता की नाराजगी) थी। इलाके में दलित और कुशवाहा समाज उनसे बेहद नाराज चल रहा था। ऐसे में केवल 15 हजार ब्राह्मण मतदाताओं के भरोसे बीजेपी इस सीट को जीतने की स्थिति में नहीं थी। भले ही नरोत्तम मिश्रा ने 2018 की कमलनाथ सरकार गिराने और ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट को बीजेपी में लाने में 'किंगमेकर' की भूमिका निभाई थी, लेकिन उनका खुद का ग्राउंड वर्क कमजोर हो चुका था। अब टिकट कटने के बाद दतिया जिला बीजेपी कमेटी ने बगावत कर दी है और मुख्यमंत्री के खिलाफ नारे लग रहे हैं। नरोत्तम मिश्रा के समर्थक आशुतोष तिवारी का खुलकर विरोध कर रहे हैं, जिसका सीधा फायदा कांग्रेस के प्रत्याशी घनश्याम सिंह को मिल सकता है।
बांकीपुर: इतिहास में पहली बार ऐसा खेला! प्रशांत किशोर के खौफ से भागा बीजेपी उम्मीदवार?
बिहार की बांकीपुर सीट पर तो राजनीतिक इतिहास का सबसे अनूठा और अभूतपूर्व घटनाक्रम देखने को मिला है। यह सीट पिछले 40 सालों से नितिन नवीन और उनके परिवार का अजेय किला रही है (पहले यह पटना पश्चिम और पटना सेंट्रल का हिस्सा थी)। नितिन नवीन की सिफारिश पर बीजेपी ने यहां से उनके बेहद करीबी अभिषेक कुमार उर्फ बंटी को टिकट दिया था, लेकिन नामांकन भरने के ठीक अगले ही दिन अभिषेक कुमार ने 'रिटायर्ड हर्ट' होकर मुकाबले से अपने कदम पीछे खींच लिए। किसी राष्ट्रीय पार्टी, खासकर दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी का घोषित उम्मीदवार पर्चा भरने के बाद मैदान छोड़कर भाग जाए, ऐसा देश के इतिहास में कभी नहीं सुना गया। इसके बाद बीजेपी ने आनन-फानन में नीरज कुमार सिन्हा भारती को नया चेहरा बनाकर उतारा है, जिन्हें कोई नहीं पहचानता।
वरिष्ठ पत्रकार फैज़ान अहमद ने 'निष्पक्ष' शो में इस रहस्यमयी ड्रामे के पीछे की दो बड़ी वजहों को उजागर किया:
प्रशात किशोर (PK) का खौफ: इस उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के मुखिया प्रशांत किशोर खुद बांकीपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव में भले ही जन सुराज के अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी, लेकिन खुद प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने से पूरी बांकीपुर सीट पर हवा बदल गई है। वे पिछले डेढ़ महीने से क्षेत्र में सक्रिय हैं। प्रशांत किशोर का देशव्यापी नाम और उनका आक्रामक चुनाव प्रचार देखकर बीजेपी उम्मीदवार अंदर से सहम गया।
नितिन नवीन और हाईकमान में रार: चर्चा में यह बात भी सामने आई कि अभिषेक कुमार बंटी के पिता और मां का नाम बहुचर्चित 'चारा घोटाला' में शामिल था, जिसके खिलाफ सीबीआई (CBI) ने चार्जशीट भी दाखिल की थी। इसके अलावा अभिषेक की 10वीं की मार्कशीट को लेकर भी विवाद था। स्थानीय बीजेपी के बड़े नेता नितिन नवीन के इस फैसले से खुश नहीं थे। इस अंदरूनी कलह और डिससैटिस्फेक्शन (असंतोष) के कारण अभिषेक कुमार को मैदान से हटना पड़ा, जिसने नितिन नवीन की साख पर भी गहरा बट्टा लगा दिया है।
क्या हार के डर से हताश है बीजेपी?
बांकीपुर में करीब 3 लाख 80 हजार मतदाता हैं, लेकिन यहां का इतिहास गवाह है कि कभी भी 40% से ज्यादा वोटिंग नहीं होती। ऐसे में इतने कम वोटिंग टर्नआउट के बीच प्रशांत किशोर की सीधी चुनौती और दतिया में नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों की बगावत ने बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की रात की नींद उड़ा दी है। शो के अंत में वरिष्ठ पत्रकारों ने निष्कर्ष निकाला कि दोनों ही राज्यों में सत्ता में होने के बावजूद, इन दोनों सीटों पर चल रहा अंदरूनी घमासान यह साफ इशारा कर रहा है कि बीजेपी इस समय उपचुनावों में हार के गहरे डर और हताशा से जूझ रही है।
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