निष्पक्ष: रिजिजू के दावे से राहुल के तंज तक, संसद का पूरा सियासी ड्रामा!
किरेन रिजिजू के बयान के बाद राहुल गांधी का पलटवार, जानिए एंकर नीलू व्यास के साथ निष्पक्ष में प्रबल प्रताप शाही और आयुष्मान पांडे का पूरा विश्लेषण।
Nishpaksh: संसद के मानसून सत्र के दौरान हर दिन एक नया राजनीतिक मोड़ देखने को मिल रहा है। द फ़ेडरल देश के विशेष कार्यक्रम निष्पक्ष में एंकर नीलू व्यास ने संसद के अंदर बने नाटकीय घटनाक्रम और विपक्ष की रणनीति पर देश के प्रमुख विश्लेषकों के साथ तीखी चर्चा की।
बिजनेस एडवाइजरी काउंसिल की बैठक के बाद जब संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने यह बयान दिया कि गृह मंत्री अमित शाह संसद में छात्रों के मुद्दे पर केवल बयान ही नहीं देंगे बल्कि पूरी चर्चा के लिए तैयार हैं, तो संसद की राजनीति और गरमा गई।
इस महत्वपूर्ण परिचर्चा में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रबल प्रताप शाही और राजनीतिक विश्लेषक आयुष्मान पांडे ने भाग लिया और अपने विचार खुलकर रखे।
सरकार का नया पैंतरा या कोई सोची समझी चाल?
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए एंकर नीलू व्यास ने सवाल उठाया कि क्या 21 दिनों के लंबे इंतजार के बाद अचानक सरकार द्वारा चर्चा के लिए तैयार होना एक राजनीतिक चाल है? नीलू व्यास के अनुसार, सत्ता पक्ष की ओर से यह बयान ऐसे समय आया जब मानसून सत्र के केवल तीन ही दिन बचे थे।
चर्चा के दौरान यह बात भी सामने आई कि गृह मंत्री अमित शाह की ओर से यह शर्त रखी गई थी कि जब वे भाषण देंगे, तो विपक्ष द्वारा कोई व्यवधान नहीं डाला जाएगा। लेकिन इसके तुरंत बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सरकार के दावों की हवा निकाल दी।
राहुल गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश को किसी की सामान्य बयानबाजी नहीं सुननी है, बल्कि विपक्ष को पॉइंटेड यानी सीधे सवालों के जवाब चाहिए। राहुल गांधी ने सवाल किया कि आंदोलन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज और फायरिंग के आदेश किसने दिए थे?
कांग्रेस प्रवक्ता प्रबल प्रताप शाही के तीखे प्रहार
चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस प्रवक्ता प्रबल प्रताप शाही ने सरकार और सत्ता पक्ष की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए।
गृह मंत्री की जवाबदेही: शाही ने कहा कि गृह मंत्री का संसद में आना और देश के ज्वलंत मुद्दों पर जवाब देना उनका संवैधानिक कर्तव्य है, कोई अहसान नहीं। अगर वे जवाब नहीं दे सकते तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए।
छात्रों और युवाओं पर अत्याचार: दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई, वाटर कैनन और लाठीचार्ज का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश का हर परिवार आज अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित है।
संवाद बनाम दमन की नीति: कांग्रेस प्रवक्ता ने कर्नाटक का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वहां छात्र आंदोलन कर रहे थे, तो उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों ने मौके पर जाकर छात्रों से संवाद किया था। लेकिन वर्तमान केंद्र सरकार हर प्रदर्शनकारी को देशद्रोही ठहराने में जुटी है।
शिक्षा व्यवस्था का राजनीतिकरण: उन्होंने आरोप लगाया कि नई शिक्षा नीति 2020 और विभिन्न विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों के माध्यम से देश के शिक्षा तंत्र को एक खास विचारधारा के हवाले करने का प्रयास किया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषक आयुष्मान पांडे का आकलन
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक आयुष्मान पांडे ने संसद में हुए घटनाक्रम और सरकार की रणनीति का गहराई से विश्लेषण किया।
जवाबदेही से बचने की कोशिश: आयुष्मान पांडे का मानना है कि पिछले 12 सालों में सरकार ने अपनी ऐसी स्थिति बना ली है कि वह जनता के सीधे प्रश्नों और अपनी जवाबदेही से लगातार बचने का प्रयास कर रही है।
विपक्ष में फूट डालने का विफल प्रयास: उन्होंने कहा कि सरकार को लगता था कि राम मंदिर विवाद और छात्रों पर हुई कार्रवाई जैसे अलग-अलग विषयों पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच मतभेद पैदा किए जा सकते हैं, लेकिन विपक्षी दल इन दोनों मुद्दों पर पूरी तरह से एकजुट नजर आ रहे हैं।
संसदीय मर्यादा पर सवाल: आयुष्मान पांडे ने कहा कि कई महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद में बिना पर्याप्त चर्चा के महज कुछ ही मिनटों में पारित करा लिया जाता है, जो देश की संसदीय परंपराओं के लिए एक चिंताजनक संकेत है।
सदन में हंगामे की आशंका: उन्होंने अंदेशा जताया कि आने वाले दिनों में सरकार खुद ही अन्य राज्यों या मुद्दों का हवाला देकर संसद में हंगामा करा सकती है ताकि मुख्य सवालों का जवाब देने से बचा जा सके।
क्या कल संसद में होगी सीधी चर्चा?
निष्पक्ष के इस विशेष अंक के अंत में एंकर नीलू व्यास ने यह सवाल छोड़ा कि क्या मानसून सत्र के बचे हुए दिनों में गृह मंत्री अमित शाह विपक्ष के सीधे सवालों का जवाब देंगे या फिर संसद में हंगामा और स्थगन का दौर जारी रहेगा?
संसद के इस सियासी संग्राम और देश के ज्वलंत मुद्दों पर निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए बने रहिए द फ़ेडरल देश के साथ।
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