संसद में 'चंदा चोरी' पर नुक्कड़ नाटक: NEET और राम मंदिर पर घिरी सरकार
संसद में 'चंदा चोरी' पर नुक्कड़ नाटक, NEET पर विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव और मोदी सरकार पर प्रबल प्रताप शाही का बड़ा हमला।
Nishpaksh: संसद के मॉनसून सत्र के दौरान विपक्ष आक्रामक तेवर में नज़र आ रहा है। एक तरफ जहाँ छात्र आंदोलन और NEET विवाद को लेकर सरकार कटघरे में है, वहीं दूसरी ओर राम मंदिर के 'चंदा चोरी' के मुद्दे को विपक्ष ने एक बार फिर गरमा दिया है। 'द फ़ेडरल देश' के खास शो 'निष्पक्ष' में एंकर नीलू व्यास ने इन्हीं सुलगते मुद्दों पर एक गंभीर और विस्तृत चर्चा की। इस पैनल चर्चा में कांग्रेस प्रवक्ता प्रबल प्रताप शाही और वरिष्ठ पत्रकार टीके राजलक्ष्मी ने हिस्सा लिया।
संसद परिसर में विपक्ष का अनोखा 'नुक्कड़ नाटक'
शो की शुरुआत करते हुए एंकर नीलू व्यास ने संसद के मकर द्वार पर इंडिया गठबंधन (INDIA Alliance) द्वारा किए गए अनोखे विरोध प्रदर्शन का ज़िक्र किया। विपक्ष ने राम मंदिर के चंदे में कथित चोरी को लेकर एक नुक्कड़ नाटक किया, जिसमें निर्दलीय सांसद पप्पू यादव एक पुजारी की वेशभूषा में दानपात्र लेकर पहुंचे। इस दौरान राहुल गांधी समेत विपक्ष के तमाम बड़े नेताओं ने इसमें प्रतीकात्मक रूप से चंदा डाला और फिर 'पुजारी' के चंदा लेकर भागने का मंचन किया गया। इसके जरिए विपक्ष ने सीधे तौर पर राम मंदिर ट्रस्ट और सरकार पर निशाना साधा।
"अमित शाह गायब हैं और सरकार भाग रही है"
चर्चा में कांग्रेस प्रवक्ता प्रबल प्रताप शाही ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि 20 जुलाई के बाद से प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह संसद से गायब हैं। शाही ने कहा, "सरकार इन दोनों मुद्दों (छात्र और चंदा चोरी) पर घिर गई है और उसके पास निकलने का कोई रास्ता नहीं है।" उन्होंने अयोध्या में कथित चंदा चोरी के तार सीधे आरएसएस (RSS) और बीजेपी मुख्यालय के निर्माण से जोड़ दिए।
छात्रों के मुद्दे पर शाही ने कहा कि सरकार युवाओं, महिलाओं और जेन-ज़ी (Gen Z) के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार हर मोर्चे पर फेल है और आने वाले समय में अमेरिका के साथ ट्रेड डील (US Trade Deal) को लेकर किसान भी सड़कों पर उतरने वाले हैं, जिससे यह सरकार जल्द ही गिर जाएगी।
'सतही कार्रवाई कर रही है सरकार, लोगों की आस्था को पहुंची है ठेस'
वरिष्ठ पत्रकार टीके राजलक्ष्मी ने इस पूरे घटनाक्रम का बेबाकी से विश्लेषण किया। राम मंदिर विवाद पर उन्होंने कहा कि यह मुद्दा कहीं गया नहीं था, बल्कि करोड़ों हिन्दुओं और आम लोगों की आस्था को इस 'लूट' से गहरी ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा, "जब इस मुद्दे पर चुनाव लड़े गए और दिग्गज नेता जीते, तो चंदे में हुई गड़बड़ी पर जवाबदेही ऊपर तक क्यों तय नहीं होनी चाहिए?"
छात्रों के प्रदर्शन पर राजलक्ष्मी ने सरकार के रवैये को 'सतही' (Superficial) करार दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस की ज्यादती, पैलेट गन और आंसू गैस का इस्तेमाल यह दिखाता है कि सरकार 'ऑफेंस इज़ द बेस्ट डिफेन्स' की रणनीति अपना रही है। उन्होंने साफ कहा कि सरकार बुनियादी मुद्दों को सुलझाने के बजाय केवल दिखावे की कार्रवाई कर रही है और विपक्ष के दबाव के बावजूद अपनी गलतियां मानने को तैयार नहीं है।
सदन में केसी वेणुगोपाल का 'प्रिविलेज मोशन'
शो में इस बात पर भी जोर दिया गया कि कैसे सदन के भीतर भी विपक्ष सरकार को घेर रहा है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने मंत्री जीतेंद्र सिंह के खिलाफ प्रिविलेज मोशन (विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव) पेश किया है, क्योंकि मंत्री ने सदन में दावा किया था कि छात्रों पर फायरिंग नहीं हुई, जबकि राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर छात्रों पर छर्रे लगने के सबूत पेश किए थे।
'निष्पक्ष' की इस चर्चा से यह साफ ज़ाहिर होता है कि विपक्ष अब सरकार को किसी भी मुद्दे पर बख्शने के मूड में नहीं है। चाहे वो राम मंदिर से जुड़ी आम आदमी की आस्था का सवाल हो, या फिर सड़कों पर न्याय मांगते युवाओं का संघर्ष मोदी सरकार के लिए इन सवालों से बचना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है।

