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'निष्पक्ष': मनुस्मृति बनाम संविधान पर योगी-राहुल आमने-सामने, तीखी बहस

'निष्पक्ष' में नीलू व्यास के साथ चर्चा: राहुल गांधी के पुणे संवाद पर सीएम योगी का हमला। कांग्रेस प्रवक्ता प्रबल प्रताप शाही व टीके राजलक्ष्मी का पलटवार।


Nishpaksh: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के पुणे में छात्रों के साथ किए गए संवाद के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन पर तीखा हमला बोला है। रायबरेली में एक कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने राहुल गांधी पर भारत की विरासत और 'मनुस्मृति' का अपमान करने का आरोप लगाते हुए देश से माफी मांगने की मांग की है।


इस ताज़ा राजनीतिक विवाद पर न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'द फ़ेडरल देश' के खास शो 'निष्पक्ष' में एंकर नीलू व्यास ने एक विस्तृत चर्चा की। इस पैनल में कांग्रेस के प्रवक्ता प्रबल प्रताप शाही और जानी-मानी वरिष्ठ पत्रकार टीके राजलक्ष्मी शामिल हुईं। शो में 'संविधान बनाम मनुस्मृति' और देश के युवाओं (Gen Z) के मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली।

सीएम योगी ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाए?
शो की शुरुआत में एंकर नीलू व्यास ने सीएम योगी के बयान का संदर्भ रखा। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राहुल गांधी लोकतंत्र के प्रति जवाबदेह होने के बजाय, संविधान की शपथ लेकर भारत की परंपरा और विरासत को कोसना अपना अधिकार समझते हैं। योगी ने कहा, "आप मनु और भारत की विरासत पर टिप्पणी करते हैं। अगर मनु को समझना है तो अथर्ववेद पढ़ें। आप देश के भविष्य को अर्बन नक्सलियों के हाथों बर्बाद करना चाहते हैं।" योगी ने कांग्रेस पर काकोरी कांड को 'लूट' कहने और राम मंदिर, सावरकर व सरदार पटेल को लेकर भी निशाना साधा।

कांग्रेस का पलटवार: 'बीजेपी मनुस्मृति लागू करना चाहती है, राहुल संविधान बचा रहे हैं'
सीएम योगी के बयानों पर पलटवार करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता प्रबल प्रताप शाही ने इसे बीजेपी और आरएसएस की बौखलाहट करार दिया। उन्होंने कहा:

मनुस्मृति बनाम संविधान: शाही ने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी, अमित शाह, योगी आदित्यनाथ और पूरा आरएसएस देश में संविधान को हटाकर 'मनुस्मृति' लागू करना चाहता है। राहुल गांधी इसी के खिलाफ लड़ रहे हैं और देश को आगाह कर रहे हैं।

लड़कियों की आजादी का मुद्दा: कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि जेनरेशन जेड (Gen Z) की लड़कियां बीजेपी से डरी हुई हैं। राहुल गांधी 'पिंजरा तोड़ो' और पितृसत्तात्मक समाज को खत्म करने की बात करते हैं, जिससे बीजेपी घबराई हुई है।

आरएसएस पर तीखा हमला: प्रबल प्रताप शाही ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर बेहद तीखा हमला करते हुए उसे एक 'देशद्रोही और आतंकी संगठन' करार दिया। उन्होंने कहा कि आरएसएस महिलाओं को केवल एक वस्तु (कमोडिटी) और दास समझता है, जबकि संविधान उन्हें पुरुषों के बराबर अधिकार देता है।

ऐतिहासिक भेदभाव का जिक्र: शाही ने मनुस्मृति का हवाला देते हुए कहा कि इसने समाज के हर वर्ग (विशेषकर महिलाओं और शूद्रों) के साथ भयंकर भेदभाव किया है। उन्होंने दक्षिण भारत में महिलाओं पर लगने वाले 'ब्रेस्ट टैक्स' जैसी कुप्रथाओं का भी जिक्र किया।

वरिष्ठ पत्रकार की राय: 'मूल मुद्दों से भटकाने के लिए मनुस्मृति का सहारा ले रही बीजेपी'
वरिष्ठ पत्रकार टीके राजलक्ष्मी ने इस पूरे विवाद को बीजेपी की हताशा और नैरेटिव की विफलता बताया। उन्होंने निम्नलिखित तर्क दिए:

युवाओं को मनुस्मृति नहीं, अच्छी शिक्षा चाहिए: राजलक्ष्मी ने कहा कि आज के युवा (Gen Z) को मनुस्मृति या अथर्ववेद से कोई लेना-देना नहीं है। उनकी मांगें सस्ती, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाएं हैं। 10 साल सत्ता में रहने के बाद भी बीजेपी इन मोर्चों पर विफल रही है।

पुराने नैरेटिव हो चुके हैं फेल: उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेपी के पुराने हथियार जैसे- 'अर्बन नक्सल', 'हिंदू संस्कार' और 'एंटी-नेशनल' का टैग अब जनता के बीच काम नहीं कर रहे हैं। यहां तक कि अयोध्या और राम मंदिर का मुद्दा भी चुनाव में उनके काम नहीं आया।

बौखलाहट में हो रहे हमले: राजलक्ष्मी के अनुसार, राहुल गांधी के पुणे कार्यक्रम में युवाओं की भारी भीड़ और उनके तीखे सवालों का जवाब बीजेपी के पास नहीं था। दो दिन तक बीजेपी का आईटी सेल शांत रहा और फिर अचानक योगी आदित्यनाथ को आगे कर यह 'मनुस्मृति' का विवाद खड़ा किया गया ताकि मूल मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके।

'द फ़ेडरल देश' की यह बहस इस बात को स्पष्ट करती है कि आगामी राजनीतिक लड़ाई केवल सत्ता की नहीं, बल्कि विचारधाराओं की है। एक तरफ बीजेपी खुद को भारतीय परंपराओं (जिसमें मनुस्मृति और वेद शामिल हैं) का रक्षक बताकर राहुल गांधी को घेरने की कोशिश कर रही है। वहीं, कांग्रेस और विपक्षी दल खुद को 'संविधान और आधुनिक अधिकारों' का रक्षक बताकर युवाओं और महिलाओं के बीच अपनी पैठ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।


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