BCI का यू-टर्न, ज़ोया हसन विवाद और 'स्कूल ठीक करो' मुहीम
'द फ़ेडरल देश' के शो 'निष्पक्ष' में एंकर नीलू व्यास और JNU प्रोफेसर अजय गुडावर्ती की चर्चा। जानिए Gen-Z का प्रभाव, ज़ोया हसन विवाद और 'स्कूल ठीक करो' अभियान का सच।
Nishpaksh: देश में तेजी से बदलते सामाजिक-राजनीतिक माहौल, शिक्षण संस्थानों की बदहाली और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'द फ़ेडरल देश' के कार्यक्रम 'निष्पक्ष' में एक बेहद अहम चर्चा हुई। शो में एंकर नीलू व्यास ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के वरिष्ठ प्रोफेसर और राजनीतिक विश्लेषक अजय गुडावर्ती के साथ देश की मौजूदा स्थिति पर विस्तृत और बेबाक विश्लेषण प्रस्तुत किया।
इस विशेष चर्चा में नालसार विवाद, प्रोफेसर ज़ोया हसन का रद्द हुआ भाषण, युवाओं की बदलती सोच और देश भर में शुरू होने वाले बड़े जन-आंदोलनों पर गहन मंथन किया गया।
1. नालसार (NALSAR) विवाद और BCI के यू-टर्न पर CJI का रुख
चर्चा की शुरुआत में एंकर नीलू व्यास ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा द्वारा जारी उस आदेश का जिक्र किया, जिसमें नालसार यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के लॉ छात्रों के नामांकन (Enrollment) पर रोक लगाने का फरमान सुनाया गया था।
85 मिनट में वापस हुआ फैसला: छात्रों और 'कॉकरोच जनता पार्टी' जैसे समूहों के अभूतपूर्व विरोध के चलते BCI को मात्र 85 मिनट के भीतर अपना फैसला वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।
संस्थानों पर पब्लिक मूड का असर: प्रोफेसर अजय गुडावर्ती ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ का छात्रों के समर्थन में आना यह दर्शाता है कि न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाएं भी अब जनता के बदलते मिजाज (Public Mood) को भांप रही हैं।
2. प्रोफेसर ज़ोया हसन का कार्यक्रम रद्द: विजिलेंटिज़्म का बढ़ता प्रभाव
दिल्ली के प्रतिष्ठित 'सरदार पटेल विद्यालय' में स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में जेएनयू की प्रख्यात प्रोफेसर ज़ोया हसन को 'प्लूरलिज्म' (बहुलवाद) विषय पर भाषण देने के लिए आमंत्रित किया गया था। लेकिन कार्यक्रम से ठीक पहले स्कूल के बाहर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कुछ लोगों के विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला दिया, जिसके चलते यह व्याख्यान रद्द कर दिया गया।
प्रोफेसर गुडावर्ती ने इसे संस्थागत लाचारी का उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे कदम असहमति की आवाज़ को दबाने का प्रयास हैं।
3. 'Gen-Z' का असर: दरक रहा है 10 साल का 'डोमिनेंट नैरेटिव'
प्रोफेसर अजय गुडावर्ती ने देश के युवाओं की मानसिकता पर बड़ा विश्लेषण पेश करते हुए कहा:
"पिछले 10 सालों से जो एकछत्र राजनीतिक नैरेटिव चलाया जा रहा था, अब वह दरक रहा है। आज की युवा पीढ़ी (Gen Z) के मन से सत्ता का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है। युवा अब सरकार की विदेश नीति, गिरते आर्थिक अवसरों, बेरोजगारी और '56 इंच' वाली छवि पर बेबाकी से सवाल उठा रहे हैं और सोशल मीडिया पर खुलकर मीम्स बना रहे हैं।"
4. 15 अगस्त से देशव्यापी 'स्कूल ठीक करो' अभियान
इंटरव्यू के दौरान प्रोफेसर गुडावर्ती ने देश के प्राथमिक शिक्षा ढांचे को बचाने के लिए शुरू हो रहे एक बड़े जन-आंदोलन का खुलासा किया। 15 अगस्त से देश भर में 'स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत की जा रही है।
अभियान के मुख्य मुद्दे:
बंद होते सरकारी स्कूल: पिछले 10 वर्षों में देश भर में लगभग 1 लाख सरकारी प्राइमरी स्कूलों को बंद या मर्ज किया गया है।
मिड-डे मील की बदहाली: कई राज्यों से मिड-डे मील में गुणवत्ता के बजाय केवल 'हल्दी, पानी और चावल' परोसे जाने की चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं।
जर्जर इंफ्रास्ट्रक्चर: सरकारी स्कूलों में पीने के साफ पानी, क्रियाशील शौचालयों और शिक्षकों की भारी कमी को इस आंदोलन के जरिए सीधे शासन-प्रशासन के सामने उठाया जाएगा।
5. विजिलेंटिज़्म (Vigilantism) का खतरा और लोकतंत्र की परीक्षा
चर्चा के अंत में प्रोफेसर गुडावर्ती ने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर एक गंभीर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि आज आम जनता में मीडिया, पुलिस और निचली न्यायपालिका जैसी संस्थाओं के प्रति गहरा अविश्वास पैदा हो रहा है।
अगर संवैधानिक संस्थाएं निष्पक्षता से अपना काम नहीं करेंगी, तो समाज में 'विजिलेंटे कल्चर' (कानून को हाथ में लेने की प्रवृत्ति) तेजी से फैलेगी, जो किसी भी जीवंत लोकतंत्र के लिए सबसे खतरनाक स्थिति साबित हो सकती है।
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