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'निष्पक्ष' में नीलू व्यास: एक्सप्रेस-वे धंसने और टोल वसूली पर बड़ा खुलासा

'द फ़ेडरल देश' के शो 'निष्पक्ष' में नीलू व्यास के साथ देखिए एक्सप्रेस-वे धंसने का सच, PNC इंफ्राटेक पर उठे सवाल और PPP मॉडल के तहत टोल वसूली का विस्तृत विश्लेषण।


Nishpaksh: बारिश और मानसून ने मोदी सरकार और नितिन गडकरी के 'वर्ल्ड-क्लास' इंफ्रास्ट्रक्चर और एक्सप्रेस-वे के दावों की पोल खोल कर रख दी है। करोड़ों की लागत से बने एक्सप्रेस-वे पहली ही बारिश में कागज की नाव की तरह बह रहे हैं, धंस रहे हैं और टूट रहे हैं। जनता से टोल के नाम पर हजारों रुपये की 'गुंडा वसूली' हो रही है, लेकिन बदले में मिल रही है मौत और गड्ढे।

'द फ़ेडरल देश' के खास कार्यक्रम 'निष्पक्ष' में वरिष्ठ पत्रकार और एंकर नीलू व्यास ने इसी 'इंफ्रास्ट्रक्चर घोटाले' की बखिया उधेड़ी। इस महाबहस में अधिवक्ता मंच (इलाहाबाद) के संयोजक राजवेंद्र सिंह और कांग्रेस के डॉ. मनमोहन सिंह फेलो आयुष्मान ने हिस्सा लिया और सरकार की पीपीपी (PPP) मॉडल वाली 'लूटनीति' का पूरा कच्चा चिट्ठा खोल कर रख दिया।

एंकर नीलू व्यास: "18 दिन में 84 जगह धंसा एक्सप्रेस-वे, टोल के नाम पर लूट"

चर्चा की शुरुआत करते हुए नीलू व्यास ने आंकड़ों के साथ सरकार को कटघरे में खड़ा किया:

दावों की खुली पोल: गडकरी जी ने 2026 तक भारत की सड़कों को अमेरिका जैसा बनाने का वचन दिया था, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि 63 किलोमीटर लंबा नया एक्सप्रेस-वे महज़ 18 दिन में 84 जगहों पर धंस चुका है।

ट्रक समाया, लीपापोती चालू: 30 जुलाई को गिट्टी से लदा एक पूरा ट्रक एक्सप्रेस-वे के अंदर धंस कर पलट गया। NHAI को 1000 स्क्वायर फीट की सड़क उखाड़ कर दोबारा बनानी पड़ी। कानपुर-लखनऊ लेन पर 45 जगह मरम्मत हो चुकी है, कहीं 200 मीटर तो कहीं 100 मीटर सड़क दोबारा बन रही है।

टोल की 'गुंडा वसूली': दिल्ली से कानपुर जाने के लिए आम आदमी को कम से कम 1000 रुपये का वन-वे टोल देना पड़ता है, लेकिन इस भारी-भरकम टैक्स के बदले क्वालिटी एकदम 'जीरो' है।

कंपनी पर कार्रवाई महज़ दिखावा: सड़क बनाने वाली कंपनी 'PNC इंफ्राटेक लिमिटेड' (PNC Infratech Limited) को सिर्फ दिखावे के लिए 'नॉन-परफॉर्मर' घोषित कर 3 अफ़सरों को हटाया गया है।

राजवेंद्र सिंह (संयोजक, अधिवक्ता मंच): "BJP सांसद की कंपनी है, CBI जांच के बाद भी ठेका कैसे मिला?"

राजवेंद्र सिंह ने इस पूरे मामले में सीधे तौर पर सत्ताधारी दल के नेताओं की संलिप्तता का आरोप लगाया:

बीजेपी सांसद का कनेक्शन: उन्होंने साफ आरोप लगाया कि जिस 'PNC इंफ्राटेक' कंपनी ने यह घटिया सड़क बनाई है, वह भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद नवीन जैन के भाई की कंपनी है।

ब्लैकलिस्टेड कंपनी को इनाम: इसी कंपनी ने बुंदेलखंड और खजुराहो एक्सप्रेस-वे भी बनाया था, जहां ऐसी ही शिकायतें आई थीं। CBI जांच हुई, कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया गया, लेकिन फिर अचानक सारे प्रतिबंध हटाकर उन्हें नए ठेके दे दिए गए।

पीपीपी (PPP) मॉडल एक 'वसूली' तंत्र: उन्होंने कहा कि आज के समय में PWD या सेतु निर्माण निगम जैसी सरकारी एजेंसियां सड़कें नहीं बनातीं। सरकार जानबूझकर PPP मॉडल लाती है ताकि प्राइवेट कंपनियों को ठेका देकर बड़े अफ़सर और नेता अपना 'कमीशन' खा सकें।

सड़कें नहीं, मौत का जाल: देश में हर साल 1 लाख 76 हजार से ज़्यादा लोग सड़क हादसों में मारे जा रहे हैं (रोजाना करीब 480 मौतें), लेकिन सरकार को सिर्फ प्राइवेट कंपनियों का मुनाफा सुनिश्चित करने की जल्दी है।

आयुष्मान (कांग्रेस फेलो): "सड़क सुखाने के लिए पंखे लगा रहे हैं, यह विकास नहीं भ्रष्टाचार का मॉडल है"

आयुष्मान ने सरकार के 'विकास' मॉडल पर तीखा तंज़ कसते हुए इसे जनता के पैसों की बर्बादी बताया:

टेक्नोलॉजी के नाम पर मज़ाक: उन्होंने एक वायरल वीडियो का ज़िक्र करते हुए कहा कि बारिश में सड़क सुखाने के लिए ठेकेदार 'पंखे और हीटर' लगा रहे हैं। क्या गडकरी जी इसी टेक्नोलॉजी की बात करते हैं?

5 जुलाई को ब्लैकलिस्ट, 16 जुलाई को नया टेंडर: आयुष्मान ने दस्तावेज़ों का हवाला देते हुए बताया कि 'PNC इंफ्राटेक' को 5 जुलाई को एनएचएआई (NHAI) ने ब्लैकलिस्ट किया था, लेकिन भ्रष्टाचार का आलम देखिए कि 16-17 जुलाई को उसी कंपनी को एक नया भारी-भरकम ठेका दे दिया गया।

टोल टैक्स 15-20 साल की लूट है: उन्होंने कहा कि सरकार जनता की ज़मीन का अधिग्रहण करती है, सरकार पैसा देती है, और प्राइवेट कंपनी सिर्फ ठेका लेकर 15 से 20 साल तक जनता से टोल के नाम पर 'वसूली' करती है। यह देश के खजाने की सुनियोजित लूट है।

विकास का असली पैमाना क्या है?: आयुष्मान ने सवाल उठाया कि सिर्फ 6 लेन की सड़कें बना देना विकास नहीं है। असली विकास तब है जब आप युवाओं को नौकरी दें, महिलाओं को सुरक्षा दें, अस्पताल और स्कूल बनाएं। आज उत्तर प्रदेश और बिहार का युवा सिर्फ़ इसलिए पलायन कर रहा है क्योंकि वहाँ बुनियादी सुविधाओं का अकाल है। जब तक हर प्रोजेक्ट का 'फाइनेंशियल ऑडिट' और 'अकाउंटेबिलिटी' (जवाबदेही) तय नहीं होगी, तब तक यह भ्रष्टाचार रुकने वाला नहीं है।

'निष्पक्ष' शो की इस चर्चा से यह स्पष्ट है कि एक्सप्रेस-वे के नाम पर जो 'विकास का ढिंढोरा' पीटा जा रहा है, उसकी नींव भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और भाई-भतीजावाद पर टिकी है। जनता टोल टैक्स के रूप में अपनी गाढ़ी कमाई दे रही है, लेकिन उन्हें बदले में ऐसे एक्सप्रेस-वे मिल रहे हैं जो पहली बारिश भी नहीं झेल पा रहे।

क्या आप चाहते हैं कि इस मुद्दे को लेकर सरकार और ठेकेदार के गठजोड़ पर 2-3 आक्रामक 'क्लिकबेट' थंबनेल के आइडिया और वीडियो टाइटल भी तैयार कर दूँ?

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