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'निष्पक्ष' में नीलू व्यास: जंतर-मंतर बनाम झारखंड, संसद में क्यों हुआ हंगामा?

'द फ़ेडरल' के शो 'निष्पक्ष' में नीलू व्यास के साथ जानिए जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन, झारखंड लाठीचार्ज और संसद में मचे घमासान का पूरा राजनीतिक विश्लेषण।


Nishpaksh: द फ़ेडरल के खास शो 'निष्पक्ष' में छात्रों के मुद्दों पर संसद में हुए भारी हंगामे और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पर विस्तृत चर्चा की गई। एंकर नीलू व्यास के साथ इस पैनल चर्चा में मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य और सत्ता पक्ष एवं विपक्ष की रणनीतियों का गहराई से विश्लेषण किया गया।

चर्चा में शामिल मेहमान:

टीके राजलक्ष्मी: वरिष्ठ पत्रकार

प्रबल प्रताप शाही: कांग्रेस प्रवक्ता

आयुष्मान: राजनीतिक विश्लेषक (डॉ. मनमोहन सिंह फेलो - कांग्रेस)

संसद का मानसून सत्र छात्रों के मुद्दे पर भारी हंगामे की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। एक तरफ विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' (INDIA) दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को छात्रों पर हुई पुलिसिया बर्बरता और राम मंदिर के मुद्दे पर सरकार से जवाब मांग रहा है, वहीं दूसरी तरफ सत्ताधारी एनडीए (NDA) ने अपना पूरा फोकस झारखंड में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज पर केंद्रित कर दिया है।

एंकर नीलू व्यास ने चर्चा की शुरुआत करते हुए सवाल उठाया कि क्या दिल्ली में छात्रों पर हुई बर्बरता पर जवाबदेही से बचने के लिए एनडीए सांसद जानबूझकर झारखंड का मुद्दा उछाल कर राहुल गांधी से जवाब मांग रहे हैं? उन्होंने संसद के बाहर दोनों पक्षों के सांसदों के बीच हुई तीखी नोकझोंक और पुलिस द्वारा इलाके को कॉर्डन ऑफ (घेरने) करने की स्थिति का भी जिक्र किया।

सरकार 'गोलपोस्ट' बदल रही है: टीके राजलक्ष्मी

वरिष्ठ पत्रकार टीके राजलक्ष्मी ने इस स्थिति को सत्ता पक्ष द्वारा 'गोलपोस्ट' बदलने की रणनीति करार दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष शुरू से ही दिल्ली में छात्रों के साथ हुए व्यवहार पर चर्चा की मांग कर रहा है, लेकिन सत्ताधारी पार्टी जिम्मेदारी लेने के बजाय झारखंड और बंगाल का मुद्दा उठा रही है। राजलक्ष्मी ने स्पष्ट किया कि संसदीय प्रणाली में सरकार विपक्ष को यह डिक्टेट नहीं कर सकती कि वे किस मुद्दे पर और क्या बोलेंगे। सरकार का चर्चा से भागना और अपने ही सांसदों से संसद को बाधित करवाना उनकी जवाबदेही से बचने की हताशा को दर्शाता है।

अमित शाह को बचाने के लिए रची गई साजिश: प्रबल प्रताप शाही

कांग्रेस प्रवक्ता प्रबल प्रताप शाही ने बीजेपी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राहुल गांधी ने झारखंड के मुद्दे पर तुरंत संज्ञान लिया, छात्र नेताओं (NSUI) से बात की और लाठीचार्ज की निंदा की। शाही ने आरोप लगाया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों पर चले पैलेट गन और पुलिसिया बर्बरता पर देश के गृह मंत्री अमित शाह को संसद में जवाब देना पड़ता। इसी जवाबदेही से अमित शाह को बचाने के लिए बीजेपी ने खुद संसद की कार्यवाही को बाधित करने की साजिश रची।

शाही ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि झारखंड में छात्रों के मूल आंदोलन को हाईजैक और बदनाम करने के लिए बीजेपी और आरएसएस ने पश्चिम बंगाल से गाड़ियां भरकर अपने कार्यकर्ताओं को वहां भेजा था, जिन्होंने वहां ईंट-पत्थर चलाने का काम किया।

15 अगस्त के भाषण के लिए मुद्दे को 'गर्म' रख रही बीजेपी: आयुष्मान

राजनीतिक विश्लेषक आयुष्मान ने बीजेपी की रणनीति की तुलना ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन से की, जो गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए स्थितियों को हास्यास्पद बना देते थे। उन्होंने कहा कि बीजेपी जानबूझकर छात्रों और युवाओं के अहम मुद्दों को कॉमिकल बनाने की कोशिश कर रही है ताकि मूल मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके।

आयुष्मान ने दावा किया कि झारखंड सरकार ने छात्रों की 6 में से 4 मांगें मान ली हैं और वहां बातचीत के जरिए समस्या सुलझाई जा रही है। इसके बावजूद, बीजेपी इस मुद्दे को जबरन 'गर्म' रखना चाहती है ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से विपक्ष पर हमला करने के लिए एक राजनीतिक मुद्दा मिल सके। उन्होंने आरएसएस पर शिक्षा प्रणाली को ध्वस्त करने और विश्वविद्यालयों को अपनी प्रयोगशाला बनाने का भी आरोप लगाया।

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