ग्रेटर नोएडा से दिल्ली बस गैंगरेप: राहुल गांधी का सरकार पर बड़ा हमला!
ग्रेटर नोएडा-दिल्ली चलती बस गैंगरेप पर राहुल गांधी का हमला। 'निष्पक्ष' शो में एंकर नीलू व्यास ने दिल्ली-यूपी पुलिस और अंतरराज्यीय सुरक्षा पर उठाए कड़े सवाल।
Nishpaksh: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में महिला सुरक्षा के दावों की एक बार फिर धज्जियां उड़ गई हैं। ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के बीच चलती स्लीपर बस में एक नाबालिग बच्ची के साथ 47 किलोमीटर तक गैंगरेप की रूह कंपा देने वाली वारदात ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपने X (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर पोस्ट करते हुए कानून-व्यवस्था और भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया।
'द फ़ेडरल देश' के चर्चित शो 'निष्पक्ष' में वरिष्ठ पत्रकार और एंकर नीलू व्यास ने इस खौफनाक वारदात और प्रशासनिक विफलता को लेकर दिल्ली व उत्तर प्रदेश पुलिस की जवाबदेही पर तीखे सवाल उठाए। इस परिचर्चा में वरिष्ठ पत्रकार टीके राजलक्ष्मी और कांग्रेस के आयुष्मान पाण्डेय ने भी अपने विचार रखे।
47 किमी का सफर, दर्जनों चेकपोस्ट और पूरी तरह नदारद पुलिस
वारदात के दौरान बस नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, दिल्ली-यूपी बॉर्डर और राजधानी की प्रमुख रिंग रोड से होकर गुजरी।
सुरक्षा तंत्र की नाकामी: 47 किलोमीटर के इस लंबे और संवेदनशील रूट पर कई पुलिस चौकियां, बैरिकेड्स और नाइट पेट्रोलिंग पॉइंट्स मौजूद होने के बावजूद इस बस को एक भी जगह नहीं रोका गया।
अपराधियों का दुस्साहस: दरिंदे बिना किसी खौफ के अंतरराज्यीय सीमाओं को पार करते हुए दिल्ली में दाखिल हुए, वारदात को अंजाम दिया और आसानी से निकल गए।
निर्भया कांड के बाद भी सबक नहीं: नियम ताक पर
वर्ष 2012 के ऐतिहासिक निर्भया कांड के बाद सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार ने वाणिज्यिक यात्री वाहनों के लिए सख्त दिशा-निर्देश तय किए थे। लेकिन जमीनी हकीकत आज भी जस की तस है:
काले शीशे और गहरे पर्दे: इस स्लीपर बस की खिड़कियों और केबिनों में गहरे पर्दे लगे हुए थे, जिसने अंदर चल रही हैवानियत को बाहर से पूरी तरह छिपाए रखा।
जांच और फिटनेस का अभाव: प्राइवेट और कमर्शियल स्लीपर बसों के सुरक्षा मानकों, सीसीटीवी और पैनिक बटन की नियमित जांच पूरी तरह नदारद है।
जवाबदेही किसकी? 'निष्पक्ष' में उठे कड़े सवाल
शो में चर्चा के दौरान दोनों राज्यों की पुलिस कार्यप्रणाली और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर सीधे सवाल दागे गए:
दिल्ली-यूपी पुलिस में समन्वय की कमी: केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन दिल्ली पुलिस और योगी सरकार के अधीन यूपी पुलिस के बीच अंतरराज्यीय सीमा पर रियल-टाइम निगरानी और समन्वय का घोर अभाव दिखा।
प्रशासनिक उदासीनता: बस की खिड़कियों पर लटके पर्दे केवल दरिंदों का अपराध नहीं छिपा रहे थे, बल्कि वे दोनों राज्यों के प्रशासनिक तंत्र की विफलता पर पड़े पर्दों का भी प्रतीक हैं।
जब तक बॉर्डर पेट्रोलिंग, स्लीपर बसों के सुरक्षा ऑडिट और गश्त में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर सख्त कानूनी जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक महिलाओं और बच्चियों के लिए एनसीआर में सुरक्षित सफर केवल खोखला दावा बना रहेगा।

