x

सोनम वांगचुक को पुलिस ने धरना स्थल से उठाया, CJP कार्यकर्ताओं का आरोप- पुलिस ने की मारपीट

दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा धांधली और पेपर लीक के खिलाफ 21 दिनों से अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने शनिवार सुबह जबरन हटा दिया


दिल्ली का जंतर-मंतर शनिवार सुबह एक बार फिर सियासी अखाड़ा बन गया। पिछले 21 दिनों से लगातार भूख हड़ताल पर बैठे मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने धरना स्थल से जबरन हटा दिया। पुलिस की इस अचानक हुई बड़ी कार्रवाई से प्रदर्शन स्थल पर हड़कंप मच गया और चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर द फेडरल के शो निष्पक्ष में एक बड़ी चर्चा आयोजित की गई। शो की एंकर नीलू व्यास ने इस संवेदनशील मुद्दे पर सीधे और तीखे सवाल पूछे। इस चर्चा में कई पैनलिस्ट शामिल हुए, जिन्होंने पुलिस की कार्रवाई और सरकार की नीयत पर खुलकर अपनी राय रखी।

सर्वेश त्रिपाठी (समाजवादी पार्टी): सपा नेता सर्वेश त्रिपाठी ने पुलिस की इस कार्रवाई को पूरी तरह तानाशाही करार दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य और देश में लगातार हो रहे पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक बुजुर्ग सामाजिक कार्यकर्ता को इस तरह आधी रात या सुबह के अंधेरे में उठाना लोकतंत्र का अपमान है। सरकार छात्रों के मुद्दों पर बात करने के बजाय आंदोलन को दबाने में जुटी है।

टी.के. राजलक्ष्मी (वरिष्ठ पत्रकार): वरिष्ठ पत्रकार टी.के. राजलक्ष्मी ने इस पूरे मामले के प्रशासनिक और सामाजिक पहलुओं पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। पुलिस भले ही इसे मेडिकल इमरजेंसी बता रही हो, लेकिन जिस तरह से मंच को कवर करके कार्रवाई की गई, उससे व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

अंचल गुप्ता (यूट्यूबर/कंटेंट क्रिएटर): सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और यूट्यूबर अंचल गुप्ता ने कहा कि आज का युवा इस पूरे घटनाक्रम को बहुत करीब से देख रहा है। पेपर लीक और नीट (NEET) परीक्षा में धांधली की वजह से छात्र पहले से ही गुस्से में हैं। ऐसे में सोनम वांगचुक जैसे बड़े व्यक्तित्व पर पुलिसिया कार्रवाई से युवाओं का गुस्सा और ज्यादा भड़क सकता है।

मारपीट के आरोप और पुलिस की सफाई

इस कार्रवाई के बाद माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है। सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस ने आंदोलन को कुचलने के लिए बल प्रयोग किया और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट भी की। दूसरी तरफ, नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने सोशल मीडिया (X) पर पोस्ट कर पुलिस का रुख साफ किया। डीसीपी ने कहा कि यह कार्रवाई माननीय हाई कोर्ट के आदेश और डॉक्टरों (मेडिकल एक्सपर्ट्स) की सलाह पर की गई है। वांगचुक के अनशन का 21वां दिन था और उनकी सेहत लगातार गिर रही थी। उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा को देखते हुए ही उन्हें अस्पताल में शिफ्ट किया गया है। पुलिस ने यह भी अपील की है कि बाकी प्रदर्शनकारी तुरंत और शांतिपूर्ण तरीके से जंतर-मंतर खाली कर दें।

Read More
Next Story