अयोध्या राम मंदिर: चंदा, सामूहिक इस्तीफे और बड़ा विवाद!
अयोध्या राम मंदिर में 23 कर्मचारियों के सामूहिक इस्तीफे से नया विवाद खड़ा हो गया है। दान पेटी में सिर्फ ₹10 और ₹20 मिलने के दावों के बीच चंदे के इस्तेमाल और व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
Nishpaksh: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चंदे और चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में हर दिन चौंकाने वाले नए खुलासे हो रहे हैं। इस विवाद के बीच एक बहुत बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां मंदिर में दान के पैसों की गिनती और छंटाई करने वाले सभी 23 कर्मचारियों ने एक साथ अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इसी ज्वलंत और संवेदनशील मुद्दे पर 'द फ़ेडरल देश' के शो निष्पक्ष में एंकर नीलू व्यास ने वरिष्ठ पत्रकार शाहिरा नईम, समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता सर्वेश त्रिपाठी और कांग्रेस कार्यकर्त्ता आयुष्मान पांडे के साथ एक बेहद विश्लेषनात्मक चर्चा की, जिसमें मंदिर के आंतरिक प्रबंधन और सुरक्षा तंत्र पर तीखे सवाल खड़े किए गए।
10 और 20 के नोट बढ़ने से काम के घंटे बढ़ने का तर्क
खबर के मुताबिक, इस्तीफा देने वाले 23 कर्मचारियों का तर्क है कि मंदिर में चोरी की घटनाओं के उजागर होने के बाद से अब दान पेटी में बड़े नोटों की संख्या बेहद कम हो गई है। अब श्रद्धालु 10 और 20 रुपये के छोटे नोट अधिक संख्या में चढ़ा रहे हैं, जिससे उनकी गिनती और छंटाई करने में पहले के मुकाबले बहुत ज्यादा समय लग रहा है और उनके काम के घंटे बढ़ गए हैं। कर्मचारियों ने बताया कि पहले जहां चढ़ावे की गिनती के दौरान 500 रुपये के नोटों की 70 से 80 गड्डियां तक आसानी से बन जाती थीं, वहीं अब यह संख्या भारी गिरावट के साथ बामुश्किल 15 गड्डियों तक सिमट कर रह गई है।
मशीन में नहीं, नोट छांटते वक्त होती थी चोरी: SIT
इस पूरे मामले की तफ्तीश कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की तफ्तीश में एक और बड़ा सनसनीखेज सच सामने आया है। एसआईटी के मुताबिक, दान के पैसों की चोरी बैंक मशीन में गिनती के दौरान नहीं की जाती थी, बल्कि उससे पहले जब नोटों को सलीके से लगाने और छांटने का काम होता था, ठीक उसी वक्त इस हेराफेरी को अंजाम दिया जाता था। इस खुलासे के बाद अब विपक्षी दल मामले की उच्च स्तरीय सीबीआई (CBI) जांच की मांग पर अड़ गए हैं। इस पूरे प्रकरण और सीबीआई जांच की मांग को लेकर दायर याचिकाओं पर देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) आगामी 13 जुलाई को एक बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई करने जा रही है।
कर्मचारियों का इस्तीफा जान छुड़ाने का प्रिएम्प्टिव एक्शन?
'द फ़ेडरल देश' के शो में चर्चा के दौरान वरिष्ठ पत्रकार शाहिरा नईम ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि आस्था का केंद्र रहा राम मंदिर अब एक 'प्लेस ऑफ वर्क' या किसी फैक्ट्री की तरह चर्चा में आ गया है, जहां लेबर लॉ और काम के घंटे बढ़ाने जैसी बातें हो रही हैं। उन्होंने अंदेशा जताया कि एसआईटी जांच में यह साफ होने के बाद कि चोरी नोट छांटते वक्त होती थी, इन 23 कर्मचारियों का सामूहिक इस्तीफा एक 'प्रिएम्प्टिव एक्शन' (पहले ही सतर्क हो जाना) हो सकता है ताकि वे कल को कानूनी शिकंजे या गिरफ्तारी से बच सकें। शाहिरा ने यह भी कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था राम में हमेशा रहेगी, लेकिन इस बदइंतजामी ने प्रबंधन को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है।
श्रद्धालुओं ने आस्था पर डाके के खिलाफ अपनाया नया तरीका
चर्चा को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस कार्यकर्ता और विश्लेषक आयुष्मान पांडे ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे पर फ्रंट फुट पर खेलते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जो एक स्वागत योग्य कदम है। उन्होंने कहा कि जो श्रद्धालु मंदिर जा रहे हैं, वे भाजपा या वीएचपी के लिए नहीं बल्कि प्रभु श्री राम के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा के कारण जाते हैं। लेकिन जब आम जनता को यह पता चला कि उनकी गाढ़ी कमाई के चढ़ावे और श्रद्धा पर सरेआम डाका डाला जा रहा है, तो उन्होंने बड़े नोट चढ़ाने बंद कर दिए और अब वे छोटे नोटों के रूप में चिल्लड़ डाल रहे हैं। पांडे ने कहा कि यह इस्तीफा जिम्मेदारी से भागने का जरिया नहीं बन सकता और अगर कानून का राज रहा, तो दोषी बच नहीं पाएंगे।

