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राम मंदिर चंदा चोरी: विनय कटियार के दावे में कितना दम?

राम मंदिर लूट मामले में विनय कटियार की एंट्री से मचा हड़कंप; 'निष्पक्ष' शो में बोले सपा प्रवक्ता सर्वेश त्रिपाठी अंतिम फेज में है भाजपा की लीपापोती, जनता सब समझ रही है।


Nishpaksh: राम मंदिर में कथित धन गबन और चोरी के मामले में बजरंग दल के पूर्व फायरब्रांड नेता विनय कटियार की अचानक हुई एंट्री ने उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। कटियार के इस दावे ने कि "उन्होंने इस चोरी के संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे बात की है," एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इसी गंभीर विषय पर डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'द फेडरल' के शो 'निष्पक्ष' में होस्ट नीलू व्यास ने वरिष्ठ पत्रकार सुमन गुप्ता और समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता सर्वेश त्रिपाठी के साथ एक विशेष डिबेट की, जिसमें कई चौंकाने वाले राजनीतिक विश्लेषण सामने आए।


विनय कटियार का दावा और पीएमओ का 'मौन'
शो की शुरुआत करते हुए होस्ट नीलू व्यास ने विनय कटियार के उस बयान को रेखांकित किया जिसमें उन्होंने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव की गिरफ्तारी की आशंका जताई है। कटियार के मुताबिक, जब उन्होंने प्रधानमंत्री को इस स्थिति से अवगत कराया तो पीएम ने उनसे पूछा कि "आगे भविष्य में क्या होगा?" जिस पर कटियार ने उन्हें सब ठीक होने का भरोसा दिया।

इस मुद्दे पर अयोध्या से जुड़ीं वरिष्ठ पत्रकार सुमन गुप्ता ने कहा कि चूंकि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की तरफ से इस बयान का न तो खंडन किया गया है और न ही इसकी पुष्टि हुई है, इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने अंदेशा जताया कि यह विनय कटियार द्वारा अपने राजनीतिक अस्तित्व या किसी नए रास्ते की तलाश का एक प्रयास हो सकता है। सुमन गुप्ता ने इसे एक 'टेस्ट केस' की तरह भी देखने की बात कही।

"एसआईटी जांच केवल कोर्ट से बचने और समय खरीदने का जरिया"
चर्चा में शामिल समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता सर्वेश त्रिपाठी ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने 'ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2013)' के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि संज्ञेय अपराधों में तुरंत एफआईआर होनी चाहिए थी, लेकिन यहाँ आरोपियों को बचाया गया।

सर्वेश त्रिपाठी ने आरोप लगाया, "एसआईटी (SIT) का गठन इसलिए नहीं किया गया था कि वह निष्पक्ष जांच करे, बल्कि इसलिए किया गया था ताकि कोर्ट इस मामले का स्वतः संज्ञान (Suo Motu) न ले ले। एसआईटी के जरिए केवल समय खरीदा गया ताकि इस क्रूशियल पीरियड में सबूतों को इधर-उधऱ या गायब किया जा सके।"

चुनाव से पहले चंपत राय और अनिल मिश्रा की 'बलि' संभव?
शो के दौरान सबसे बड़ा राजनीतिक विश्लेषण तब सामने आया जब होस्ट नीलू व्यास ने पूछा कि क्या इस मामले को ठंडे बस्ते (Cold Storage) में डाल दिया जाएगा?

इस पर सर्वेश त्रिपाठी ने दावा किया कि भाजपा इस समय पूरी तरह 'ट्रबलशूट मोड' (Troubleshoot Mode) में काम कर रही है। लोकसभा चुनाव नजदीक हैं और जनता के भारी दबाव के कारण सरकार बुरी तरह फंस चुकी है। त्रिपाठी ने कहा, "चंपत राय और अनिल मिश्रा जैसे लोग इस पूरे खेल के बहुत छोटे प्यादे हैं, ये असली मगरमच्छ नहीं हैं। प्रधानमंत्री मोदी के न्यूजीलैंड दौरे पर जाने से पहले, पार्टी अपनी छवि साफ करने के लिए इन छोटे प्यादों की बलि चढ़ा सकती है। इन्हें कुछ दिनों के लिए जेल भी भेजा जा सकता है ताकि जनता को दिखाया जा सके कि मोदी जी न्यायप्रिय हैं, लेकिन असल में यह बहुत बड़ी लूट है।"

5 तारीख की ट्रस्ट बैठक पर टिकीं निगाहें
वरिष्ठ पत्रकार सुमन गुप्ता ने विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए कहा कि सरकार इस समय किसी भी हाल में इस विवाद से पिंड छुड़ाना चाहती है, क्योंकि यह बैठे-बिठाए उसके सिर पर आई एक ऐसी मुसीबत है जो उसे तगड़ा राजनीतिक नुकसान पहुँचा सकती है। उन्होंने कहा कि अब सारा दारोमदार 5 तारीख को होने वाली राम मंदिर ट्रस्ट काउंसिल की बैठक पर टिका है। इस बैठक के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि सरकार और ट्रस्ट इस मामले को दबाने के लिए क्या नया रास्ता निकालते हैं।

'निष्पक्ष' शो में हुई इस बहस से यह साफ है कि राम मंदिर के नाम पर हुए कथित गबन ने भाजपा के 'भ्रष्टाचार विरोधी' दावों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि आगामी ट्रस्ट की बैठक और एसआईटी की बढ़ी हुई 15 दिनों की मियाद में क्या वाकई चंपत राय जैसे बड़े चेहरों पर गाज गिरती है या फिर विनय कटियार के इस बयान को केवल एक चुनावी शगुफा बनाकर छोड़ दिया जाएगा।


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