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चढ़ावा चोरी पर पर्दा या सेना की आड़? राम मंदिर ट्रस्ट CEO पर बड़ा घमासान

पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर ट्रस्ट के CEO। चढ़ावा चोरी और सैन्य आड़ के आरोपों पर 'निष्पक्ष' में नीलू व्यास, सुमन गुप्ता और आयुष्मान पांडे की बहस।


Nishpaksh: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किए जाने के बाद देश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है। द फ़ेडरल देश के लोकप्रिय डिबेट शो ‘निष्पक्ष’ में वरिष्ठ पत्रकार नीलू व्यास ने इस नियुक्ति के पीछे की मंशा, समय (टाइपिंग) और राम मंदिर में पिछले दिनों सामने आए चढ़ावा चोरी के आरोपों को लेकर तीखे सवाल उठाए।


कार्यक्रम में अयोध्या से जुड़ीं वरिष्ठ पत्रकार सुमन गुप्ता और राजनीतिक विश्लेषक आयुष्मान पांडे ने चर्चा में भाग लिया और इस नियुक्ति को ट्रस्ट की छवि सुधारने की कवायद से ज्यादा विवादों को दबाने और चुनावी लाभ लेने का "मास्टरस्ट्रोक" करार दिया।

पद संभालते ही विवादों में घिरे नए CEO: 'मैंने सबको पहचान लिया है, अब किसी को अंदर नहीं आने दूंगा'
डिबेट की शुरुआत करते हुए एंकर नीलू व्यास ने बताया कि पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा जिन्होंने भारतीय वायुसेना के वेस्टर्न एयर कमांड की जिम्मेदारी संभाली थी और 'ऑपरेशन सिंदूर' का नेतृत्व किया था को राम मंदिर ट्रस्ट का नया सीईओ बनाया गया है।

लेकिन कार्यभार संभालते ही उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसने नए विवाद को जन्म दे दिया। वीडियो में वे पत्रकारों से यह कहते सुने गए कि “मैंने आप सबको पहचान लिया है, अब मैं किसी को अंदर नहीं आने दूंगा।” नीलू व्यास ने सवाल उठाया कि क्या एक धार्मिक व सार्वजनिक ट्रस्ट में इस प्रकार की सैन्य शैली और गोपनीयता का रवैया अपनाया जाना चाहिए, या फिर इसका मकसद मीडिया और स्वतंत्र आवाजों को दूर रखना है?

बैकग्राउंड: 40 दिनों में 70 बार चोरी और ₹46 लाख की बरामदगी
चर्चा के केंद्र में राम मंदिर ट्रस्ट में हाल ही में सामने आया चढ़ावा और चंदा चोरी का गंभीर मामला रहा:

सीसीटीवी फुटेज का खुलासा: जांच के दौरान मिले मात्र 40 दिनों के सीसीटीवी फुटेज में 70 बार चढ़ावा चोरी होने का रिकॉर्ड सामने आया था।

बरामदगी और गिरफ्तारियां: मामले में लगभग 46 लाख रुपये बरामद किए गए और 8 निचले स्तर के कर्मचारियों/कामगारों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

एसआईटी और बड़े चेहरों की भूमिका: मामले में एसआईटी (SIT) गठित हुई, अंतरिम रिपोर्ट आई और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। हालांकि, पैनलिस्टों का आरोप है कि ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों (जैसे चंपत राय व अन्य) पर कोई आंच नहीं आई और उन्हें एक तरह से क्लीन चिट मिल गई।

वरिष्ठ पत्रकार सुमन गुप्ता (अयोध्या) का विश्लेषण: 'यह केवल ढंकने और पानी डालने का काम है'
अयोध्या से चर्चा में शामिल वरिष्ठ पत्रकार सुमन गुप्ता ने इस नियुक्ति के जमीनी प्रभाव को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा:

व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं: किसी रिटायर्ड एयर मार्शल के आ जाने से ट्रस्ट के बुनियादी ढांचे में कोई क्रांति नहीं आने वाली। ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पहले जैसी ही रहेगी।

कुर्सियों की अदला-बदली: ट्रस्ट के भीतर केवल पदों का पुनर्गठन हुआ है। पहले कोषाध्यक्ष रहे गोविंद देव गिरि अब महासचिव की भूमिका में हैं, जबकि नए ट्रस्टी भी शामिल किए गए हैं। नीतिगत नियंत्रण आज भी उन्हीं लोगों और उसी संगठन (आरएसएस/विहिप) के हाथों में है, जो शुरुआत से काबिज हैं।

चुनावी टाइमिंग: उत्तर प्रदेश में निकट भविष्य में होने वाले चुनावों को देखते हुए इस विवाद पर चादर डालना सरकार और ट्रस्ट दोनों के लिए जरूरी था, ताकि विपक्ष इसे चुनावी मुद्दा न बना सके।

छोटे मुजरिम जेल में, बड़े महफूज: जिन 8 लोगों को पकड़ा गया, वे मामूली मोहरे हैं। वे भी कुछ महीनों में जमानत पर बाहर आ जाएंगे और सबूतों के अभाव में मामला ठंडा पड़ जाएगा।

कांग्रेस प्रवक्ता आयुष्मान पांडे के आरोप: 'सशस्त्र बलों का राजनीतिकरण और अकाउंटेबिलिटी से भागना'
कांग्रेस कार्यकर्ता और राजनीतिक विश्लेषक आयुष्मान पांडे ने केंद्र सरकार और ट्रस्ट पर अत्यंत कड़े प्रहार किए:

'सांप निकल गया, अब लकीर पीट रहे हैं': पांडे ने कहा कि जब करोड़ों रुपये का खेल हो गया और चंदा-चढ़ावा चोरी का भंडाफोड़ हो गया, तब एक पूर्व सैन्य अधिकारी को आगे कर दिया गया ताकि जनता का ध्यान मूल भ्रष्टाचार से भटकाया जा सके।

सैनिक पृष्ठभूमि को ढाल बनाना: सरकार की यह पुरानी रणनीति रही है कि जब भी किसी संस्थान पर भ्रष्टाचार या अक्षमता के आरोप लगते हैं (जैसे नीट पेपर लीक में आर्मी चॉपर्स की बात या बाढ़ प्रबंधन में सेना को आगे करना), तो रक्षा बलों के सम्मान को ढाल बना दिया जाता है। यदि विपक्ष अब ट्रस्ट के फैसलों पर सवाल उठाएगा, तो सत्ता पक्ष इसे 'सेना के पूर्व अधिकारी का अपमान' बताकर राष्ट्रवाद से जोड़ देगा।

सैनिक स्कूलों का हवाला: उन्होंने दावा किया कि देश के लगभग 60% सैनिक स्कूलों का नियंत्रण संघ से जुड़े संगठनों को सौंपा जा रहा है, जो देश के सैन्य व लोकतांत्रिक ढांचे के लिए घातक है।

सबसे बड़ा सवाल; क्या होगा ऑडिट का अधिकार? पांडे ने पूछा कि क्या नए सीईओ जितेंद्र मिश्रा को पिछले 40 दिनों या पिछले 4 वर्षों में हुए वित्तीय घोटालों का स्वतंत्र 'ऑडिट' करने का अधिकार दिया गया है? यदि उनके पास पुराने वित्तीय लेन-देन की जांच का अधिकार ही नहीं है, तो 'चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर' जैसे भारी-भरकम पद का कोई औचित्य नहीं है। यह सिर्फ जनता की आंखों में धूल झोंकने वाला "गुजरात मॉडल" है।

निष्कर्ष: क्या तय होगी वास्तविक जवाबदेही?
डिबेट के समापन पर एंकर नीलू व्यास ने रेखांकित किया कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में 'अकाउंटेबिलिटी' (जवाबदेही) सबसे महत्वपूर्ण होती है।

राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और उनके द्वारा दिए गए दान से जुड़ा विषय है। ऐसे में सवाल बना रहेगा कि क्या पूर्व एयर मार्शल की तैनाती से ट्रस्ट के कामकाज में वास्तव में पारदर्शिता आएगी और चढ़ावा चोरी के असली गुनहगार बेनकाब होंगे, या फिर यह विवाद भी प्रशासनिक फेरबदल और सैन्य वर्दी के सम्मान की आड़ में समय के साथ फाइलों में दफन हो जाएगा।


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