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स्वतंत्र भारद्वाज अरेस्ट: चिराग पासवान ने झाड़ा पल्ला, अब BJP क्या करेगी?

नीशू आज़ाद केस में स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी पर 'द फ़ेडरल देश' के शो 'निष्पक्ष' में बड़ी चर्चा। एंकर नीलू व्यास के साथ देखें पूरी इनसाइड रिपोर्ट।


Nishpaksh: दलित छात्रा नीशू आज़ाद के पिता संजय आज़ाद पर हुए जानलेवा हमले के मुख्य आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद राष्ट्रीय राजधानी से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल तेज हो गई है। अदालत द्वारा आरोपी को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेजे जाने के तुरंत बाद पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर हिंदू रक्षा दल से जुड़े कार्यकर्ताओं ने उसकी रिहाई की मांग को लेकर जमकर प्रदर्शन किया।


डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'द फ़ेडरल देश' के प्रमुख डिबेट शो 'निष्पक्ष' में वरिष्ठ पत्रकार व एंकर नीलू व्यास ने वरिष्ठ पत्रकार टी. के. राजलक्ष्मी और राजनीतिक विश्लेषक आयुष्मान पांडे के साथ इस पूरे घटनाक्रम, आरोपी के राजनीतिक रसूख और इसके चलते भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सामने खड़ी सियासी दुविधा की गहन पड़ताल की।

सोशल मीडिया का 'पोस्टर बॉय' और सत्ता के गलियारों तक पहुंच
शो 'निष्पक्ष' में चर्चा के दौरान यह रेखांकित किया गया कि स्वतंत्र भारद्वाज खुद को सोशल मीडिया पर 'सनातन हीरो' और 'गौ रक्षक' के रूप में पेश करता रहा है। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर उसके लाखों फॉलोअर्स हैं:

वीआईपी कार्यक्रमों में मौजूदगी: एंकर नीलू व्यास ने सवाल उठाया कि आरोपी वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह और 15 अगस्त को लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में भी मौजूद रहा था।

नेताओं संग तस्वीरें: सोशल मीडिया पर सत्ता पक्ष के बड़े नेताओं के साथ उसके वीडियो और तस्वीरें लगातार वायरल हैं। ऐसे में यह गंभीर सवाल खड़ा होता है कि क्या ऐसे तत्वों को लंबे समय से राजनीतिक संरक्षण मिलता रहा है।

चिराग पासवान ने बनाई दूरी, बाकी नेताओं की खामोशी पर सवाल
इस पूरे मामले में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बेहद कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है:

हिंसा की कड़ी निंदा
: चिराग पासवान ने दो टूक कहा कि उनका या उनकी पार्टी (LJPR) का इस आरोपी से कोई संबंध नहीं है और उन्होंने इस हिंसक कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा की।

भाजपा की असहजता: डिबेट में विश्लेषकों ने सवाल उठाया कि भाजपा के अन्य प्रमुख नेताओं ने इस मामले पर चुप्पी क्यों साध रखी है। हिंदू रक्षा दल जैसे समूहों के थाने के बाहर विरोध में उतरने से सत्ता पक्ष के सामने यह असहज स्थिति बन गई है कि वह अपने कोर समर्थक वर्ग और कानूनी निष्पक्षता के बीच क्या रुख अपनाए।

विपक्ष का दबाव और दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर सवाल
लगभग दो महीने पुराने इस मामले में दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली लगातार सवालों के घेरे में रही है:

वायरल वीडियो से गरमाया माहौल: मामला तब और तूल पकड़ गया जब आरोपी का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह खुलेआम धारा 307 (हत्या के प्रयास) का मजाक उड़ाते हुए कानून से बेखौफ नजर आ रहा था।

दलित उत्पीड़न और जवाबदेही: विपक्ष ने इस घटना को सीधे तौर पर दलित उत्पीड़न और केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन दिल्ली पुलिस की प्रशासनिक विफलता करार दिया।

जन आक्रोश के बाद एक्शन: 'निष्पक्ष' में विश्लेषकों ने माना कि सोशल मीडिया पर जनता के आक्रोश और राजनीतिक दबाव के चलते ही पुलिस को यह कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा है।


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