मोदी के मंत्रियों की इंस्टा पर फॉलोइंग बढ़ने का क्या है सच?
'निष्पक्ष' में नीलू व्यास संग प्रोफेसर अजय गुडावर्थी और आयुष्मान पांडे का विश्लेषण: क्या मोदी के मंत्रियों के इंस्टा पर लोकप्रियता बढ़ने का सच?
Nishpaksh: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 जुलाई 2026 को कैबिनेट बैठक में मंत्रियों से इंस्टाग्राम पर ज्यादा सक्रिय होने, रील बनाने व युवाओं से संवाद करने को कहा था। इसके बाद 24 अगस्त तक 29 में से 28 यानी 97% कैबिनेट मंत्रियों की इंस्टाग्राम एक्टिविटी बढ़ी है। ऐसा दैनिक भास्कर की रिपोर्ट कहती है कि इसके बाद मोदी के मंत्रियों की न सिर्फ सक्रियता बढ़ी बल्कि उनकी लोकप्रियता भी बढ़ी है। इनमें सबसे पहला नंबर गृहमंत्री अमित शाह का है जिनके बारे में कहा जा रहा है कि 8.53 लाख फॉलोअर्स बढ़े हैं। इसके अलावा एस जयशंकर, सीआरपाटिल और प्रल्हाद जोशी हैं। लेकिन जमीन पर हालात एकदम अलग है। बीजेपी के खिलाफ माहौल है लेकिन अचानाक से बीजेपी के मंत्रियों की फॉलोइंग बढ़ी है। क्या ये फॉलोइंग असलियत में बढ़ रही है या फिर इसके पीछे असली सच क्या है?
'बीजेपी का तरीका पुराना'
प्रोफेसर अजय गुडावर्थी ने कहा, "यह मोदी मॉडल है जो कि कुछ न कुछ नैरेटिव क्रिएट करने में लगा रहता है। मोदी जब 2014 सत्ता में आए थे तो अपने साथ नए नैरेटिव लाए थे। अब उन्हें फिर नए नैरेटिव चाहिए। लेकिन जेन-जी नैरेटिव से प्रभावित नहीं होता। उसे सच्चाई का शायद सबसे ज्यादा पता है। यह एक दिलचस्प है कि जो पीढ़ी हर वक्त सोशल मीडिया पर रहती है वो सरकार के नैरेटिव में यकीन नहीं करती लेकिन जो पीढ़ी सोशल मीडिया से दूरी बना कर चलती है उसे सत्ता के नैरेटिव पर पूरा विश्वास है।
"आरएसएस जेनजी को नहीं समझ पा रहा है"
राहुल गांधी जेन-जी से बेहतर संपर्क बना रहे हैं, इसलिए नहीं कि वो व्हाइट टीशर्ट पहनते हैं या नरेंद्र मोदी के मुकाबले ज्यादा जवान हैं बल्कि इसलिए कि वो कुछ मीनिगफुल मुद्दे उठा रहे हैं। तो पुराना - नैरेटिव गढ़ने का मॉडल जेनजी पर नहीं चलेगा। जेन जी अपना नैरेटिव खुद सेट कर रहे है। वो सरकार के हर नेरेटिव को क्रॉस चेक कर सकते हैं। वो बिल्कुल टू द प्वाइंट रहना चाहते हैं फिर जेन-जी के अंदर कास्ट, क्लास, का आकर्षण पिछली पीढ़ी के मुकाबले बहुत कम है। बीजेपी की तरह आरएसएस भी इस क्राइसिस को नहीं समझ पा रही है। वो पुराने तरीके अपना रहे हैं जो अब चलने वाले नहीं है।
"बीजेपी को सिर्फ नैरिटिव गढ़ना ही आता है"
वहीं आयुष्मान पांडे, (डॉ.मनमोहन सिंह फेलो-कांग्रेस ) ने कहा कि अधिनायकवाद में आपके पास कहने के लिए कुछ नहीं होता होता है तो ऐसे में प्रचार बहुत जरूरी हो जाता है। शीला दीक्षित ने दिल्ली में शानदार काम किए थे पर उन्होंने प्रचार करने की बात कभी नहीं सोची। लेकिन लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, काम करने पर भी सत्ता जा सकती है। हालांकि बीजेपी को लगता है कि नैरिटव, प्रचार के जरिए इसे रोका जा सकता है। इसलिए नैरिटिव खड़ा करने में लगी हुई है। दैनिक भास्कर जब कोई खबर पब्लिश करता है तो इसका मतलब होता है कि वो खबर नहीं है। इस तरह की न्यूज सभी बुरी खबरों को कवर करने के लिए लिखी जाती है। ये लोगों को मूर्ख बनाते हैं जो खबर की देने की है वो दी जाती है। अमित शाह राजनीतिक रूप से आधार देने की कोशिश हो रही है। अगर उन्हें सत्ता सौंपनी है तो मुझे लगता है ये एक कारण हो सकता है इस तरह के नैरेटिव का।

