
चित्रकूट: गैंगरेप पीड़िता ने की आत्महत्या, पुलिस पर अनदेखी का आरोप
चित्रकूट में दलित नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद खुदकुशी का मामला। ग्राम प्रधान के भतीजे पर आरोप। पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल।
Dalit Girl Suicide : उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में एक दलित नाबालिग लड़की की आत्महत्या ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ था। न्याय न मिलने से आहत होकर उसने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। यह दुखद घटना पहाड़ी थाना क्षेत्र के एक गांव की है। पीड़िता के परिजनों का कहना है कि पुलिस ने शिकायत पर समय रहते कार्रवाई नहीं की। इस मामले में ग्राम प्रधान के भतीजे और उसके दो साथियों पर आरोप लगे हैं। किशोरी इंटर कॉलेज में 11वीं की छात्रा थी। मंगलवार शाम उसने सूने घर में फंदा लगाकर जान दे दी। अब पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। हालांकि अब तक इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
होली के दिन हुई थी वारदात
मृतक किशोरी के पिता ने पुलिस को आपबीती सुनाई है। उनके अनुसार घटना होली के दिन यानी चार मार्च की है। किशोरी घर के पास लगे हैंडपंप से पानी भरने गई थी। वहां प्रधान के भतीजे और दो अन्य युवकों ने उसे दबोच लिया। वे उसे जबरन खेत में ले गए और सामूहिक दुष्कर्म किया। काफी देर तक बेटी के घर न लौटने पर पिता उसे ढूंढने निकले। इसी बीच पीड़िता का भाई भी वहां पहुंच गया। भाई को देखकर तीनों आरोपी मौके से भाग निकले। परिजनों का आरोप है कि उसी शाम वे थाने पहुंचे थे। लेकिन पुलिस ने बदनामी का डर दिखाकर रिपोर्ट दर्ज नहीं की।
पुलिस पर लापरवाही के गंभीर आरोप
परिजनों का दावा है कि वे पांच और छह मार्च को भी थाने गए। पुलिस ने कथित तौर पर दुष्कर्म की बात छिपाने का दबाव बनाया। इसके बदले रंग लगाने के विवाद की लिखित तहरीर ली गई। परिजनों का आरोप है कि आरोपियों को पकड़कर छोड़ दिया गया। इसके बाद आरोपी पक्ष पीड़ित परिवार को लगातार धमका रहा था। पीड़िता इस घटना के बाद से गहरे मानसिक तनाव में थी। वह डर के मारे घर से भी बाहर नहीं निकलती थी। परिजनों ने हल्का इंचार्ज पर भी मदद न करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि तबीयत खराब होने पर भी पुलिस ने कोई संज्ञान नहीं लिया।
राजनीतिक सरगर्मी और पुलिस का पक्ष
इस मामले ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्विटर पर भाजपा सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि न्याय न मिलने के कारण दलित बेटी ने जान दे दी। बसपा ने भी सरकार के महिला सुरक्षा के दावों पर सवाल उठाए हैं। वहीं पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह का कहना है कि मामले की जांच जारी है। उन्होंने बताया कि पहले परिजनों ने विवाद की बात कही थी। अब नए आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है। यदि कोई पुलिसकर्मी दोषी पाया गया तो उस पर सख्त कार्रवाई होगी। किशोरी के शव का पोस्टमार्टम दो डॉक्टरों के पैनल ने किया है। इलाके में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया है।
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