
युद्ध की आग में झुलसी गरीब की थाली: अटल कैंटीन में रोटियों पर लगा 'कट'
थाली से छिनी रोटी: मिडिल ईस्ट की जंग ने दिल्ली की 'अटल कैंटीन' में बढ़ाई मुसीबत; 4 की जगह मिल रही सिर्फ 2 रोटी, गैस संकट से स्टाफ और जनता के बीच भारी तनाव।
Gas Crisis Impact On Atal Canteen : मिडिल ईस्ट में छिड़े युद्ध की चिंगारी अब दिल्ली के आम आदमी की रसोई तक जा पहुंची है। वैश्विक स्तर पर जारी तनाव के कारण भारत में LPG गैस की किल्लत महसूस की जा रही है। सरकार ने घरों में चूल्हे जलते रखने के लिए कमर्शियल गैस की सप्लाई पर कड़ा पहरा लगा दिया है। इस बड़े फैसले का सीधा और कड़वा असर दिल्ली की 'अटल कैंटीन' पर भी दिखने लगा है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की याद में शुरू हुई इन कैंटीनों का मकसद गरीबों को मात्र 5 रुपये में सम्मानजनक भोजन देना था। लेकिन अब गैस संकट ने ऐसी कुछ कैंटीनों के मेन्यू को छोटा कर दिया है। जहाँ पहले थाली में भरपेट रोटियां मिलती थीं, वहीं अब रोटियों की संख्या आधी कर दी गई है। द फेडरल देश की पड़ताल में जो सामने आया वो इस रिपोर्ट के माध्यम से आपके सामने रखा जा रहा है।
तिमारपुर में मचा घमासान: 4 की जगह मिल रही सिर्फ 2 रोटी
द फेडरल देश की टीम जब तिमारपुर के संजय झुग्गी क्लस्टर स्थित अटल कैंटीन पहुंची, तो वहां का नजारा हैरान करने वाला था। कैंटीन में काम करने वाली महिला स्टाफ रीता वर्मा ने रुआंसे गले से अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि पिछले एक हफ्ते से गैस की कमी ने सब कुछ बदल दिया है। पहले यहाँ रोजाना 400 रोटियों के दो बड़े बक्से आते थे। अब सप्लाई घटकर सिर्फ 200 रोटी यानी एक बक्से पर सिमट गई है। स्टाफ के मुताबिक, "हम मजबूर हैं, पहले एक थाली में 4 रोटियां देते थे, लेकिन अब सिर्फ 2 रोटियां ही परोस पा रहे हैं।" दूसरी महिला स्टाफ लक्ष्मी का कहना है कि दाल, सब्जी, चावल की मात्रा पहले जितनी ही है, बस रोटी कम कर दी गयी है, जिसकी वजह से यहाँ लोगों का गुस्सा झेलना पड़ता है।
गुस्से में जनता: स्टाफ को मिल रही धमकियां और कांच टूटे
पेट की भूख जब अधूरी रह जाती है, तो गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच जाता है। कैंटीन स्टाफ ने बताया कि रोटी कम होने की वजह से लोग उनसे झगड़ा कर रहे हैं। लोगों को लगता है कि स्टाफ जानबूझकर खाना छिपा रहा है। विवाद इतना बढ़ गया कि कुछ असामाजिक तत्वों ने कैंटीन की खिड़की का कांच तक तोड़ दिया। महिला कर्मचारियों को सरेआम धमकियां दी जा रही हैं कि ड्यूटी खत्म होने के बाद उन्हें बाहर देख लिया जाएगा। यह स्थिति वेंडर्स द्वारा गैस की कमी के कारण खाना कम भेजने की वजह से पैदा हुई है।
नेहरू नगर में फिलहाल राहत, वेंडर का खेल निराला
हैरानी की बात यह है कि दिल्ली के ही नेहरू नगर स्थित अटल कैंटीन में स्थिति इसके उलट है। यहाँ खाना खाने आए लोगों को पूरी डाइट मिल रही है। स्टाफ आशीष मिश्रा ने बताया कि उनके यहाँ 11 से 2 बजे के बीच खाना बंटता है और सप्लाई में कोई कमी नहीं है। यहाँ अब भी दाल, चावल और सब्जी के साथ 4 रोटियां दी जा रही हैं। जानकारों का मानना है कि अलग-अलग वेंडर्स होने के कारण कुछ इलाकों में सप्लाई मैनेज हो पा रही है, जबकि कुछ इलाके पूरी तरह ठप हैं।
5 रुपये की थाली का पूरा गणित
अटल कैंटीन में मिलने वाली 5 रुपये की थाली का वजन मानक के अनुसार 600 ग्राम तय किया गया है। इसमें सवा सौ ग्राम के अनुपात में दाल, चावल और सब्जी शामिल होती है। नियमतः तीन रोटियां सवा सौ ग्राम की होती हैं, लेकिन मानवीय आधार पर अब तक 4 रोटियां दी जाती थीं। अब गैस के संकट ने इस पूरे गणित को बिगाड़ दिया है। जनता का कहना है कि रोटी कम होने के साथ-साथ दाल की क्वालिटी भी पतली हो गई है और थाली से अचार भी गायब है।
जनता की राय और शिकायतें
कैंटीन में भोजन करने वाले लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया है। कुछ महिलाओं ने शिकायत की कि दाल बहुत पतली दी जा रही है और थाली का हिस्सा होने के बावजूद अचार नहीं मिलता। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि 5 रुपये में खाना ठीक है, भले ही रोटियों की संख्या में फिलहाल कमी आई हो।
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