
अवैध संपत्तियों पर हंटर; मालवीय नगर अग्निकांड के बाद जागी सरकार
21 मृतकों में 12 विदेशी नागरिक; मालिक लवकेश बजाज गिरफ्तार, घटना की मजिस्ट्रेट जांच शुरू। दिल्ली सरकार चलाएगी अवैध गेस्ट हाउस और कॉम्प्लेक्स के खिलाफ मुहिम।
Malviya Nagar Fire Incident: मालवीय नगर के हौज रानी इलाके में स्थित एक होटल में हुए भीषण और दर्दनाक अग्निकांड के बाद चौतरफा घिरी दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने इस पूरी त्रासदी को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए पूरी दिल्ली में अवैध संपत्तियों, विशेष रूप से बिना अनुमति (अनधिकृत) चल रहे गेस्ट हाउस और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के खिलाफ एक बड़े शहर-व्यापी क्रैकडाउन का एलान किया है.
दिल्ली मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, फायर सेफ्टी नियमों और बिल्डिंग बाय-लॉज का खुला उल्लंघन कर चल रहे ऐसे सभी अवैध परिसरों को तुरंत प्रभाव से सील किया जाएगा और उनके मालिकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इसके साथ ही, इस पूरी घटना के पीछे रही प्रशासनिक कमियों और लापरवाहियों की जांच के लिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए गए हैं, ताकि जवाबदेही तय की जा सके. इस मामले में मुख्य आरोपी और संपत्ति के मालिक लवकेश बजाज के खिलाफ पहले ही आपराधिक एफआईआर दर्ज की जा चुकी है.
इमारत का ग्राउंड, फर्स्ट और सेकंड फ्लोर बना 'डेथ ट्रैप'; बेसमेंट से लेकर पांचवीं मंजिल तक मची तबाही
आधिकारिक जांच रिपोर्ट के मुताबिक, यह हादसा हौज रानी, मालवीय नगर स्थित इमारत नंबर 259, सी-2, होटल 'फ्लरिश स्टेज' (Hotel Flourish Stays) में पेश आया.
आग का फैलाव: यह पूरी इमारत बेसमेंट, ग्राउंड और पांच मंजिला (B+G+5 Floors) ढांचे पर खड़ी थी. आग की मुख्य लपटें इमारत के ग्राउंड, फर्स्ट और सेकंड फ्लोर पर फैली थीं, जबकि बाकी की मंजिलों पर भीषण गर्मी और जहरीले धुएं (Heat and Smoke) ने तबाही मचाई, जिसके चलते लोग अचेत हो गए.
घायलों और डिस्चार्ज का आंकड़ा: हादसे के बाद कुल 49 लोगों को इलाज के लिए अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया था. इनमें से 21 गंभीर रूप से झुलसे लोगों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया है. राहत की बात यह है कि 8 घायलों को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी (Discharge) दे दी गई है, जबकि 26 गैर-घातक (Non-Fatal) रूप से घायल मरीजों का इलाज अभी जारी है.
मृतकों में 12 विदेशी नागरिक; एम्स और मैक्स अस्पताल से आई मृतकों व घायलों की आधिकारिक सूची
इस हादसे का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय पहलू यह है कि मरने वाले 21 लोगों में 12 विदेशी नागरिक शामिल हैं, जो पास के बड़े अस्पतालों में इलाज के सिलसिले में दिल्ली आए हुए थे. उनके अलावा 9 भारतीय नागरिकों की भी इस आग में जलने से मौत हुई है.
अस्पतालों से जारी आधिकारिक सूची के अनुसार मृतकों और घायलों की स्थिति इस प्रकार है:
मृतकों के सूची
रोलैंड: उम्र 40 वर्ष, महिला (लाइबेरिया)
शशिकांबाचिल : उम्र 40 वर्ष (मोजाम्बिक)
श्रुतिका बरनवाल
तर्जनी अग्रवाल
वर्या अग्रवाल @ पर्ल
झावेरी अग्रवाल
विवेक अग्रवाल
अशोक अग्रवाल
कमला अग्रवाल
प्रेम लता अग्रवाल
जिविषा अग्रवाल
(इसके अलावा 13 अन्य अज्ञात शव शामिल हैं)
अस्पतालों में भर्ती घायलों की स्थिति (कुल 26 घायल):
मैक्स साकेत (20 मरीज): यहाँ सबसे ज्यादा 20 घायलों का इलाज चल रहा है, जिनमें इब्राहिम (62 वर्ष), बांग्लादेश से रोमन हबीब (20 वर्ष), उम्मा सल्मा (51 वर्ष), विशाल कुमार (29 वर्ष), होसियन मोशारूल (40 वर्ष), रोहित मुखिया (25 वर्ष), उबा (32 वर्ष), मोहम्मद वारसाम (31 वर्ष), जांको जिब्रिन (75 वर्ष), इख्तियार ताश्तियाएव (46 वर्ष) और शखीदा (44 वर्ष) शामिल हैं.
एम्स ट्रामा सेंटर (3 मरीज): मोहम्मद साहिदुल इस्लाम (48 वर्ष), मिस आरमीन जमान (25 वर्ष) और रियाना (43 वर्ष).
सफदरजंग अस्पताल (1 मरीज): यहाँ के बर्न वार्ड के आईसीयू (ICU) में एक अज्ञात विदेशी नागरिक को गंभीर हालत में भर्ती कराया गया है.
पंडित मदन मोहन मालवीय अस्पताल (2 मरीज): यहाँ 2 घायलों का उपचार जारी है.
गृह मंत्री आशीष सूद ने किया मौके का मुआयना; राहत कार्य के चलते नहीं पहुंचीं CM रेखा गुप्ता
हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया. उन्होंने मौके पर कहा कि अधिकारी इस बात की कड़ाई से जांच कर रहे हैं कि क्या इस इमारत के पास दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) से वैध अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) था, और क्या बेसमेंट व अन्य हिस्सों में रेस्टोरेंट व लॉजिंग चलाने के लिए आवश्यक अनुमतियां ली गई थीं. गृह मंत्री ने दक्षिण दिल्ली के जिलाधिकारी (DM) की देखरेख में एमसीडी, डीएफएस, बिजली और जल विभागों सहित सभी संबंधित एजेंसियों को तत्काल पूरे क्षेत्र में सघन निरीक्षण करने के निर्देश जारी किए हैं.
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता खुद मौके पर नहीं पहुंचीं. मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों का मानना है कि ग्राउंड ज़ीरो पर वीआईपी मूवमेंट के कारण स्थानीय दमकल, पुलिस और डॉक्टरों के राहत एवं बचाव कार्य में कोई बाधा न आए, इसी संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए उन्होंने वहां न जाने का फैसला किया.
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