दिल्ली सरकार का दावा: प्राइवेट स्कूल अब आसानी से नहीं बढ़ा सकेंगे फीस
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दिल्ली सरकार का दावा: प्राइवेट स्कूल अब आसानी से नहीं बढ़ा सकेंगे फीस

दिल्ली सरकार का दावा है कि स्कूल शिक्षा अधिनियम 2025 के तहत अब 18 शर्तों को पूरा करने और SLFRC बनाने पर ही बढ़ेगी प्राइवेट स्कूलों की फीस।


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Delhi Private Schools: दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी पर लगाम कसने के लिए दिल्ली सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने साफ कर दिया है कि अब कोई भी निजी स्कूल आसानी से अपनी फीस में बढ़ोतरी नहीं कर सकेगा। सरकार ने फीस निर्धारण की पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।



शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से 2028-29 तक के लिए फीस तय करने की प्रक्रिया में अब स्कूल अपनी मनमानी नहीं चला सकेंगे। दिल्ली सरकार का दावा है कि 'दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025' के लागू होने से अब फीस बढ़ाने के हर प्रस्ताव को 18 कड़े पैमानों (मानकों) की कसौटी पर खरा उतरना होगा। इसके साथ ही स्कूलों को अभिभावकों को भी यह भरोसा दिलाना होगा कि यह बढ़ोतरी वाकई जरूरी है।

हर स्कूल में बनेगी SLFRC कमेटी, 15 जुलाई की डेडलाइन
दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, अब फीस तय करने की व्यवस्था को पूरी तरह लोकतांत्रिक और पारदर्शी बनाया जा रहा है:

स्कूल स्तर पर बनेगी समिति: सरकार के नियमों के तहत अब दिल्ली के हर प्राइवेट स्कूल में 'स्कूल स्तर शुल्क विनियमन समिति' (School Level Fee Regulation Committee - SLFRC) का गठन किया जाना अनिवार्य कर दिया गया है।

अभिभावकों की सहमति जरूरी:
सरकार का दावा है कि इस समिति में अभिभावकों (माता-पिता) की भागीदारी और उनकी सहमति को अनिवार्य किया गया है, ताकि फीस बढ़ोतरी की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष रहे और स्कूलों की मनमानी को रोका जा सके।

सख्त कार्रवाई की चेतावनी: दिल्ली सरकार ने सभी निजी गैर-सहायता प्राप्त (Unaided) स्कूलों को सख्त निर्देश दिया है कि वे 15 जुलाई 2026 तक हर हाल में अपनी SLFRC कमेटी का गठन कर लें। तय समय सीमा के भीतर नियमों का पालन न करने वाले स्कूलों के खिलाफ सरकार द्वारा कड़ी कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा मंत्री आशीष सूद का बयान:

"दिल्ली सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को किफायती और सुलभ बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। शिक्षा समाज के लिए एक पवित्र सेवा है, न कि कोई व्यावसायिक उद्यम (बिजनेस)।"

इन 18 शर्तों को साबित करना होगा अनिवार्य
दिल्ली सरकार का दावा है कि प्राइवेट स्कूलों को अगर फीस बढ़ानी है, तो उन्हें एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर समिति के सामने रखना होगा। इस प्रस्ताव में सरकार द्वारा निर्धारित 18 मानकों के आधार पर यह साबित करना होगा कि फीस बढ़ाना सीधे तौर पर स्कूल में किए जा रहे सुधारों और छात्र सुविधाओं से जुड़ा हुआ है। इन मुख्य मानकों में शामिल हैं:

बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का विकास: स्कूल परिसर, क्लासरूम और लैब्स में किए जाने वाले नए सुधार।

ट्रांसपोर्ट की सुविधाएं: छात्रों के आने-जाने के लिए बसों और वाहनों की आधुनिक व सुरक्षित व्यवस्था।

स्कूल इमारत (Building): स्कूल की बिल्डिंग का रखरखाव और नया निर्माण कार्य।

सुरक्षा उपाय: बच्चों की सुरक्षा के लिए लगाए गए सीसीटीवी (CCTV) कैमरे, गार्ड्स और अन्य जरूरी इंतजाम।

लाइट और वेंटिलेशन व्यवस्था: कक्षाओं और परिसर के भीतर उचित बिजली और लाइटिंग की व्यवस्था।

कर्मचारियों की भर्ती: योग्य शिक्षकों व स्टाफ की नई नियुक्तियां और उन पर होने वाला वास्तविक खर्च।

सरकार के इस नए कदम से दिल्ली के लाखों अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अब प्राइवेट स्कूल मनमाने ढंग से कागजी खर्च दिखाकर अभिभावकों पर फीस का अतिरिक्त बोझ नहीं डाल सकेंगे।


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