
दंपति ने वॉशरूम में गले लगकर तोड़ा दम; दरवाजा तोड़ते ही कांप गए मददगार
आग से नहीं, जहरीले धुएं से घुटा होटल 'फ्लरिश स्टे' में फंसे दंपति का दम; रेस्क्यू करने उतरे स्थानीय लोगों ने बयां किया ग्राउंड ज़ीरो का खौफनाक मंजर। मदद की आस में घुट घुट कर तोड़ा दम।
Malviya Nagar Fire Incident: मालवीय नगर के 'फ्लरिश स्टे बीएंडबी' होटल में बुधवार सुबह हुए भीषण अग्निकांड में जहां एक तरफ प्रशासनिक लापरवाही की परतें खुल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ इस हादसे के भीतर से रूह कंपा देने वाली ऐसी कहानियां सामने आ रही हैं जिन्हें सुनकर किसी का भी कलेजा फट जाए.
मदद के लिए सबसे पहले आगे आने वाले स्थानीय जांबाज मोहम्मद शोएब ने ग्राउंड ज़ीरो का एक ऐसा ही दर्दनाक वाकया बयां किया. शोएब ने बताया कि जब वे राहत कार्य के लिए ग्राउंड फ्लोर पर पहुंचे, तो वहां अंदर से लॉक एक वॉशरूम दिखाई दिया. जब दरवाजा तोड़ा गया, तो भीतर एक कपल (जोड़ा) एक-दूसरे को गले लगाए हुए मृत पाया गया.
रेस्क्यू करने वाले स्थानीय निवासी मोहम्मद शोएब ने बताया कि "वे आग से नहीं जले थे, बल्कि जहरीले धुएं के कारण उनका दम घुट गया था. महिला टॉयलेट सीट पर बैठी थी और बगल में कुर्सी पर बैठा शख्स उसे कसकर अपनी बाहों में जकड़े हुए था. ऐसा लग रहा था कि आग और धुएं से बचने के लिए उन्होंने खुद को वॉशरूम में बंद कर लिया था और आखिरी वक्त तक एक-दूसरे को थामे रखा. बाहर निकलने के बाद उनके शरीर धुएं से काले पड़ चुके थे. हमने उन्हें सीपीआर (CPR) देकर सांसें लौटाने की कोशिश भी की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी."
बिस्तर के कोने पर ही जलकर कोयला हो गया दूसरा कपल; बेसमेंट में मिलीं 8 लाशें
होटल के भीतर का मंजर किसी डरावनी फिल्म से कम नहीं था. मैक्स अस्पताल में हेल्थकेयर वर्कर के रूप में काम करने वाले और रेस्क्यू में जुटे अशरफ खान ने बताया कि एक अन्य कमरे में तो एक जोड़ा बिस्तर के कोने पर बैठे-बैठे ही जिंदा जलकर कोयला हो चुका था.
अशरफ ने बताया, "हम लोग शटर काटकर बेसमेंट के रास्ते होटल के भीतर दाखिल हुए थे. अंदर घुसते ही रिसेप्शन के पास एक लड़की की पूरी तरह झुलसी हुई लाश मिली, जिसकी उम्र 20 से 25 साल के बीच रही होगी और प्रताड़ना के कारण उसके हाथ-पैर अकड़ चुके थे. उससे कुछ ही दूरी पर व्हीलचेयर पर बैठे एक शख्स का शव मिला, जो पूरी तरह जल चुका था. थोड़ा आगे बढ़ने पर तीन विदेशी नागरिक बेहोश मिले, जिन्हें हमने तुरंत सीपीआर दिया." प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग का सबसे ज्यादा असर बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर ही था. अकेले बेसमेंट से ही करीब 8 लोगों के शव पूरी तरह झुलसी हुई हालत में निकाले गए.
न दमकल का इंतजार, न सुरक्षा उपकरण; नंगे पैर कांच और सुलगते फर्श पर दौड़े जांबाज
जब बुधवार सुबह करीब 8:30 बजे शॉर्ट सर्किट के कारण बेसमेंट से आग भड़की, तो उस वक्त होटल में ठहरे ज्यादातर मेहमान सो रहे थे. आग पर काबू पाए जाने के तुरंत बाद स्थानीय युवाओं मोहम्मद शोएब, मोहम्मद अफजल खान, वसीम राजा, अशरफ खान और आमिर खान ने धुआं साफ होने का इंतजार भी नहीं किया और सीधे इमारत में कूद पड़े.
सुरक्षा उपकरणों की कमी: जांबाज अशरफ ने बताया कि न तो हमारे पास और न ही स्थानीय पुलिसकर्मियों के पास कोई सेफ्टी इक्विपमेंट (सुरक्षा उपकरण) थे.
पैरों में आए कट: जब वे दूसरी मंजिल पर पहुंचे तो पूरा होटल जहरीले धुएं से भरा था और भीषण गर्मी के कारण फर्श की टाइल्स उखड़ चुकी थीं. लोग बेडशीट के सहारे घायलों को उठाकर टूटे फर्श और कांच के टुकड़ों पर दौड़ रहे थे, जिससे उनके पैर तक कट गए थे.
भाग निकला मालिक लवकेश बजाज: एक तरफ जहां स्थानीय लोग जान पर खेलकर मेहमानों को निकाल रहे थे, वहीं होटल का मालिक लवकेश बजाज आग की लपटें देखकर डर के मारे अपनी कार से होटल के सामने से चुपचाप भाग निकला था, जिसे बाद में पुलिस ने गिरफ्तार किया.
इंसानियत के लिए गंवाए 2 लाख रुपये; गद्दे बिछाकर बचाई लोगों की जान
जहाँ एक तरफ इमारत के भीतर रेस्क्यू चल रहा था, वहीं बाहर खड़े आम लोग भी देवदूत बनकर सामने आए. होटल में कोई इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन निकास) नहीं था और सीढ़ियां भी बीच में होने के कारण ब्लॉक हो चुकी थीं. खिड़कियां पूरी तरह सील थीं और मुख्य दरवाजा सेंसर से चलता था.
ऐसे में स्थानीय लोगों ने बाहर से खिड़कियों के शीशे तोड़े और अंदर फंसे लोगों को नीचे कूदने के लिए हौसला दिया. इलाके के रहने वाले रियाजुद्दीन मंसूरी और उनके बेटे अरमान ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए तुरंत अपनी दुकान या गोदाम से निकालकर सड़क पर 20 से 22 गद्दे बिछा दिए. इस गद्दे के गद्देदार कुशन की वजह से खिड़कियों से कूदने वाले कई मेहमानों की जान सुरक्षित बच गई. इस राहत कार्य में रियाजुद्दीन को करीब 2 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन उन्होंने कहा कि इंसानियत के सामने इस नुकसान की कोई कीमत नहीं है.
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