
65 से ज्यादा मौतें, ट्रिप्ल इंजन सरकार; दिल्ली में फिर किसने रचा लाक्षागृह?
बीते 6 महीने में दिल्ली में आग की घटनाओं में 65 से ज्यादा लोगों की मौत। गृह मंत्रालय के अधीन पुलिस-MCD, केंद्र के पास DDA और दिल्ली में भी भाजपा; फिर किसकी शह पर 'ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट' लाइसेंस की आड़ में चल रहे मौत के होटल?
Malviya Nagar Fire Tragedy: दिल्ली देश की राजधानी है, यहाँ की पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है, डीडीए (DDA) केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय के अधीन आता है और एमसीडी (MCD) भी गृह मंत्रालय के अधीन आता है। इस समय दिल्ली में भाजपा की सरकार है, एमसीडी में भाजपा काबिज है और देश में तो है ही प्रधानमंत्री मोदी की सरकार। इन सबके बावजूद दिल्ली में सभी नियमों, सरकारों को धत्ता बताते हुए मनमाने ढंग से ऐसे लाक्षागृह चलाये जा रहे हैं, जिनके पास महज ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट का लाइसेंस है और वो शासन-प्रशासन की मिलीभगत से बजट होटल चला रहे हैं। न ही उनमें फायर सेफ्टी के इंतजाम हैं और न ही कोई और सुरक्षा व्यवस्था। पिछले 6 महीने की बात करें तो दिल्ली में हुई आग लगने की अलग-अलग घटनाओं में 65 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।
मालवीय नगर होटल अग्निकांड:
बुधवार सुबह मालवीय नगर के अवैध होटल से आ रही ताजा अपडेट्स ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है, जहां अब तक 21 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। प्रशासनिक सूत्रों और अस्पताल से मिल रही जानकारियों के मुताबिक, मलबे को हटाने और सघन चेकिंग का काम जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, मृतकों का यह खौफनाक आंकड़ा अभी और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। दमकल और आपदा प्रबंधन की टीमें ग्राउंड ज़ीरो पर लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। राहत की बात यह है कि दम घुटने और आग की लपटों के बीच फंसे 37 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है। पुलिस अब होटल के मालिकों और ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट लाइसेंस की आड़ में चल रहे इस अवैध खेल के पीछे जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की कड़ाई से जांच कर रही है।
पिछले 6 महीने की खौफनाक दास्तान: आग की घटनाओं में जा चुकी है 65 से ज्यादा मासूमों की जान
मालवीय नगर में हुई इस घटना के साथ अगर हम बीते छह महीने के आंकड़ों पर गौर करें तो वो रूह कंपा देने वाले हैं। पिछले 6 महीने के भीतर दिल्ली में आग लगने की अलग-अलग घटनाओं में 65 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। राजधानी में सुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही की यह कोई पहली कहानी नहीं है; पिछले कुछ महीनों में लगातार कई बड़े अग्निकांड हुए हैं, जिन्होंने पूरी दिल्ली को लाक्षाग्रह में तब्दील करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
18 मार्च (पालम अग्निकांड): पालम इलाके के रामफल चौक के पास एक पांच मंजिला इमारत में 18 मार्च को दिल दहला देने वाली आग लगी थी। इस हादसे ने एक ही परिवार को तबाह कर दिया, जिसमें 3 बच्चों समेत परिवार के 9 लोगों की मौत हो गई थी। इस बिल्डिंग में 22 लोगों का संयुक्त परिवार रहता था, जिनमें से खुशकिस्मती से 10-12 लोग उस समय गोवा घूमने गए हुए थे। आग इतनी भयावह थी कि उसे बुझाने के लिए दमकल की 30 से ज्यादा गाड़ियां लगानी पड़ी थीं।
3 मई (विवेक विहार हादसा): पिछले महीने की 3 तारीख को विवेक विहार के बी ब्लॉक में स्थित एक चार मंजिला इमारत के टॉप फ्लोर पर रात करीब 3 बजे अचानक आग भड़क उठी। इस हादसे में भी 9 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था, जबकि 12 से 14 लोगों को सुरक्षित निकाला गया था। आग बुझाने में दमकल की 14 गाड़ियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी। हालाँकि इस घटना में एसी में आग लगने के पीछे एसी में तकनिकी खराबी बताई गयी थी।
28 मई (हौज खास एसी ब्लास्ट): अभी कुछ दिन पहले 28 मई को हौज खास इलाके में एक घर के भीतर एयर कंडीशनर (AC) में ब्लास्ट होने से आग लग गई थी। इस दुर्घटना में 80 वर्षीय एक रिटायर्ड आईएएस (IAS) अधिकारी की दम घुटने और जलने से मौत हो गई थी, जबकि उनका बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया था।
दिल्ली फायर सर्विसेज़ (DFS) का सरकारी डेटा: मार्च महीने को पीछे छोड़ जून बना सबसे जानलेवा
न्यूज एजेंसी पीटीआई (PTI) द्वारा जारी दिल्ली फायर सर्विसेज़ के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मालवीय नगर हादसे से पहले (1 जनवरी से 27 मई तक) ही दिल्ली में आग से 45 लोगों की मौत हो चुकी थी।
महीनेवार मौतों का आंकड़ा: सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, जनवरी में 6, फरवरी में 6, मार्च में 15, अप्रैल में 5 और मई के शुरुआती 27 दिनों में 13 लोगों की मौत दर्ज की गई थी।
आंकड़ों के लिहाज से मार्च का महीना दिल्ली के लिए सबसे ज्यादा जानलेवा साबित हुआ था, जिसमें अकेले 15 मौतें हुईं थी। लेकिन जून की शुरुआत में ही हुए इस मालवीय नगर होटल अग्निकांड ने अब तक के सारे रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए पूरी दिल्ली को खौफ में डाल दिया है और यह साबित कर दिया है कि अफसरशाही की नाक के नीचे नियमों का खुलेआम मखौल उड़ाया जा रहा है।
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