
यमुना बाजार में बुलडोजर का खौफ: 310 घरों को खाली करने का नोटिस जारी
डीडीएमए ने यमुना बाजार के 310 घरों को 15 दिन में खाली करने का अल्टीमेटम दिया है। पीढ़ियों से रह रहे पुरोहितों और निवासियों में विस्थापन को लेकर गहरा आक्रोश है।
Yamuna Bazar DDMA Notice: दिल्ली के ऐतिहासिक यमुना बाजार इलाके में इन दिनों शांति की जगह डर और अनिश्चितता का माहौल है। यहां की आबोहवा में अब पूजा-पाठ के मंत्रों के साथ-साथ बुलडोजर की आहट सुनाई देने लगी है। डीडीएमए (DDMA) की ओर से जारी एक हालिया नोटिस ने यहां पीढ़ियों से रह रहे सैकड़ों परिवारों की रातों की नींद उड़ा दी है।
15 दिन की मोहलत और 310 घरों पर खतरा
प्रशासन की ओर से यमुना किनारे अलग-अलग घाटों पर स्थित लगभग 310 झुग्गियों और पक्के घरों को खाली करने का नोटिस चस्पा किया गया है। इस नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि निवासियों के पास जगह खाली करने के लिए केवल 15 दिनों का समय है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर लोग स्वयं यहां से नहीं जाते हैं, तो प्रशासन बलपूर्वक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई (बुलडोजर) शुरू कर देगा।
पीढ़ियों की बसावट और आजीविका का संकट
द फेडरल की टीम ने जब धरातल पर पहुंचकर लोगों से बात की, तो दशकों पुराना दर्द छलक उठा। यहां रहने वाले रामनाथ पहलवान जैसे बुजुर्ग, जिनकी उम्र 83 साल है, बताते हैं कि वे पिछले 70 वर्षों से इसी घाट पर रह रहे हैं। उनके अनुसार, यह जगह किसी की 'बपौती' नहीं है, बल्कि राजा-महाराजाओं के समय से यहां तीर्थ स्थान और पुरोहितों की बसावट रही है।
यहां रहने वाले लोगों की पूरी अर्थव्यवस्था यमुना और धार्मिक अनुष्ठानों पर टिकी है:
धार्मिक कार्य: यहां रहने वाले लोग पंडा, पुरोहित और नाई का काम करते हैं, जो हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार मृत्यु के बाद के संस्कार (नौवां, दसवां, बारहवां आदि) संपन्न कराते हैं।
व्यायाम और शिक्षा: यहां पुराने अखाड़े और व्यायामशालाएं हैं, जहां आज भी लोगों को तैराकी सिखाई जाती है।
फूल-माला का व्यापार: कई परिवार घाटों पर फूल और पूजा सामग्री बेचकर अपना गुजारा करते हैं।
सरकारी वादों पर उठाए सवाल
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि चुनाव के समय राजनीतिक दलों ने यमुना की सफाई और विकास के बड़े-बड़े वादे किए थे। नवीन जी, जो मंदिर में पुरोहित हैं, बताते हैं कि चुनाव जीतते ही मशीनें तो दिखाई गईं, लेकिन कुछ दिनों बाद सफाई का काम बंद हो गया। लोगों का कहना है कि "यमुना की गंदगी तो साफ नहीं हुई, लेकिन यहां रहने वाले इंसानों को साफ करने की तैयारी जरूर की जा रही है"।
बाढ़ की समस्या पर निवासियों का तर्क है कि वे वर्षों से बाढ़ देखते आए हैं। उनके अनुसार, बाढ़ प्राकृतिक है और दो-चार दिन में पानी उतर जाता है, लेकिन प्रशासन इसे आधार बनाकर उन्हें उजाड़ने की कोशिश कर रहा है।
सियासी घमासान और कानूनी लड़ाई की तैयारी
इस मुद्दे पर अब राजनीति भी गरमा गई है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस ने इस कार्रवाई का कड़ा विरोध करते हुए इसे ऐतिहासिक धरोहरों पर हमला बताया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव का तर्क है कि ये लोग अंग्रेजों के जमाने से यहां बसते आ रहे हैं और एनजीटी (NGT) के पुराने आदेशों का हवाला देकर उन्हें हटाना अनुचित है। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार नोटिस वापस नहीं लेती है, तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
क्या होगा आगे?
फिलहाल, यमुना बाजार के निवासियों में डर के साथ-साथ उम्मीद भी है। कुछ बुजुर्ग साधु-संतों को विश्वास है कि भगवान उनकी रक्षा करेंगे और पहले की तरह इस बार भी नोटिस रद्द हो जाएंगे। वहीं, कई युवा परिवार अब कानूनी विकल्प और विस्थापन की स्थिति में अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। 15 दिन की समय सीमा खत्म होने के बाद प्रशासन का अगला कदम क्या होगा, इस पर पूरे दिल्ली की निगाहें टिकी हैं।
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