गुलमर्ग रोपवे में तकनीकी खराबी, हवा में फंसे 300 पर्यटक
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गुलमर्ग रोपवे में तकनीकी खराबी, हवा में फंसे 300 पर्यटक

जम्मू कश्मीर के गुलमर्ग में भारी बारिश के बीच 500 फीट की ऊंचाई पर फंसे पर्यटकों को सेना और एसडीआरएफ ने सुरक्षित निकाला


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Gulmarg Gondola Crisis: जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गुलमर्ग से एक बेहद डराने वाली खबर सामने आई। दुनिया के तीसरे सबसे ऊंचे रोपवे गुलमर्ग गोंडोला में अचानक तकनीकी खराबी आ गई। इसके बाद हवा में लटके केबिनों में फंसे 300 से ज्यादा पर्यटकों को कड़े संघर्ष के बाद सुरक्षित निकला गया। रोपवे के कुल 65 केबिनों में सवार पर्यटक सोमवार दोपहर करीब 2.30 बजे से बीच हवा में ही फंसे हुए थे। इनमें से कुछ केबिन तो जमीन से करीब 500 फीट की भारी ऊंचाई पर लटके थे। एक केबिन में अधिकतम 6 लोगों के बैठने की क्षमता होती है। इस हादसे के बाद भारी बारिश के बीच सेना, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और स्थानीय पुलिस ने एक बड़ा जॉइंट रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। शाम करीब 8.20 बजे यह रेस्क्यू ऑपरेशन पूरी तरह खत्म हुआ। हवा में फंसे लोगों को बचाने का यह पूरा ऑपरेशन करीब 6 घंटे तक लगातार चला।



रस्सियों और सीढ़ियों का सहारा
भारतीय सेना ने एक्स पर बताया कि शुरुआती पांच घंटों में ही 179 पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। ज्यादातर लोगों को रस्सियों और सीढ़ियों के सहारे नीचे उतारा गया। इनमें कई महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग पर्यटक भी शामिल थे।

दो फेज में बंटा है गुलमर्ग गोंडोला
गुलमर्ग गोंडोला मुख्य रूप से दो फेज में बंटा हुआ है। इसका पहला फेज गुलमर्ग को कोंगडोरी से जोड़ता है। दूसरा फेज कोंगडोरी से अफरवात स्टेशन तक जाता है। दोनों रूटों पर कुल 108 केबिन कार चलती हैं।

24 घंटे में दूसरी बार खराबी
श्रीनगर से गुलमर्ग गोंडोला की कुल दूरी 51 किलोमीटर है। सूत्रों के मुताबिक इस रोपवे में रविवार को भी तकनीकी गड़बड़ी आई थी। मरम्मत के बाद सोमवार को सेवा दोबारा शुरू की गई थी। लेकिन 24 घंटे के भीतर यह दोबारा खराब हो गया।


साल 2017 का भीषण हादसा
इससे पहले गुलमर्ग गोंडोला में 25 जून 2017 को एक बड़ा हादसा हुआ था। तेज आंधी के दौरान एक बड़ा पेड़ गोंडोला की केबल लाइन पर गिर गया था। इससे एक केबिन 100 फीट नीचे गिर गया था, जिससे सात लोगों की मौत हो गई थी।

उमर अब्दुल्ला ने जताया भरोसा
इस घटना को लेकर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। सभी केबिन और उसमें फंसे पर्यटक सुरक्षित हैं। घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की नजर
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि मैं रेस्क्यू ऑपरेशन पर खुद नजर रख रहा हूं। मैंने डीजीपी को घटनास्थल पर जाने का निर्देश दिया था। मौके पर डीसी और एसएसपी की जॉइंट टीम तैनात रही।

देश के प्रमुख रोपवे हादसे
झारखंड के देवघर स्थित त्रिकूट पर्वत पर 10 अप्रैल 2022 को रोपवे ट्रॉलियां हवा में फंस गई थीं। तीन दिनों तक चले ऑपरेशन में 47 लोगों को बचाया गया था, जबकि 3 लोगों की मौत हुई थी।

दार्जिलिंग में भी हुआ था हादसा
पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में 19 अक्टूबर 2003 को रंगीत रोपवे की तीन कारें घाटी में गिर गई थीं। इस हादसे में तीन महिलाओं और एक बच्चे सहित कुल 4 पर्यटकों की मौत हुई थी, जबकि 11 लोग घायल हुए थे।


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