यूपी को 4 साल बाद मिला स्थायी DGP, राजीव कृष्ण के नाम पर लगी मुहर
x

यूपी को 4 साल बाद मिला स्थायी DGP, राजीव कृष्ण के नाम पर लगी मुहर

वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण बने उत्तर प्रदेश के नए पूर्णकालिक पुलिस कप्तान। कार्यवाहक डीजीपी का दौर खत्म, सुप्रीम कोर्ट के नियम से मिलेगा लंबा कार्यकाल।


Click the Play button to hear this message in audio format

UP DGP Selection: उत्तर प्रदेश को करीब चार साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार अपना स्थायी पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मिल गया है। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण को प्रदेश का नया पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा भेजे गए तीन अफसरों के पैनल पर शासन स्तर पर गहन मंथन के बाद, मुख्यमंत्री ने राजीव कृष्ण के नाम के प्रस्ताव को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही सूबे में मई 2022 से चल रहा कार्यवाहक डीजीपी का दौर पूरी तरह खत्म हो गया है, जिससे पुलिस महकमे में एक बड़ी स्थिरता आएगी।


सुप्रीम कोर्ट का नियम और जून 2029 तक का लंबा कार्यकाल
राजीव कृष्ण की इस नियुक्ति के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस को एक लंबा और स्थिर नेतृत्व मिलना तय माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, राज्य के स्थायी डीजीपी को न्यूनतम 2 साल का कार्यकाल मिलना अनिवार्य है। चूँकि 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण जून 2029 में रिटायर होंगे, इसलिए नियमों के मुताबिक उन्हें प्रदेश के सबसे बड़े पुलिस पद पर करीब तीन साल का एक लंबा और मजबूत कार्यकाल मिलने की पूरी संभावना है। वे खुद 1 जून 2025 से यूपी के कार्यवाहक डीजीपी का पद संभाल रहे थे, जिन्हें अब स्थायी कमान मिलने जा रही है।

इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर से यूपी पुलिस के 'बॉस' बनने का सफर
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) के रहने वाले राजीव कृष्ण का जन्म 26 जून 1969 को हुआ था। इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद वे भारतीय पुलिस सेवा के लिए चुने गए। 15 सितंबर 1991 को पुलिस सेवा में आए राजीव कृष्ण का करियर बेहद शानदार रहा है। वे साल 2007 में डीआईजी, 2010 में आईजी और 1 जनवरी 2016 को अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) बने। अपनी उत्कृष्ट कार्यशैली के चलते 1 फरवरी 2024 को वे पुलिस महानिदेशक (DGP) के सर्वोच्च रैंक पर प्रमोट हुए। इस नियुक्ति से पहले वे लखनऊ में DGP मुख्यालय और DG सतर्कता (Vigilance) विभाग की कमान संभाल रहे थे।

रेस में शामिल थे ये दिग्गज, ऐसे हुआ अंतिम चयन
स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के लिए 26 मई को यूपीएससी के साथ यूपी के मुख्य सचिव एसपी गोयल और अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद की एक अहम बैठक हुई थी। प्रक्रिया के तहत आयोग ने सीनियरिटी, अनुभव और सर्विस रिकॉर्ड को देखकर 3 नाम शॉर्टलिस्ट किए थे, जिनमें से राज्य सरकार ने राजीव कृष्ण के नाम पर मुहर लगाई। इस रेस में राजीव कृष्ण के अलावा 1990 बैच की सीनियर आईपीएस रेणुका मिश्रा, केंद्र में एसपीजी (SPG) के डायरेक्टर आलोक शर्मा (1991 बैच) और केंद्र में ही प्रतिनियुक्ति पर तैनात पीयूष आनंद (1991 बैच) के नाम भी मजबूती से चर्चा में थे।

राष्ट्रपति पुलिस पदक समेत कई प्रतिष्ठित सम्मानों से हैं नवाजे गए
अपने लंबे और शानदार सेवाकाल में राजीव कृष्ण को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए कई प्रतिष्ठित पदकों से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें पुलिस मेडल, पुलिस मेडल फॉर मेधावी सेवा और राष्ट्रपति पुलिस पदक (PPMDS) जैसे शीर्ष सम्मान मिल चुके हैं। इसके अलावा पुलिस विभाग में उनके बेहतरीन योगदान की सराहना करते हुए उन्हें 'DG का कमेंडेशन रॉल' और अलग-अलग वर्षों में प्रतिष्ठित 'DG कमेंडेशन डिस्क' के सिल्वर, गोल्ड और प्लैटिनम तीनों संस्करणों से भी सम्मानित किया गया है।


Read More
Next Story