MP में राज्यसभा की तीसरी सीट पर खेला; दांव पर 11 नंबर का गणित
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MP में राज्यसभा की तीसरी सीट पर 'खेला'; दांव पर 11 नंबर का गणित

बीजेपी के महेश केवट के सामने कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन. कभी 11 साथियों संग निष्कासित हुए केवट को अब जीत के लिए चाहिए विपक्ष के 11 वोट; विधायकों की बाड़ेबंदी शुरू.


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Madhya Pradesh Rajya Sabha Election: मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीसरी सीट की लड़ाई अब महज एक चुनावी मुकाबला नहीं रह गई है, बल्कि यह वफादारी, क्रॉस वोटिंग और सियासी मैनेजमेंट की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा बन चुकी है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मध्य प्रदेश मत्स्य कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट को कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ मैदान में उतारकर इस पूरी जंग को एक हाई-वोल्टेज पॉलिटिकल थ्रिलर में बदल दिया है. इस पूरे चुनाव के केंद्र में '11' नंबर की एक ऐसी अजीब और दिलचस्प कहानी है, जो एमपी की सियासत का रुख तय करने जा रही है.


दरअसल, महेश केवट की उम्मीदवारी का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि साल 2022 में निवाड़ी नगर परिषद अध्यक्ष के चुनाव के दौरान केवट और बीजेपी के 10 अन्य कार्यकर्ताओं (कुल 11 लोगों) पर कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने का आरोप लगा था. इसके बाद मंत्री भूपेंद्र सिंह की मौजूदगी में हुई जांच के बाद इन सभी 11 लोगों को 6 साल के लिए बीजेपी से निष्कासित कर दिया गया था. लेकिन राजनीति का पहिया देखिए कितनी तेजी से घूमा; जिन केवट को कभी कांग्रेस की मदद करने के आरोप में बाहर का रास्ता दिखाया गया था, आज वही कांग्रेस का खेल बिगाड़ने के लिए बीजेपी के सबसे बड़े हथियार बनकर राज्यसभा के मैदान में खड़े हैं.

क्या है नंबर '11' का असली गणित? क्यों उड़े हैं कांग्रेस के होश
गणित विषय से ग्रेजुएट महेश केवट इस समय अपनी जीत के लिए विधानसभा के उसी गणितीय समीकरण पर भरोसा कर रहे हैं, जिसे लेकर कांग्रेस खेमे में खतरे की घंटी बज चुकी है:

बीजेपी के पास वोटों की कमी: विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, बीजेपी दो राज्यसभा सीटें आसानी से जीत रही है. दो सीटें सुरक्षित करने के बाद बीजेपी के पास करीब 47 अतिरिक्त वोट बचते हैं, जबकि जीत के लिए 58 वोटों की जरूरत है. यानी तीसरी सीट निकालने के लिए बीजेपी को ठीक 11 अतिरिक्त वोटों की दरकार है.

क्रॉस वोटिंग का बड़ा खतरा: महेश केवट की जीत पूरी तरह इस बात पर टिकी है कि क्या वे कांग्रेस या विपक्षी खेमे से 11 विधायकों को तोड़ पाते हैं या उनसे क्रॉस वोटिंग करा पाते हैं. यही कारण है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय के वो बयान अब रणनीति का हिस्सा दिख रहे हैं, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि "तीसरी सीट जीतेंगे, वह जाएगी कहां?"

कागजों पर कांग्रेस मजबूत, लेकिन डर बरकरार: कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के पास कागज पर लगभग 61 प्रभावी वोट हैं, जो जीत के आंकड़े (58) से सिर्फ 3 वोट ज्यादा हैं. यानी कांग्रेस के पास मार्जिन बहुत कम है और अगर जरा सी भी सेंधमारी हुई, तो पूरा पासा पलट जाएगा.

विधायकों को तेलंगाना या कर्नाटक भेजने की तैयारी; बाड़ेबंदी में जुटी कांग्रेस
क्रॉस वोटिंग और टूट के इसी गंभीर खतरे को देखते हुए कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों की मौजूदगी अनिवार्य कर दी है. सूत्रों के मुताबिक, विधायकों को बीजेपी के 'ऑपरेशन लोटस' से बचाने के लिए उन्हें कांग्रेस शासित राज्य तेलंगाना या कर्नाटक भेजने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है. विशेष बात यह है कि मीनाक्षी नटराजन खुद कांग्रेस की तेलंगाना प्रभारी भी हैं, इसलिए वहां की सरकार के संरक्षण में विधायकों को रखना पार्टी के लिए सबसे मुफीद रणनीति माना जा रहा है.

1984 से RSS के सिपाही; जमीनी कार्यकर्ता के बहाने बीजेपी का सामाजिक दांव
बीजेपी महेश केवट को एक ऐसे जमीनी और पिछड़े समाज (केवट समाज) के कार्यकर्ता के रूप में पेश कर रही है, जिसे संगठन ने फर्श से उठाकर राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया है:

आरएसएस से जुड़ाव: महेश केवट 1984 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहे हैं और 1995 से बीजेपी की सक्रिय राजनीति में हैं.

जमीनी अनुभव: वे पार्षद रहे, ओरछा नगर परिषद के उपाध्यक्ष रहे, फिर निष्कासन रद्द होने के बाद पार्टी में लौटे और मत्स्य कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष बनकर राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त किया.

आज विधानसभा में होगा शक्ति प्रदर्शन
सोमवार को भोपाल विधानसभा में दोनों ही दल अपना-अपना पर्चा दाखिल करने के साथ ही भारी शक्ति प्रदर्शन करेंगे. बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री मोहन यादव, वरिष्ठ मंत्रियों और विधायकों की फौज महेश केवट के साथ नामांकन में मौजूद रहेगी. वहीं, कांग्रेस की तरफ से मीनाक्षी नटराजन के समर्थन में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार मोर्चा संभालेंगे. कुल मिलाकर, यह चुनाव अब दो विचारधाराओं से आगे बढ़कर 'नंबर 11' के सबसे बड़े सियासी सस्पेंस में तब्दील हो चुका है.


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