नोएडा में श्रमिकों के हंगामे के बाद एक्शन: 10 ठेकेदारों के लाइसेंस रद्द
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नोएडा में श्रमिकों के हंगामे के बाद एक्शन: 10 ठेकेदारों के लाइसेंस रद्द

नोएडा श्रम विभाग ने 43 ठेकेदारों को थमाया नोटिस और 10 को किया ब्लैकलिस्ट। मजदूरों के वेतन और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर अपर श्रमायुक्त राकेश द्विवेदी की बड़ी कार्रवाई।


Noida Labourer Protest : नोएडा में पिछले सोमवार को हुए मजदूरों के उग्र विरोध प्रदर्शन ने शासन और प्रशासन की नींद उड़ा दी थी। इस घटना के बाद अब उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही है। राज्य सरकार के सख्त रुख को देखते हुए श्रम विभाग ने उन ठेकेदारों पर प्रहार शुरू कर दिया है, जो श्रमिकों के हक का हनन कर रहे थे।

श्रमिकों का विश्वास जीतने की बड़ी कोशिश

सरकार का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक शांति बनाए रखने के साथ-साथ श्रमिकों के भीतर सरकार के प्रति अटूट विश्वास पैदा करना है। आंदोलन से उपजे असंतोष को शांत करने के लिए शनिवार को श्रम विभाग ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। अपर श्रमायुक्त राकेश द्विवेदी के नेतृत्व में जिले भर की औद्योगिक इकाइयों में व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया गया।

विपक्ष की राजनीति पर लगाम लगाने की रणनीति

प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार इस मुद्दे पर विपक्ष को कोई भी मौका नहीं देना चाहती है। विपक्षी दल अक्सर मजदूरों के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरते रहे हैं। ऐसे में सरकार ने त्वरित कार्रवाई के जरिए यह संदेश दिया है कि वह श्रमिकों के हितों के प्रति सजग है। इससे विपक्ष की राजनीति पर नकेल कसने की भी तैयारी है।

लापरवाह ठेकेदारों पर गिरी गाज: 10 लाइसेंस निरस्त

निरीक्षण के दौरान जिन संस्थानों में भारी अनियमितताएं पाई गईं, वहां तत्काल एक्शन लिया गया। अपर श्रमायुक्त ने बताया कि गंभीर लापरवाही मिलने पर 10 ठेकेदारों के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए गए हैं। इसके साथ ही उन्हें ब्लैकलिस्ट करने के लिए प्रदेश के श्रमायुक्त को पत्र भी भेजा गया है। इन ठेकेदारों पर वेतन भुगतान और सुरक्षा में कोताही के आरोप हैं।

43 ठेकेदारों को नोटिस और सख्त चेतावनी

श्रम विभाग ने 43 अन्य ठेकेदारों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान केवल एक दिन की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार का प्रयास है कि पारदर्शी व्यवस्था लागू हो जिससे भविष्य में उग्र आंदोलन जैसी स्थिति दोबारा न बने। अधिकारियों के अनुसार, श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें न्याय दिलाना उनकी पहली प्राथमिकता है।

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