नॉएडा में फैक्ट्रियों के बाद सोसायटी में संग्राम: वेतन वृद्धि के लिए मेड का बवाल
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नॉएडा में फैक्ट्रियों के बाद सोसायटी में संग्राम: वेतन वृद्धि के लिए मेड का बवाल

वेतन वृद्धि और साप्ताहिक छुट्टी की मांग को लेकर क्लियो काउंटी सोसाइटी पर बवाल; पुलिस पर घर में घुसकर पीटने का आरोप। पुलिस ने जताया साजिश का शक, भ्रामक वीडियो फैलाने वालों पर STF की नज़र।


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Maids Protest In Noida : नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में न्यूनतम मजदूरी को लेकर चल रहा बवाल अब हाई-राइज सोसायटियों की दहलीज तक जा पहुंच गया है। सोमवार को फैक्ट्रियों में हुई हिंसा की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि मंगलवार सुबह सेक्टर 121 स्थित 'क्लियो काउंटी' (Cleo County) सोसाइटी के बाहर जबरदस्त हंगामा शुरू हो गया। सैकड़ों की संख्या में घरेलू सहायिकाओं (Maids) ने काम का बहिष्कार करते हुए सड़कों पर प्रदर्शन किया। वेतन वृद्धि और साप्ताहिक छुट्टी की मांग को लेकर शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन देखते ही देखते पत्थरबाजी और लाठीचार्ज में तब्दील हो गया। पुलिस इस घटना को महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि शहर की शांति भंग करने की एक 'बड़ी साजिश' के तौर पर देख रही है।



सुबह 7 बजे से शुरू हुआ विरोध का सिलसिला
सेक्टर 121 की पॉश सोसाइटी क्लियो काउंटी में मंगलवार की सुबह रोज की तरह नहीं थी। सुबह करीब 7:00 बजे घरेलू सहायिकाएं सोसाइटी के गेट पर पहुंची लेकिन अंदर नहीं गयी। ऐसा बताया जा रहा है कि वहां कुछ महिलाएं पहले से मौजूद थी, जिन्होंने वेतन वृद्धि को लेकर अन्य सहायिकाओं को उकसाया और उन्हें काम पर जाने से रोक दिया। जिसके बाद वेतन वृद्धि और साप्ताहिक छुट्टी को लेकर प्रदर्शन शुरू हो गया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक हमारी मांग नहीं मानी जाएगी तब तक कोई भी मेड काम पर नहीं जाएगी। हालाँकि जब फ़ेडरल ने प्रदर्शन में शामिल एक मेड से बात की तो उन्होंने इस बात को नकार दिया कि वहां कुछ महिलाओं ने तमाम मेड ( सहायिकाओं ) को भड़काया था।

जैसे-जैसे समय बीतता गया, गेट पर भीड़ बढ़ती गई और वहां करीब 400 से 500 लोग जमा हो गए। चश्मदीदों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान अचानक कुछ युवकों ने वहां खड़ी एक बस पर पथराव कर दिया, जिसके बाद स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। मौके पर पहुंची भारी पुलिस बल और पैरामिलिट्री फोर्स ने स्थिति को संभालने के लिए बल प्रयोग किया। आरोप है कि पुलिस ने बिना किसी चेतावनी के लाठीचार्ज शुरू कर दिया, जिससे अफरा-तफरी मच गई और लोग गलियों में भागने लगे।

सहायिकाओं का दर्द: "8 साल से नहीं बढ़ी सैलरी, महंगाई ने तोड़ी कमर"
सोसाइटी में करीब 8 साल से खाना बनाने और सफाई का काम करने वाली बबली ने अपनी मजबूरी साझा करते हुए बताया कि महंगाई आसमान छू रही है, लेकिन उनकी सैलरी आज भी वहीं अटकी हुई है। बबली के अनुसार, "हमें एक घर से मात्र 2500 से 3000 रुपये मिलते हैं। बदले में एक घर में दिन में दो बार जाना पड़ता है और एक बार में कम से कम 2 से ढाई घंटे लगते हैं। इतनी कम पगार में गुजारा कैसे होगा? जब हम सैलरी बढ़ाने की बात करते हैं, तो मैडम लोग धमकी देती हैं कि काम छोड़ दो, हम दूसरी मेड रख लेंगे और तुम पर चोरी का झूठा इल्जाम लगा देंगे।"
जब बबली से ये पूछा गया कि क्या उन्हें और तमाम अन्य मेड को प्रदर्शन के लिए किसी ने कहा था या फिर सभी मेड ने पहले से प्रदर्शन के लिए एक राय बनायी थी तो बबली ने इस बात से इनकार कर दिया। बबली ने कहा कि सभी को पगार कम मिलती है, महंगाई बहुत ज्यादा है, इसलिए आज सुबह हम सभी लोग सोसाइटी के गेट पर एकत्र हुए और सबने प्रदर्शन शुरू कर दिया।

प्रदर्शनकारियों का गुस्सा केवल सैलरी को लेकर नहीं, बल्कि पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी था। स्थानीय निवासियों और मजदूरों का आरोप है कि पुलिस ने केवल सड़क पर मौजूद लोगों को नहीं पीटा, बल्कि वे घरों के अंदर घुसकर उन लोगों को भी मार रहे थे जो रात की ड्यूटी करके सो रहे थे। सुनील और सागर जैसे ड्राइवरों ने पुलिस की लाठी से लगी अपनी चोटें दिखाते हुए बताया कि वे सिर्फ अपनी ड्यूटी पर जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने बगैर कुछ पूछे उन पर डंडे बरसाना शुरू कर दिए। प्रदर्शनकारियों में इस बात को लेकर भी असंतोह्स है कि लाठीचार्ज के दौरान एक गर्भवती महिला घायल होकर बेहोश हो गई, जिसके बाद माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।
हालाँकि जब प्रदर्शनकारियों से पूछा गया कि वो गर्भवती महिला कहाँ रहती है तो उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी।

सोशल मीडिया पर 'डिजिटल षड्यंत्र' और भ्रामक वीडियो
नोएडा पुलिस इस पूरी घटना को औद्योगिक क्षेत्रों में हुए बवाल की अगली कड़ी मान रही है। नॉएडा पुलिस की महिला डीसीपी शैव्या गोयल के अनुसार, सोशल मीडिया पर इस घटना के वीडियो को भ्रामक तरीके से फैलाया जा रहा है। एक ही जगह के वीडियो को नोएडा की तीन अलग-अलग लोकेशन्स का बताकर वायरल किया जा रहा है, ताकि शहर में दहशत का माहौल पैदा किया जा सके।

पुलिस का मानना है कि यह कोई स्वतः स्फूर्त प्रदर्शन नहीं था, बल्कि इसके पीछे कुछ असामाजिक तत्व थे, जिन्होंने काम पर जा रही महिलाओं को उकसाया और भड़काया। एसटीएफ (STF) अब उन डिजिटल फुटप्रिंट्स की जांच कर रही है, जिनके जरिए पिछले 24 घंटों में 50 से अधिक नए सोशल मीडिया अकाउंट्स बनाकर इस भ्रामक नैरेटिव को हवा दी गई है।


पुलिस ने कई लोगों को लिया हिरासत में

पुलिस ने सेक्टर 121 और आसपास के इलाकों से कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है। प्रभावित सोसायटियों के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है और रूट डायवर्जन लागू किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि वे किसी भी पक्ष पर बल प्रयोग नहीं करना चाहते, बल्कि बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहते हैं। हालांकि, जिस तरह से यह आंदोलन फैक्ट्रियों से निकलकर सोसायटियों तक पहुंचा है, उसने प्रशासन के लिए एक नई और जटिल चुनौती खड़ी कर दी है।





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