
पंजाब निकाय चुनाव में AAP की ऐतिहासिक जीत, बिखरी कांग्रेस में कलह
स्थानीय निकाय चुनाव में आप (AAP) को मिलीं 958 सीटें, कांग्रेस 397 पर सिमटी। दिल्ली में राहुल गांधी की बैठक में तीखी बहस; बड़े बदलावों की तैयारी में आलाकमान।
Punjab Local Body Elections: पंजाब के स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों ने राज्य की सियासत में एक नया इतिहास रच दिया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए कुल 958 सीटों पर जीत दर्ज की है, जो पिछले चुनावों के मुकाबले एक बहुत बड़ी छलांग है क्योंकि पिछली बार पार्टी के पास महज 69 सीटें थीं। इसके विपरीत, साल 2021 के निकाय चुनावों में 1399 सीटें जीतकर एकतरफा दबदबा बनाने वाली कांग्रेस पार्टी इस बार सिर्फ 397 सीटों पर सिमट कर रह गई है।
शहरी पंजाब में कांग्रेस को सबसे तगड़ा झटका लगा है, जहां उसका वोट प्रतिशत 64.6 फीसदी से घटकर सीधे 20 फीसदी पर आ गया है। इस चुनावी फेरबदल में शिरोमणि अकाली दल भी 284 से घटकर 192 सीटों पर आ गई है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शहरी क्षेत्रों में फायदा उठाते हुए 49 सीटों से एक बड़ा उछाल लिया है और 172 सीटों पर कब्जा जमा लिया है।
दिल्ली की बैठक में चन्नी और राजा वडिंग के बीच तीखी बहस, बीच में बैठक छोड़ गए बाजवा!
पंजाब में मिली इस करारी हार के बाद कांग्रेस आलाकमान ने स्थिति को संभालने के लिए पंजाब के शीर्ष नेताओं को दिल्ली तलब किया था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मौजूदगी में हुई इस समीक्षा बैठक में पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी और कलह खुलकर सामने आ गई।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पंजाब कांग्रेस के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के बीच जमकर बहस हुई। दरअसल, चन्नी ने अपने प्रभाव वाले क्षेत्र में स्थानीय निकाय चुनाव में बेहतरीन प्रदर्शन करके दिखाया, जबकि प्रदेश अध्यक्ष राजा वडिंग अपने खुद के इलाके में पार्टी को मजबूत रिजल्ट देने में पूरी तरह नाकाम रहे।
इतना ही नहीं, खबर यह भी है कि बैठक में पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) प्रताप सिंह बाजवा को लेकर भी तीखी बहस हुई, जिसके बाद वे बीच में ही बैठक छोड़कर चले गए। हालांकि, बाजवा ने आधिकारिक तौर पर बैठक बीच में छोड़ने की बात से साफ इनकार किया है, लेकिन अंदरखाने से आ रही इन खबरों ने स्पष्ट कर दिया है कि पंजाब कांग्रेस इस समय पूरी तरह बिखरी और बंटी हुई नजर आ रही है। स्थिति को देखते हुए राहुल गांधी ने सभी नेताओं को सख्त हिदायत दी है कि वे अपने निजी स्वार्थों को भुलाकर पूरी ताकत से सिर्फ पार्टी के लिए काम करें।
राहुल गांधी का 'मास्टर प्लान': विजय इंदर सिंगला बन सकते हैं नए प्रदेश अध्यक्ष
पंजाब कांग्रेस में जारी इस अंदरूनी कलह को समाप्त करने और संगठन में नई जान फूंकने के लिए राहुल गांधी अब पूरी पंजाब यूनिट को एक नया रूप (Restructure) देने की तैयारी में जुट गए हैं। सूत्रों की मानें तो आलाकमान जल्द ही पंजाब में बड़े संगठनात्मक बदलावों का आधिकारिक ऐलान कर सकता है:
विजय इंदर सिंगला (प्रदेश अध्यक्ष की रेस में आगे): पंजाब की राजनीति में हमेशा हिंदू और सिख चेहरों के बीच एक सामाजिक और राजनीतिक तालमेल बिठाकर काम किया जाता है। इसी समीकरण के तहत हिंदू चेहरे के रूप में विजय इंदर सिंगला का नाम प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए सबसे आगे चल रहा है। सिंगला संगरूर से सांसद और विधायक रह चुके हैं और उन्हें गांधी परिवार (10 जनपथ) का बेहद करीबी माना जाता है।
प्रगट सिंह (नेता प्रतिपक्ष की चर्चा): यदि विजय इंदर सिंगला को संगठन की कमान सौंपी जाती है, तो सिख चेहरे के तौर पर प्रगट सिंह को पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) बनाए जाने की राजनीतिक गलियारों में भारी चर्चा है।
चरणजीत सिंह चन्नी और रंधावा को नई जिम्मेदारी: निकाय चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब कांग्रेस की कैंपेन कमेटी (चुनाव अभियान समिति) का प्रमुख बनाया जा सकता है। वहीं, पार्टी के वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा को आगामी चुनावों के मद्देनजर टिकट बंटवारा कमेटी (Ticket Distribution Committee) में महत्वपूर्ण जगह दी जा सकती है।
पंजाब की अनप्रेडिक्टेबल पॉलिटिक्स: हर किसी के लिए खुला है मौका
पंजाब की जमीनी राजनीति का इतिहास बेहद दिलचस्प और अप्रत्याशित (Unpredictable) रहा है। साल 2021 के स्थानीय निकाय चुनावों में जब कांग्रेस ने 1399 सीटें जीती थीं, तब किसी ने नहीं सोचा था कि ठीक एक साल बाद यानी 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सत्ता से बाहर हो जाएगी और आम आदमी पार्टी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बन जाएगी।
यही कारण है कि निकाय चुनावों के इन नतीजों के बाद भी पंजाब की बिसात पर सभी राजनीतिक दलों (आप, कांग्रेस, भाजपा और अकाली दल) के लिए रास्ते खुले हुए हैं। बस जरूरत इस बात की है कि कौन सा दल बेहतर नेतृत्व और जनता से जुड़े प्रभावी मुद्दों को लेकर जमीन पर उतरता है।

