
संदीप पाठक: राजनीति धर्म के लिए बदला रास्ता, नीति से नहीं समझौता
राज्यसभा सांसद संदीप पाठक ने पंजाब में दर्ज FIR पर दी प्रतिक्रिया। उन्होंने कहा कि 'आप' छोड़ने का फैसला व्यक्तिगत नहीं बल्कि नीति और राजनीतिक धर्म की लड़ाई थी।
Sandeep Pathak's Reaction : भाजपा के राज्यसभा सांसद संदीप पाठक ने पंजाब में अपने खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर की खबरों पर चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा कि टीवी चैनलों के जरिए उन्हें पता चला है कि पंजाब में उनके खिलाफ दो मामले दर्ज किए गए हैं। हालांकि, संदीप पाठक ने स्पष्ट किया कि उन्हें अब तक इन मामलों के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। वह फिलहाल एफआईआर की कॉपी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
सरकारी तंत्र के दुरुपयोग की आशंका
संदीप पाठक ने इस कार्रवाई के पीछे सरकारी मशीनरी के गलत इस्तेमाल का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि संभव है कि सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करके ये केस दर्ज किए गए हों। उन्होंने साफ किया कि वह किसी भी तरह की विस्तृत प्रतिक्रिया तभी देंगे, जब उनके पास एफआईआर के दस्तावेज होंगे। सांसद ने कहा कि बिना कॉपी देखे कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
#WATCH | Delhi: Rajya Sabha MP Sandeep Pathak says, "Since yesterday, television channels have been reporting that two FIRs have been filed against me in Punjab. I have yet to receive any formal or informal information about these FIRs. Since yesterday, I've been waiting to… pic.twitter.com/HDKjZ2a92B
— ANI (@ANI) May 3, 2026
नीति और धर्म के रास्ते पर चलने का दावा
राजनीतिक बदलाव के बीच पाठक ने अपनी कार्यशैली पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि उनके साथ काम करने वाले जानते हैं कि वह नीति और धर्म के रास्ते पर चलने वाले व्यक्ति हैं। संदीप पाठक के अनुसार, जब तक वह आम आदमी पार्टी में रहे, उन्होंने ईमानदारी से काम किया। अब भाजपा में भी वह इन्हीं सिद्धांतों के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाएंगे।
आप छोड़ने के पीछे सैद्धांतिक मतभेद
मीडिया से बातचीत में संदीप पाठक ने आम आदमी पार्टी छोड़ने की असली वजह भी बताई। उन्होंने कहा कि पार्टी छोड़ने का फैसला व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सैद्धांतिक था। कार्यशैली में लंबे समय से आ रहे अंतर के कारण उन्होंने यह कदम उठाया। उन्होंने कहा कि अब उनका और आम आदमी पार्टी का रास्ता पूरी तरह अलग हो चुका है।
राजनीतिक धर्म को सर्वोपरि बताया
संदीप पाठक ने कहा कि राजनीति में उनके लिए हार-जीत से ज्यादा राजनीतिक धर्म मायने रखता है। उन्होंने राजनीति में आने को एक कठिन निर्णय बताया और कहा कि इसी डर से लोग इसमें नहीं आते। पाठक ने विश्वास जताया कि वह एक साधारण व्यक्ति हैं और ईश्वर उनके इस कठिन सफर में साथ देगा। वह अपनी नई भूमिका को लेकर पूरी तरह तैयार हैं।
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