अमित शाह पर केजरीवाल के 5 सवाल, एमपी में कांग्रेस का सेल्फ-गोल!
अरविंद केजरीवाल ने पूछा- प्राण प्रतिष्ठा के 891 दिन बाद भी अयोध्या क्यों नहीं गए गृह मंत्री?; दिग्विजय सिंह के बयान पर कांग्रेस में ही बगावत; दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर करप्शन उजागर।
Rajpath: सियासी घमासान, अंदरूनी बगावत और बुनियादी विकास के दावों के बीच भ्रष्टाचार की पोल खोलती तीन बड़ी राष्ट्रीय खबरों के साथ 'द फेडरल देश' का खास शो 'राजपथ' हाजिर है। आज एंकर प्रदीप सहगल देश की राजनीति को हिला देने वाले तीन बड़े मुद्दों का पूरा विश्लेषण करेंगे।
1. अमित शाह बनाम केजरीवाल: राम मंदिर विवाद पर दागे 5 तीखे सवाल
अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे और चंदे की चोरी के मामले को लेकर राजनीति थमने का नाम नहीं ले रही है। इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चुप्पी के बीच दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर अब तक का सबसे तीखा और सीधा हमला बोला है।
अरविंद केजरीवाल ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश करते हुए दावा किया कि अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा (22 जून 2024) को ढाई साल (891 दिन) बीत चुके हैं, लेकिन देश के गृह मंत्री अमित शाह इस दौरान एक बार भी रामलला के दर्शन करने अयोध्या नहीं गए।
"चुनाव जीतने और वोट बटोरने के लिए अमित शाह ने इन 891 दिनों में 42 से ज्यादा बार अपने भाषणों और इंटरव्यू में राम मंदिर का नाम जपा, लेकिन प्रभु राम के चरणों में माथा टेकने का उनके पास समय नहीं है। जो राम के नहीं हुए, वे राष्ट्र के क्या होंगे।" — अरविंद केजरीवाल, प्रमुख, AAP
केजरीवाल के वो 5 सवाल जिन्होंने बढ़ाई अमित शाह की मुश्किल:
अमित शाह जी, आप आज तक (प्राण प्रतिष्ठा के बाद) राम मंदिर क्यों नहीं गए?
क्या आपका भगवान राम के दर्शन करने का मन नहीं करता?
क्या आप राम मंदिर जाने से कतरा रहे हैं?
क्या आपको प्रभु राम के आशीर्वाद की जरूरत नहीं है?
(सबसे तीखा सवाल) क्या आप रामचंद्र जी को दिल से भगवान मानते भी हैं?
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि बीजेपी नेताओं के मन में भगवान का कोई खौफ नहीं है, क्योंकि वे राम नाम को सिर्फ एक चुनावी मुद्दा मानते हैं, यही वजह है कि मंदिर के चढ़ावे की खुलेआम चोरी होने के बावजूद पूरी सरकार मौन व्रत धारण किए बैठी है।
2. मध्य प्रदेश में कांग्रेस का 'सेल्फ-गोल': मोहन यादव को घेरने चले थे, खुद के चक्रव्यूह में फंसे
मध्य प्रदेश से कांग्रेस की 'अंधेर नगरी' और अनुशासनहीनता का एक गजब का उदाहरण सामने आया है। सूबे के मुख्यमंत्री मोहन यादव को उज्जैन जमीन विवाद मामले में पूरी ताकत से घेरने के लिए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मोर्चेबंदी की थी।
लेकिन तीर तरकश से बाहर निकलता, उससे पहले ही कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर एक ऐसा विवादित बयान दे डाला कि पूरी स्क्रिप्ट ही पलट गई।
कांग्रेस के भीतर ही छिड़ गया गृहयुद्ध
दिग्विजय सिंह के बयान पर बीजेपी तो बाद में भड़की, पहले कांग्रेस की अपनी ही नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी की बेटी निधि चतुर्वेदी ने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया। निधि चतुर्वेदी ने Facebook पर सरेआम लिखा:
"दिग्विजय सिंह का यह बयान राहुल गांधी और दिन-रात बीजेपी-आरएसएस के खिलाफ सड़क पर लड़ रहे जमीनी कार्यकर्ताओं के मुंह पर एक करारा तमाचा है। दिल्ली दरबार को दिग्विजय सिंह पर तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) करनी चाहिए।"
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि जब-जब कांग्रेस किसी बड़े मुद्दे पर बीजेपी को घेरने का चक्रव्यूह तैयार करती है, उनका कोई न कोई सिपहसालार अपनी ही पार्टी की लुटिया डुबो देता है। सीएम मोहन यादव को बैकफुट पर लाने चली कांग्रेस अब खुद दिग्विजय सिंह के बयान के भंवर में फंस चुकी है।
3. दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर भ्रष्टाचार का 'वर्ल्ड क्लास' गड्ढा
तीसरी बड़ी खबर उन लाखों मुसाफिरों से जुड़ी है जो दिल्ली से देहरादून के बीच 212 किलोमीटर का सफर महज ढाई घंटे में पूरा करने का ख्वाब देख रहे थे।
इसी साल 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़े जोर-शोर से करोड़ों की लागत से बने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था और 15 अप्रैल से इसे जनता के लिए खोल दिया गया था। लेकिन अभी इस वर्ल्ड क्लास एक्सप्रेसवे को बने हुए 90 दिन (3 महीने) भी पूरे नहीं हुए कि पहली ही बारिश में इसकी गुणवत्ता की धज्जियां उड़ गईं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
इंटरनेट पर एक वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें इस नए एक्सप्रेसवे पर बड़े-बड़े जानलेवा गड्ढे नजर आ रहे हैं। जनता की गाढ़ी कमाई से भारी-भरकम टोल टैक्स वसूलने के बाद पहली ही बारिश में सड़क का इस तरह बैठ जाना हमारे सिस्टम और ठेकेदारों के करप्शन की दीमक को साफ उजागर करता है। सवाल उठता है कि दावों के बड़े-बड़े गुब्बारे फुलाने वाले हुक्मरान क्या इस घटिया निर्माण के गुनहगारों पर बुलडोजर चलाएंगे या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
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