चुनावी फायदे के लिए बजरंगबली का डांस? 'राजपथ' में BJP पर बड़ा बवाल
लखनऊ रोड शो विवाद से लेकर पूर्वांचल में ब्राह्मण अस्मिता की बिसात और चंपत राय के रसूख तक; 'राजपथ' शो में प्रदीप सहगल के साथ हर पहलू पर तीखा विश्लेषण।
Rajpath: देश की राजनीति में इन दिनों चुनावी फायदे के लिए भगवान के इस्तेमाल से लेकर जातीय समीकरणों को साधने और रसूखदारों को बचाने का एक बड़ा खेल चल रहा है। चाहे लखनऊ की सड़कों पर बजरंगबली के स्वरूप को नचवाने का विवाद हो, बिहार के भरत तिवारी एनकाउंटर को यूपी में ब्राह्मण अस्मिता का रंग देने की कोशिश हो, या फिर अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट से हटाए जाने के बाद भी चंपत राय का संगठन में रसूख बरकरार रहना हो—राजनीति का स्तर लगातार सवालों के घेरे में है। 'द फेडरल देश' के विशेष शो 'राजपथ' में एंकर प्रदीप सहगल ने इन सभी ज्वलंत मुद्दों पर पैनी नजर डाली।
1. BJP ने किया आस्था से खिलवाड़? लखनऊ से चंडीगढ़ तक बवाल
एक पुरानी कहावत है -'हाथी के दांत खाने के और, दिखाने के और।' दूसरों को हिंदू विरोधी होने का सर्टिफिकेट बांटने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) खुद आज अपनों के ही निशाने पर है। मामला लखनऊ का है, जहां बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के एक चुनावी रोड शो के दौरान जोश में होश खो दिया गया। चुनावी भीड़ में बजरंगबली की वेशभूषा धारण किए एक कलाकार के हाथ में बीजेपी का झंडा थमाकर सड़क पर नचवा दिया गया।
जैसे ही यह घटना घटी, विपक्ष को बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा मिल गया। आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने इस वीडियो को लपकते हुए सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोला। केजरीवाल ने लिखा, "जितना नुकसान और अपमान आप लोगों ने हिंदू धर्म का किया है, शायद 5000 साल के इतिहास में बाहर से आने वाले आतताइयों ने भी नहीं किया! आप लोग हिंदू धर्म पर कलंक हैं!" इस मुद्दे पर बात सिर्फ नेताओं की जुबानी जंग तक नहीं रुकी, बल्कि चंडीगढ़ में इस मामले को लेकर बकायदा एक लिखित शिकायत भी दर्ज करा दी गई है, जिसमें कहा गया है कि वोट बटोरने के लिए भगवान का ऐसा तमाशा बनाना करोड़ों हिंदुओं की आस्था के साथ सीधा खिलवाड़ है।
2. भरत तिवारी एनकाउंटर: क्या पूर्वांचल में बनेगा ब्राह्मण अस्मिता का मुद्दा?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूर्वांचल सिर्फ एक इलाका नहीं, बल्कि सत्ता का सबसे बड़ा रणक्षेत्र माना जाता है। वाराणसी, गोरखपुर, जौनपुर, आजमगढ़, गाजीपुर, बलिया, देवरिया, मऊ और भदोही जैसे जिलों को समेटने वाले इस इलाके में करीब 125 विधानसभा सीटें हैं, जो किसी भी दल की सरकार बना या बिगाड़ सकती हैं। यहां चुनाव सिर्फ विकास पर नहीं, बल्कि सामाजिक और जातीय समीकरणों की बिसात पर लड़े जाते हैं।
यूपी में ब्राह्मण समाज की आबादी करीब 12 प्रतिशत (लगभग 2.5 करोड़) है और इस समय राज्य में 51 ब्राह्मण विधायक और 10 सांसद हैं। पूर्वांचल के जिलों में इनकी आबादी 10 से 14 फीसद के बीच है। यही वजह है कि बिहार के भोजपुर में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर की गूंज अब सीधे पूर्वांचल में सुनाई दे रही है। समाजवादी पार्टी (सपा) इस मौके के जरिए यादव-मुस्लिम समीकरण से आगे बढ़कर ब्राह्मण मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुट गई है। वरिष्ठ पत्रकार श्री शिव शरण सिंह के अनुसार, अगर इस मुठभेड़ को धीरे-धीरे ब्राह्मण सम्मान का मुद्दा बनाया गया, तो विपक्ष इसे योगी सरकार के खिलाफ एक बड़ा चुनावी हथियार बना देगा। हालांकि, पिछले दस सालों में बीजेपी ने ब्राह्मणों, गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलितों को जोड़कर जो अपना अभेद्य सामाजिक किला तैयार किया है, वह उसे इतनी आसानी से टूटने नहीं देना चाहेगी।
3. 'रस्सी जल गई पर बल नहीं गया': चंपत राय का वीएचपी में सिक्का बरकरार
अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में इतनी बड़ी हेराफेरी के बाद भले ही पूरे देश में थू-थू हुई हो और चंपत राय को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद की गद्दी से हाथ धोना पड़ा हो, लेकिन उनके रसूख में कोई कमी नहीं आई है। 'सैयां भए कोतवाल, अब डर काहे का' की तर्ज पर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने साफ कर दिया है कि चंपत राय संगठन में 'अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष' के अपने भारी-भरकम पद पर बने रहेंगे।
वीएचपी का तर्क है कि जब तक आरोप अदालत में साबित नहीं हो जाते, तब तक कोई कार्रवाई नहीं होगी। हालांकि, कानून के जानकार और दस्तावेज बताते हैं कि चंपत राय को जून की शुरुआत में ही इस चोरी का पता चल गया था और संदिग्धों से कैश भी बरामद हो गया था। इसके बावजूद, 4 जून को चोरी पकड़े जाने के बाद भी 7 जून को चंपत राय ने कैमरे के सामने आकर मुस्कुराते हुए कहा था कि "कोई चोरी नहीं हुई है।" जब पानी सिर से ऊपर गुजर गया, तब जाकर 25 जून को एफआईआर दर्ज कराई गई और छोटे-मोटे 8 प्यादों की बलि चढ़ा दी गई। अब जनता हैरान है कि क्या बड़े रसूखदारों के लिए कानून का चश्मा और नियम बदल जाते हैं? क्या चंपत राय को पद पर बनाए रखना हिंदुओं की आस्था के साथ दोबारा खिलवाड़ नहीं है?
'राजपथ' का कड़ा सवाल
शो के अंत में एंकर प्रदीप सहगल ने बेहद कड़े सवाल उठाए कि क्या अब नेताओं को अपनी चुनावी नैया पार लगाने के लिए साक्षात भगवान को ही हाथ में पार्टी का झंडा थमाना पड़ेगा? क्या सोशल मीडिया पर चल रहा यह नैरेटिव 2027 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश का नया जातीय समीकरण तय करेगा? इन बड़े और कड़े सवालों के जवाब आने वाले वक्त के गर्भ में छिपे हैं।
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