BRICS में मोदी-पुतिन-शी जिनपिंग आमने-सामने, दुनिया की नजरें दिल्ली पर
भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी इसे और महत्वपूर्ण बनाती है।
BRICS Summit 2026: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत आ रहे हैं। चीन ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी है कि शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक पर भी सबकी नजर रहेगी। शी जिनपिंग की यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में भारत और चीन के रिश्ते सीमा विवाद के कारण तनावपूर्ण रहे हैं।
भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी इसे और महत्वपूर्ण बनाती है।
मोदी-शी की संभावित द्विपक्षीय बैठक
मोदी और शी की संभावित द्विपक्षीय बैठक में सीमा पर शांति और स्थिरता, LAC की स्थिति, व्यापार, निवेश और दोनों देशों के संबंधों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। हालांकि, बैठक का विस्तृत एजेंडा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है।
शी जिनपिंग की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब दोनों देश संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में BRICS सम्मेलन के दौरान मोदी और शी की मुलाकात भारत-चीन रिश्तों के लिहाज से एक अहम कूटनीतिक घटनाक्रम हो सकती है।
वहीं, नई दिल्ली में होने वाले BRICS सम्मेलन में सदस्य देशों के नेता वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, विकास और मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा करेंगे। सम्मेलन भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं को दुनिया के सामने रखने का भी एक महत्वपूर्ण मंच होगा।
मोदी-पुतिन की बैठक
वहीं, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की द्विपक्षीय बैठक की पुष्टि हो चुकी है। दोनों नेता BRICS सम्मेलन से पहले मुलाकात करेंगे। भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ ऊर्जा, व्यापार, वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दे इस बातचीत के प्रमुख विषय हो सकते हैं।
क्या है ब्रिक्स?
BRICS की शुरुआत BRIC के रूप में हुई थी। 2001 में अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने ब्राजील, रूस, भारत और चीन के लिए यह शब्द इस्तेमाल किया था। 2009 में इन चार देशों का पहला शिखर सम्मेलन हुआ। 2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद इसका नाम BRICS हुआ। अब इसमें 11 सदस्य देश हैं। ब्रिक्स का मकसद इसके सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना और ग्लोबल साउथ की आवाज को वैश्विक मंच पर मजबूती देना।

